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Home› Khabar Junction› Flying Squads Deployed In 34 Districts Of Punjab And Haryana Will Send Daily Reports

पराली जलाने पर अब खेत-खेत नजर: पंजाब-हरियाणा के 34 जिलों में फ्लाइंग स्क्वॉड तैनात, रोजाना भेजेंगे रिपोर्ट

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Mohammad Aamil Updated Mon, 05 Oct 2026 07:53 PM IST
सार

धान कटाई के सीजन में पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए पंजाब के 18 और हरियाणा के 16 जिलों में फ्लाइंग स्क्वॉड तैनात किए गए हैं। टीमें 1 अक्टूबर से 30 नवंबर तक खेतों की निगरानी करेंगी और जमीनी स्थिति की रोजाना रिपोर्ट CAQM को भेजेंगी।

पराली की आग (फाइल फोटो)
पराली की आग (फाइल फोटो) - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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धान की कटाई के सीजन में पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने पंजाब और हरियाणा में निगरानी बढ़ा दी है। आयोग के निर्देश पर दोनों राज्यों के 34 जिलों में फ्लाइंग स्क्वॉड तैनात किए गए हैं। ये टीमें 1 अक्टूबर से 30 नवंबर 2026 तक खेतों में पराली जलाने की स्थिति पर नजर रखेंगी।

पंजाब के 18 और हरियाणा के 16 जिले शामिल
फ्लाइंग स्क्वॉड पंजाब के 18 जिलों और हरियाणा के 16 जिलों में तैनात किए गए हैं। इन टीमों को धान की कटाई वाले प्रमुख इलाकों में भेजा गया है, जहां पराली जलाने की घटनाओं की आशंका ज्यादा रहती है। पंजाब में संगरूर, तरनतारन, फिरोजपुर, मुक्तसर, बठिंडा, अमृतसर, मोगा, मानसा, फाजिल्का, पटियाला, लुधियाना, कपूरथला, फरीदकोट, बरनाला, मलेरकोटला, गुरदासपुर, जालंधर और फतेहगढ़ साहिब शामिल हैं। हरियाणा में जींद, फतेहाबाद, हिसार, कैथल, सोनीपत, रोहतक, सिरसा, करनाल, पलवल, झज्जर, कुरुक्षेत्र, अंबाला, यमुनानगर, फरीदाबाद, पानीपत और हांसी में टीमें निगरानी करेंगी।

रोजाना भेजी जाएगी रिपोर्ट
फ्लाइंग स्क्वॉड अपने-अपने जिलों में जमीनी स्थिति की जांच करेंगे। पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए ये टीमें किसानों, पराली संरक्षण बल, जिला प्रशासन, राज्य सरकार के नोडल अधिकारियों और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों के साथ समन्वय करेंगी।

मैदानी स्थिति और पराली जलाने से रोकने के लिए उठाए गए कदमों की रोजाना रिपोर्ट CAQM को भेजी जाएगी। इससे आयोग को लगातार स्थिति की निगरानी करने और जरूरत पड़ने पर संबंधित अधिकारियों के साथ कार्रवाई करने में मदद मिलेगी।

अलग-अलग चरणों में होगी निगरानी
फ्लाइंग स्क्वॉड की तैनाती अलग-अलग चरणों में की गई है। टीमों को अलग-अलग अवधि के लिए जिलों की जिम्मेदारी दी गई है, ताकि पूरे धान कटाई सीजन में लगातार निगरानी बनी रहे। CAQM का कहना है कि इस व्यवस्था से पराली जलाने की घटनाओं की समय पर जानकारी मिलने के साथ संबंधित एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल और तुरंत रोकथाम की कार्रवाई सुनिश्चित की जा सकेगी।

किसानों के सहयोग पर भी जोर
CAQM पंजाब और हरियाणा सरकार, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और जिला प्रशासन के साथ मिलकर पराली जलाने पर रोक के उपायों की लगातार समीक्षा कर रहा है। आयोग ने सभी संबंधित एजेंसियों से मिलकर काम करने की अपील की है। साथ ही किसानों और अन्य संबंधित लोगों के सहयोग को भी जरूरी बताया है, ताकि धान की कटाई के दौरान पराली जलाने की घटनाओं को रोका जा सके।
 
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