इस बार सेब की मजबूत कीमतों ने बागवानों को कच्चे सेबों की तुड़ाई के लिए प्रोत्साहित किया था, जिसका असर देशभर की थोक मंडियों में देखने को मिल रहा है। मंडियों में कच्चे सेबों की आवक में उछाल ने इस प्रमुख फल के दामों को भी तेजी से गिराने का काम किया है। दूसरी तरफ अच्छे भाव की उम्मीद में बागवानों ने अपनी बिना पकी उपज को नियंत्रित-वातावरण में रखने का फैसला लिया है। हालांकि इन बागवानों को कुछ महीने बाद उपज की गुणवत्ता में गिरावट होने से भारी नुकसान का खतरा है।
मंडियों में सेब की भरमार, कीमतों में भारी गिरावट
किसानों के अनुसार, कुछ हफ्ते पहले तक 15-16 किलो वाले सेब के बॉक्स की कीमत 1,100 से 1,700 रुपये मिल रही थी, जो अब गिरकर 700 से 1,000 रुपये के बीच रह गई है। किसानों का मानना है कि इस गिरावट का एक बड़ा कारण कुल्लू डिलीशियस और डिलीशियस जैसी किस्मों को समय से पहले तोड़ना है।
शोपियां फ्रूट मंडी के अध्यक्ष मोहम्मद अशरफ वानी ने बताया कि शुरुआती सीजन में सेब के ऊंचे दाम देखकर किसानों ने कच्चे सेब ही तोड़ना शुरू कर दिया। वानी के मुताबिक, जब ये कच्चे सेब घाटी के बाहर की थोक मंडियों में पहुंचे, तो दाम अपने आप गिर गए। इसके अलावा, बाजार में सेब की भरमार ने भी कीमतों को नीचे गिराने का काम किया है। व्यापारियों के अनुसार, वर्तमान में घाटी की विभिन्न मंडियों में रोजाना लगभग 18 लाख सेब के कार्टन पहुंच रहे हैं।
एक व्यापारी तारिक अहमद मीर ने बताया कि निचले इलाकों में सेब के ऊंचे दाम देखकर अन्य इलाकों के किसानों ने भी कच्चे सेब तोड़कर मंडियों और सीए स्टोरेज में भेजना शुरू कर दिया।
सीए स्टोरेज में सेब के खराब होने का डर
समय से पहले सेब तोड़ने के कारण नियंत्रित वातावरण में रखे गए सेबों की गुणवत्ता को लेकर भी चिंताएं फिर से बढ़ गई हैं। सही से पकने से पहले तोड़े गए सेबों को स्टोर करने पर उनके खराब होने का खतरा ज्यादा रहता है। इससे सेब का छिलका (त्वचा) काला पड़ सकता है और जब इन्हें बाद में बिक्री के लिए निकाला जाता है, तो इनका बाजार भाव काफी कम हो जाता है।
जानकारों के अनुसार, नियंत्रित वातावरण(सीए स्टोरेज) खासतौर से ए-ग्रेड सेबों के लिए होते हैं। इस साल भी कई बागवानी गलती दोहरा रहे हैं। गौर करने वाली बात यह है कि पिछले साल भी लगातर बारिश की वजह से कई बागवानों को समय से पहले सेब की तुड़ाई कर नियंत्रित वातावरण में रख दिया। लेकिन जब महीनों बाद उन सेबों को बाहर निकाला गया, तो उनका एक बड़ा हिस्सा खराब हो चुका था, जिससे किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ा था।
कश्मीर में स्टोरेज क्षमता की भारी कमी
सेबों को लंबे समय तक सुरक्षित रखने के मामले में कश्मीर में सीए (CA) स्टोरेज की क्षमता भी जरूरत से काफी कम है। वर्तमान में इस क्षेत्र में लगभग 2.92 लाख मीट्रिक टन सीए स्टोरेज की क्षमता है, जबकि अनुमानित जरूरत 6 लाख मीट्रिक टन की है। इसका मतलब है कि यहां जरूरत के मुकाबले आधे से भी कम स्टोरेज क्षमता उपलब्ध है।
चूंकि ऑफ-सीजन (बाद के महीनों) में सेब बेचने के लिए सीए स्टोरेज का इस्तेमाल लगातार बढ़ रहा है, इसलिए उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि कटाई के बाद होने वाले नुकसान से बचने के लिए दो चीजें बहुत जरूरी हैं— पहला, स्टोरेज में जाने वाले सेब की गुणवत्ता अच्छी हो और दूसरा, स्टोरेज का पर्याप्त ढांचा उपलब्ध हो।