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Home› Khabar Junction› Farmers Flock To New Sugarcane Variety 200 000 Seed Stock Depleted In 5 Minutes

Sugarcane Variety: गन्ने की नई किस्म पर टूट पड़े किसान, 5 मिनट में खत्म हुआ 2 लाख बीज का स्टॉक

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Mohammad Aamil Updated Mon, 12 Oct 2026 01:30 PM IST
सार

  • 5 मिनट में बुकिंग पूरी: गन्ने की नई किस्म CoS.23232 के सभी 2 लाख बड ऑनलाइन बुक हो गए।

  • जल्दी तैयार होने वाली किस्म: इसे अगेती कटाई को ध्यान में रखकर विकसित किया गया है।

  • 10% अधिक वजन का दावा: परिषद के अधिकारी के मुताबिक, दूसरी किस्मों की तुलना में गन्ने का वजन करीब 10 प्रतिशत अधिक है।

गन्ने की खेती
गन्ने की खेती - फोटो : गांव जंक्शन
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विस्तार
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उत्तर प्रदेश के किसानों में गन्ने की नई किस्म CoS.23232 को लेकर काफी उत्साह है। इस किस्म की खासियत है कि यह कम समय में तैयार होती है। इसके गन्ने का वजन अधिक है और इसमें चीनी की मात्रा भी बेहतर है। यही वजह है कि ऑनलाइन बुकिंग शुरू होते ही इसके सभी 2 लाख बीज-बड महज पांच मिनट में बुक हो गए। इसके चलते कई किसान बुवाई के लिए बीज सामग्री हासिल नहीं कर सके। CNBC-TV18 की रिपोर्ट के मुताबिक, उत्तर प्रदेश गन्ना शोध परिषद ने 9 अक्टूबर को अपने आधिकारिक पोर्टल पर इसकी ऑनलाइन बुकिंग शुरू की थी।

को.0238 का विकल्प बन सकती है नई किस्म
उत्तर प्रदेश गन्ना शोध परिषद (UPCSR) ने CoS.23232 किस्म विकसित की है। इसे राज्य में बड़े पैमाने पर उगाई जाने वाली गन्ने की किस्म Co.0238 के संभावित विकल्प के रूप में देखा जा रहा है। परिषद के प्रजनन विभाग के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. अरविंद कुमार के मुताबिक, ऑनलाइन बुकिंग शुरू होने के पांच मिनट के भीतर ही सभी 2 लाख बड बुक हो गए। इस नई किस्म को उत्तर भारत की CoS.8119 और दक्षिण भारत की Co.775 किस्मों के संकरण से तैयार किया गया है। इसे विकसित करने और इसकी खूबियों का आकलन करने में करीब 10 साल लगे।

जल्दी तैयार होगा गन्ना, वजन भी ज्यादा
परिषद के प्रसार अधिकारी डॉ. संजीव कुमार पाठक के अनुसार, CoS.23232 को जल्दी कटाई के लिए विकसित किया गया है। इसकी खासियत है कि दूसरी किस्मों की तुलना में प्रति क्विंटल गन्ने का वजन करीब 10 प्रतिशत अधिक बताया गया है। इसके गन्ने लंबे और मोटे होते हैं। साथ ही, इसमें चीनी की मात्रा भी अधिक है।

इससे किसानों को गन्ने की बेहतर उपज और चीनी की अच्छी मात्रा मिलने की उम्मीद है। हालांकि, वास्तविक उत्पादन और चीनी की मात्रा खेत की मिट्टी, मौसम, सिंचाई और खेती के तरीके पर भी निर्भर करेगी।

नई किस्म तैयार करने में लगते हैं 10 से 12 साल
गन्ने की नई किस्म विकसित करने में आमतौर पर 10 से 12 साल लगते हैं। इसकी शुरुआती प्रक्रिया कोयंबटूर में पूरी की जाती है, जहां की जलवायु शुरुआती विकास के लिए अनुकूल है। इसके बाद किस्म की पैदावार और चीनी की मात्रा समेत दूसरी खूबियों का आकलन किया जाता है। फिलहाल CoS.23232 को उत्तर प्रदेश में खेती के लिए मंजूरी मिली है।

किसानों तक बीज पहुंचाने की तैयारी
नई किस्म की बढ़ती मांग को देखते हुए गन्ना शोध परिषद इसकी बीज सामग्री की उपलब्धता बढ़ाने की तैयारी कर रही है। इसके लिए सिंगल-बड तकनीक और टिश्यू कल्चर का इस्तेमाल किया जाएगा। सिंगल-बड तकनीक में गन्ने के एक आंख वाले टुकड़े से नया पौधा तैयार किया जाता है, जबकि टिश्यू कल्चर के जरिए प्रयोगशाला में पौधों को तेजी से तैयार किया जा सकता है। डॉ. पाठक के मुताबिक, अक्टूबर में होने वाले किसान मेले में भी इस किस्म के मिनी बीज किट बांटने की योजना है। इससे अधिक किसानों तक नई किस्म के बीज पहुंचाने में मदद मिल सकती है।
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