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FAO Award: मिजोरम की महिला किसान को इटली में मिलेगा UN सम्मान... सरकारी नौकरी छोड़ी, स्ट्रॉबेरी से बनाई पहचान

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Mohammad Aamil Updated Thu, 24 Sep 2026 02:50 PM IST
सार

  • मिजोरम की 35 वर्षीय किसान Z T Lalrithangi को FAO के 100 महिला किसान नायकों में चुना गया।
  • 2024 में 1,000 पौधों से शुरू की खेती, अब दो हेक्टेयर में 10 हजार से ज्यादा स्ट्रॉबेरी पौधे।
  • 2025 में स्ट्रॉबेरी की खेती से 10 लाख रुपये से ज्यादा की कमाई की।

मिजोरम की महिला किसान को इटली में मिलेगा UN सम्मान
मिजोरम की महिला किसान को इटली में मिलेगा UN सम्मान - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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मिजोरम के दूरदराज गांव की 35 वर्षीय शिक्षिका से किसान बनी जेड टी लालरिथांगी (पी मारी-आई) को खेती और ग्रामीण विकास में योगदान के लिए संयुक्त राष्ट्र का सम्मान मिलेगा। उन्होंने स्ट्रॉबेरी की खेती को कमाई का अच्छा जरिया बनाया है। उन्हें खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) ने ‘FAO 100 Women Heroes in Agrifood Systems and Rural Development’ के लिए चुना है।

यह सम्मान अंतरराष्ट्रीय महिला किसान वर्ष 2026 के तहत दिया जा रहा है। लालरिथांगी मिजोरम के लावंगतलाई जिले के संगाऊ गांव की रहने वाली हैं। उन्होंने बताया कि 131 देशों की 600 से अधिक महिलाओं के नाम इस सम्मान के लिए भेजे गए थे। इनमें से 100 महिलाओं का चयन हुआ है। भारत से चुनी गई महिलाओं में वह दो में से एक हैं।

रोम में मिलेगा सम्मान
लालरिथांगी को 21 सितंबर को FAO की ओर से ई-मेल के जरिए चयन की जानकारी दी गई। उन्हें सम्मान लेने के लिए इटली के रोम स्थित FAO मुख्यालय आने का निमंत्रण भी मिला है। उन्हें 12 से 16 अक्टूबर 2026 तक आयोजित होने वाले वर्ल्ड फूड फोरम के दौरान सम्मानित किया जाएगा। फिलहाल वह रोम जाने के लिए जरूरी यात्रा दस्तावेज तैयार कर रही हैं।

1,000 पौधों से शुरू हुई खेती
लालरिथांगी ने 2024 में स्ट्रॉबेरी की खेती शुरू की। पड़ोसी सियाहा जिले के कुछ किसानों को सफलतापूर्वक स्ट्रॉबेरी उगाते देखकर उन्हें भी इसकी खेती करने का विचार आया। उन्होंने संगाऊ गांव से करीब 5 किलोमीटर दूर स्थित खेत में शुरुआत में लगभग 1,000 पौधे लगाए। पहले साल करीब 1.5 लाख रुपये की कमाई हुई। इससे उनका हौसला बढ़ा और उन्होंने खेती का क्षेत्र बढ़ा दिया। अब वह करीब दो हेक्टेयर जमीन में 10,000 से ज्यादा स्ट्रॉबेरी के पौधे उगा रही हैं। इसके साथ वह एवोकाडो, केला और दूसरी फल-सब्जियों की भी खेती करती हैं।

2025 में स्ट्रॉबेरी से 10 लाख से ज्यादा कमाई
लालरिथांगी के मुताबिक, 2025 में स्ट्रॉबेरी की खेती से उन्हें 10 लाख रुपये से ज्यादा की आमदनी हुई। वह अपनी कुछ स्ट्रॉबेरी को स्थानीय बाजार में बेचने के साथ ही उसका प्रसंस्करण कर स्ट्रॉबेरी वाइन भी तैयार करती हैं। उन्हें इससे पहले मिजोरम हॉर्टी फेयर 2026 में लावंगतलाई जिले का सर्वश्रेष्ठ किसान भी चुना गया था।

सरकारी नौकरी नहीं मिली तो खेती को बनाया रास्ता
लालरिथांगी ने इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (IGNOU) से समाजशास्त्र में स्नातकोत्तर की पढ़ाई की है। पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने निजी स्कूल में शिक्षक के तौर पर काम किया। इसके बाद सरकारी नौकरी पाने के लिए कई प्रतियोगी परीक्षाएं दीं, लेकिन सफलता नहीं मिली। इसके बाद उन्होंने खेती को अपनी आजीविका का जरिया बनाने का फैसला किया।

उनका कहना है कि अच्छी आमदनी के लिए सरकारी नौकरी ही एकमात्र रास्ता नहीं है। मेहनत और सही काम के जरिए भी आत्मनिर्भर बना जा सकता है। तीन बच्चों की मां लालरिथांगी ने कहा कि उनके पति परिवार का खर्च संभाल सकते थे, लेकिन वह खुद भी आत्मनिर्भर बनना चाहती थीं। इसी सोच ने उन्हें खेती की ओर बढ़ने के लिए प्रेरित किया।

मदद नहीं मिली तो इंटरनेट से सीखी तकनीक
लालरिथांगी ने बताया कि शुरुआत में उन्होंने स्ट्रॉबेरी की खेती के लिए सरकारी मदद लेने की कोशिश की थी। उस समय उन्हें बताया गया कि स्ट्रॉबेरी विभाग की परियोजना में शामिल फसल नहीं है। इसके बाद उन्होंने इसे चुनौती के रूप में लिया और अपने स्तर पर खेती शुरू कर दी।

बाद में राज्य के बागवानी विभाग ने अलग-अलग तरीकों से उनकी मदद की। स्ट्रॉबेरी की खेती के लिए उन्होंने कोई औपचारिक प्रशिक्षण नहीं लिया था। उन्होंने इंटरनेट, यूट्यूब के खेती संबंधी वीडियो और दूसरे किसानों से मिली जानकारी के आधार पर खेती की तकनीक सीखी।

बच्चों की देखभाल के साथ सीखी खेती
लालरिथांगी के तीन बच्चे हैं और सबसे छोटा बच्चा चार साल का है। खेती की तकनीक सीखने के लिए उन्हें अक्सर रात में पढ़ाई करनी पड़ती थी। उन्होंने बताया कि बच्चों की देखभाल के कारण दिन में ज्यादा समय नहीं मिल पाता था। इसलिए वह देर रात तक इंटरनेट पर खेती से जुड़ी जानकारी पढ़ती और वीडियो देखती थीं। उनके पति राज्य सरकार के एक प्राथमिक स्कूल में काम करते हैं। ससुराल के लोगों ने भी खेती में उनका साथ दिया। मजदूरों की मदद लेने के साथ लालरिथांगी और उनके पति सप्ताहांत में नियमित रूप से खेत पर समय बिताते हैं।

परिवार के सहयोग को दिया सफलता का श्रेय
लालरिथांगी ने अंतरराष्ट्रीय सम्मान के लिए चुने जाने पर खुशी जताई। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय ईश्वर के मार्गदर्शन, परिवार के सहयोग और राज्य के बागवानी विभाग को दिया। उनका कहना है कि परिवार के सामूहिक सहयोग से ही खेती को आगे बढ़ाया जा सका और अब उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिल रही है।
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