देश से मानसून की विदाई हो चुकी है, लेकिन दक्षिण भारत में बारिश का एक नया दौर शुरू हो गया है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के मुताबिक, तमिलनाडु, केरल, आंध्र प्रदेश समेत कई इलाकों में 21 अक्टूबर तक भारी बारिश हो सकती है। इस बार दक्षिण-पश्चिम मानसून में देश में सामान्य से 12.6 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई है। अब मौसम वैज्ञानिकों की नजर अल नीनो पर है, जिसके दिसंबर 2026 में मजबूत होने का अनुमान है। इसका असर आने वाले महीनों के मौसम पर भी पड़ सकता है।
दक्षिण भारत के इन राज्यों में बारिश का अनुमान
आईएमडी के मुताबिक, तमिलनाडु, पुडुचेरी, कराईकल, तटीय आंध्र प्रदेश, रायलसीमा, दक्षिण आंतरिक कर्नाटक, केरल और माहे में पूर्वोत्तर मानसून की गतिविधियां शुरू हो गई हैं। इन क्षेत्रों में आने वाले दिनों में बारिश हो सकती है। कुछ जगहों पर भारी बारिश की भी आशंका है।
भारत में मानसून के दो प्रमुख चरण
भारत में मानसून मुख्य रूप से दो चरणों में आता है। दक्षिण-पश्चिम मानसून आमतौर पर जून से सितंबर तक सक्रिय रहता है। इसके बाद अक्टूबर से दिसंबर के बीच पूर्वोत्तर मानसून का प्रभाव देखने को मिलता है। इसे लौटता हुआ मानसून भी कहा जाता है।
दक्षिण-पश्चिम मानसून देश की खेती और अर्थव्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। इससे खरीफ फसलों की बुवाई और उत्पादन पर सीधा असर पड़ता है। वहीं, पूर्वोत्तर मानसून दक्षिण भारत के कई इलाकों में बारिश का प्रमुख स्रोत है। यह बारिश रबी फसलों की बढ़वार के लिए भी उपयोगी होती है।
सामान्य से 12.6 फीसदी कम हुई बारिश
आईएमडी के आंकड़ों के अनुसार, इस साल दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान देश में कुल 759.4 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। सामान्य तौर पर इस अवधि में 868.6 मिलीमीटर बारिश होती है। इस तरह देश में मानसूनी बारिश सामान्य से 12.6 फीसदी कम रही। मौसम विभाग के मुताबिक, बारिश में कमी की एक वजह प्रशांत महासागर में विकसित हो रही अल नीनो की स्थिति भी हो सकती है। जून में उभरी यह स्थिति धीरे-धीरे मजबूत हुई है।
क्या है अल नीनो और इसका क्या असर पड़ता है?
अल नीनो प्रशांत महासागर में समुद्र की सतह के तापमान में होने वाला बदलाव है। इसका असर वायुमंडल और दुनिया के कई हिस्सों के मौसम पर पड़ सकता है। भारत में अल नीनो की स्थिति के दौरान मानसूनी बारिश सामान्य से कम रहने की प्रवृत्ति देखी जाती है।
इसके विपरीत, ला नीना के दौरान प्रशांत महासागर के कुछ हिस्सों में समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से कम हो जाता है। इसका वैश्विक मौसम पर अलग तरह का प्रभाव पड़ता है। अल नीनो और ला नीना के बीच की स्थिति को तटस्थ अवस्था कहा जाता है।
दिसंबर में मजबूत हो सकता है अल नीनो
विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) और अन्य वैश्विक मौसम एजेंसियों के पूर्वानुमान के अनुसार, अल नीनो दिसंबर 2026 के आसपास अपने चरम पर पहुंच सकता है। यह 1950 में रिकॉर्ड रखना शुरू होने के बाद की मजबूत अल नीनो घटनाओं में से एक हो सकता है। पूर्वानुमान के मुताबिक, अल नीनो का प्रभाव फरवरी 2027 तक बना रह सकता है। हालांकि, इसकी वास्तविक तीव्रता और मौसम पर असर की स्थिति आगे के पूर्वानुमानों से स्पष्ट होगी।
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