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रिकॉर्ड ताकतवर हो रहा अल नीनो : दुनिया में बढ़ेगी गर्मी, भारत में घट सकती है बारिश... जानें कब तक रहेगा असर
गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली
Published by: Mohammad Aamil
Updated Thu, 08 Oct 2026 12:29 PM IST
सार
अल नीनो तेजी से मजबूत हो रहा है और फरवरी 2027 तक बने रहने की करीब 100% संभावना है। अक्टूबर-दिसंबर 2026 में नीनो 3.4 का तापमान सामान्य से करीब 3.7°C अधिक पहुंच सकता है। WMO ने भारतीय उपमहाद्वीप में सामान्य से कम बारिश की आशंका जताई है।
प्रशांत महासागर में अल नीनो तेजी से मजबूत हो रहा है। विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) के मुताबिक, इसका असर 2027 की शुरुआत तक बना रह सकता है। इससे दुनिया के कई हिस्सों में तापमान बढ़ने के साथ बारिश के पैटर्न में बदलाव हो सकता है। ऐसे में सूखा, बाढ़ और तेज गर्मी जैसी मौसमी घटनाओं का खतरा बढ़ सकता है।
WMO के मुताबिक, अक्टूबर से दिसंबर 2026 के दौरान दुनिया के बड़े हिस्से में सामान्य से अधिक तापमान रहने की संभावना है। इसका मतलब यह नहीं है कि हर जगह हर दिन गर्मी सामान्य से ज्यादा होगी, लेकिन मौसम में गर्मी की चरम घटनाओं की संभावना बढ़ सकती है।
1950 के बाद सबसे मजबूत अल नीनो की आशंका
WMO की ग्लोबल सीजनल क्लाइमेट अपडेट के अनुसार, नीनो 3.4 क्षेत्र में समुद्र की सतह का तापमान जून 2026 में सामान्य से 1.6 डिग्री सेल्सियस अधिक था। अगस्त में यह बढ़कर 2.5 डिग्री सेल्सियस अधिक हो गया। अक्टूबर-दिसंबर के दौरान इसका मौसमी औसत करीब 3.7 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने का अनुमान है। अगर ऐसा हुआ तो यह अब तक का सबसे अधिक स्तर होगा। इससे पहले नवंबर 2015 से जनवरी 2016 के दौरान यह रिकॉर्ड 2.6 डिग्री सेल्सियस था।
WMO की महासचिव सेलेस्टे साउलो ने कहा कि अल नीनो मजबूती से बना हुआ है और तेजी से मजबूत हो रहा है। फरवरी 2027 तक इसके बने रहने की संभावना करीब 100 फीसदी है। यह 1950 के बाद के सबसे मजबूत अल नीनो में से एक हो सकता है।
हिंद महासागर भी डाल रहा असर
मौसम पर सिर्फ प्रशांत महासागर का असर नहीं है। सकारात्मक इंडियन ओशन डाइपोल (IOD) भी मौजूदा मौसम की स्थिति को प्रभावित कर रहा है। इसके अक्टूबर में चरम पर पहुंचने के बाद कमजोर होने का अनुमान है। अक्टूबर-दिसंबर के दौरान इसका औसत स्तर करीब +0.5 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है।
अगस्त रहा अब तक का सबसे गर्म महीना
यूरोपीय संघ की कॉपरनिकस क्लाइमेट सर्विस (C3S), अमेरिकी NOAA और NASA की मासिक रिपोर्टों के अनुसार, अगस्त पृथ्वी पर रिकॉर्ड शुरू होने के बाद सबसे गर्म महीना रहा। अगस्त में वैश्विक समुद्री सतह का तापमान भी रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया।
कई क्षेत्रों में कम बारिश का खतरा
WMO के मुताबिक, अक्टूबर से दिसंबर के दौरान प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी हिस्सों में सामान्य से ज्यादा बारिश की संभावना है। इसके अलावा अफ्रीका के ग्रेटर हॉर्न, मध्य एशिया के कुछ हिस्सों, पूर्वी एशिया के तटीय इलाकों, अरब प्रायद्वीप के उत्तरी हिस्सों, उत्तरी अमेरिका के कुछ क्षेत्रों और दक्षिण-पूर्वी दक्षिण अमेरिका में भी ज्यादा बारिश हो सकती है।
वहीं, भारतीय उपमहाद्वीप में सामान्य से कम बारिश का संकेत मिल रहा है। दक्षिणी मध्य अमेरिका, कैरेबियन के कुछ हिस्सों और उत्तर-पश्चिमी दक्षिण अमेरिका में भी कम बारिश की संभावना है। पश्चिमी प्रशांत और भूमध्यरेखीय अटलांटिक क्षेत्र में भी सूखे जैसे हालात बन सकते हैं।
किसानों के लिए क्यों अहम है अल नीनो?
अल नीनो के कारण तापमान और बारिश के सामान्य पैटर्न में बदलाव हो सकता है। इसका सीधा असर खरीफ फसलों की नमी, सिंचाई की जरूरत, जल उपलब्धता और फसल उत्पादन पर पड़ सकता है। इसलिए जिन क्षेत्रों में कम बारिश का अनुमान है, वहां किसानों को पानी की उपलब्धता, फसल चयन और सिंचाई की योजना पहले से तैयार रखना जरूरी होगा।
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