कर्नाटक सरकार ने सूखे की मार झेलने वाले किसानों को पहली किस्त के रूप में 2500 रुपये जारी करने का एलान किया है। प्रदेश के उपमुख्यमंत्री जी. परमेश्वर ने बताया कि प्रदेश में लगभग 90 प्रतिशत फसलों को नुकसान हुआ है। केंद्र सरकार की तरफ से अभी तक कोई राहत राशि नहीं मिली है, ऐसे में प्रदेश सरकार ने फसल नुकसान झेलने वाले किसानों को शुरुआती राहत के लिए 2500 रुपये देने का फैसला लिया है।
217 तालुकाओं में सूखे की मार और केंद्र से मदद की मांग
उपमुख्यमंत्री राजस्व विभाग की भी कमान संभालते हैं, बेल्लार के हलकुंडी गांव में सूखा प्रभावित इलाकों के दौरे के दौरान उन्होंने बताया कि कुल 240 में से 217 तहसीलों में सूखे का एलान हो चुका है। वहीं, बाकी बची 23 तहसीलों में जांच जारी है और आगामी समय में 10 से 15 नई तहसीलों में सूखे का एलान हो सकता है।
46 हजार करोड़ के नुकसान का अनुमान, केंद्र से 11,500 करोड़ की मांग
प्रदेश सरकार ने कुल 46,000 करोड़ रुपये के नुकसान का अनुमान लगाया है। हालांकि, उपमुख्यमंत्री के अनुसार, राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया कोष (एनडीआरएफ) के नियमों के तहत केंद्र सरकार से केवल तय सीमा के अनुसार ही मांग की जा सकती है, इसलिए 11,000 करोड़ से 11,500 करोड़ रुपये तक की सहायता मांगी गई है। राज्य ने केंद्र को अब तक दो बार मदद के लिए निवेदन भेजा है।
केंद्र सरकार ने मुआवजा तय किया, फंड जारी नहीं हुआ
सरकार के अनुसार, केंद्र सरकार द्वारा प्रति हेक्टेयर 8,500 रुपये का मुआवजा तय किया गया है, लेकिन अभी तक केंद्र से कोई धनराशि प्राप्त नहीं हुई है। परमेश्वर ने साफ किया कि सरकार हाथ पर हाथ धरे नहीं बैठेगी और अपनी तरफ से किसानों की हर संभव मदद करेगी।
इसके अलावा, राज्य सरकार बैंकों से किसानों की कर्ज वसूली टालने और ऋण के पुनर्गठन की मांग कर रही है। राष्ट्रीयकृत बैंकों के साथ-साथ निजी वित्तीय संस्थानों को भी इसके लिए निर्देश दिए जा रहे हैं। सूखे के कारण कई गांवों में पीने के पानी का भारी संकट पैदा हो गया है, जिसके समाधान के लिए सरकार ने पीने के पानी और अन्य आपातकालीन उपायों के लिए अलग से धन जारी किया है।
दूसरे काम बाद में, पहले किसानों की जान जरूरी
सरकार ने साफ किया है कि उपलब्ध बजट के आधार पर खर्च की प्राथमिकताएं तय की जाएंगी। उपमुख्यमंत्री ने कहा कि फिलहाल किसान सरकार की पहली प्राथमिकता हैं। सड़क निर्माण और अन्य कार्य बाद में भी किए जा सकते हैं, लेकिन संकट में फंसे किसानों की जान बचाना सबसे जरूरी है।
उन्होंने बताया कि किसानों की स्थिति उन इलाकों में और भी खराब हो गई है जहां दूसरी फसल उगाने की कोशिश भी नाकाम रही। कई क्षेत्रों में किसानों ने पहले ज्वार बोया था, जो बारिश न होने से सूख गया। बाद में जब थोड़ी बारिश हुई, तो उन्होंने मक्का जैसी दूसरी फसल उगाने की कोशिश की, लेकिन वह भी विफल रही। इस बीच, तीन केंद्रीय टीमें राज्य का दौरा कर चुकी हैं। उपमुख्यमंत्री के अनुसार, इन टीमों ने हर गांव जाने के बजाय सैटेलाइट डेटा और सैंपल सर्वे के जरिए सूखे का आकलन किया है।