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पंजाब में KCC से जुड़े किसानों के लिए बदले नियम : शेयर मनी 3% से बढ़ाकर 6-9% हुई; ब्याज छूट पर भी नई पाबंदी...

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Devesh Saraswat Updated Thu, 08 Oct 2026 12:42 PM IST
सार

  • पंजाब में पैक्स से जुड़े किसानों के लिए KCC के तहत शेयर लिंकेज मनी की राशि बढ़ाई गई है।
  • 5 एकड़ तक जमीन वाले छोटे और सीमांत किसानों को अब क्रेडिट लिमिट का 6% शेयर मनी देना होगा।
  • बड़े किसानों के लिए शेयर मनी 3% से बढ़ाकर 9% कर दी गई है।
  • वाणिज्यिक बैंक से ब्याज छूट का दावा करने वाले किसानों को अब सहकारी कर्ज पर 3% ब्याज छूट नहीं मिलेगी।
  • पैक्स समितियों का संचालन मार्जिन 2% से घटाकर 0.5% किया गया है।

पैक्स से जड़े किसानों और सहकारी बैंकों के माध्यम से केसीसी लोन लेने वाले किसानों के लिए नए नियम लागू।
पैक्स से जड़े किसानों और सहकारी बैंकों के माध्यम से केसीसी लोन लेने वाले किसानों के लिए नए नियम लागू। - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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पंजाब सरकार ने पैक्स से जुड़े किसानों के लिए केसीसी के तहत शेयर लिंकेज मनी की राशि बढ़ा दी है। नए नियम एक अक्तूबर से शरू हुे रबी सीजन के साथ लागू हो गए हैं। नए नियमों के अनुसार, 5 एकड़ तक की जमीन वाले छोटे और सीमांत किसानों को अब अपनी क्रेडिट लिमिट का 6 प्रतिशत हिस्सा शेयर मनी के तौर पर देना होगा। पहले यह सीमा केवल 3 प्रतिशत थी। वहीं, बड़े किसानों के लिए भी यह राशि 3 प्रतिशत से बढ़ाकर सीधे 9 प्रतिशत कर दी गई है।

ब्याज पर मिलने वाली छूट पर नई पाबंदी
नई नीति के तहत कर्ज पर मिलने वाली ब्याज की छूट को भी सीमित कर दिया गया है। अब पैक्स से जुड़े किसान समय पर कर्ज चुकाने पर मिलने वाली 3 प्रतिशत ब्याज छूट का लाभ तब नहीं ले सकेंगे, अगर उन्होंने पहले ही किसी वाणिज्यिक बैंक से इसका दावा कर लिया है। पहले के नियमों में किसानों को 3 लाख रुपये तक के कर्ज पर ब्याज छूट का लाभ मिल जाता था, भले ही उनका कर्ज वाणिज्यिक और सहकारी दोनों बैंकों में बंटा हुआ हो।

सहकारी समितियों के मुनाफे (मार्जिन) में भारी कटौती
इन बदले हुए नियमों का असर राज्य भर की करीब 3,500 पैक्स समितियों की आर्थिक स्थिति पर भी पड़ने की आशंका है। सरकार ने इन समितियों के संचालन मार्जिन को भी पहले के 2 प्रतिशत से घटाकर मात्र 0.5 प्रतिशत कर दिया है।

यह बदलाव ऐसे समय में आया है जब इस साल की शुरुआत में जिला और राज्य स्तर के सहकारी बैंकों ने कर्ज की सीमा बढ़ाने का कड़ा विरोध किया था। बता दें कि पहले रबी और खरीफ दोनों फसलों के लिए कम अवधि के कर्ज की सीमा 25,400 रुपये प्रति एकड़ थी, जिसे बाद में बढ़ाकर धान के लिए 39,000 रुपये और गेहूं के लिए 30,000 रुपये प्रति एकड़ कर दिया गया था।

किसानों ने जताया विरोध
नियमों में हुए इस अचानक बदलाव का किसानों ने विरोध करते हुए तुरंत इसकी समीक्षा करने की मांग की है। किसानों का कहना है कि सहकारी समितियों का मार्जिन 0.5 प्रतिशत करने से कई समितियां बंद होने की कगार पर पहुंच सकती है। वहीं, अधिकारियों का कहना है कि तीनों स्तरों के सहकारी ऋण ढांचे की आर्थिक मजबूती और स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए ही स्केल ऑफ फाइनेंस के तहत अल्पकालिक ऋण नीति में यह संशोधन किया गया है।
 


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