भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) और उससे जुड़े संस्थानों ने स्वच्छता विशेष अभियान 6.0 के तहत देशभर में करीब 4,000 सफाई अभियान चलाए हैं। इन अभियानों के दौरान लगभग 1.3 लाख वर्गफुट जगह खाली कराई गई। वहीं, इलेक्ट्रॉनिक और अन्य कबाड़ को बेचकर करीब 10 लाख रुपये की कमाई हुई।
कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग (DARE) और ICAR का यह अभियान 2 से 31 अक्टूबर 2026 तक चल रहा है। इसमें ICAR के 114 संस्थान, क्षेत्रीय केंद्र, कृषि प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थान (ATARIs) और कृषि विज्ञान केंद्र (KVKs) हिस्सा ले रहे हैं।
गांवों से संस्थानों तक चलाए जा रहे सफाई अभियान
अभियान के तहत संस्थानों के परिसर, गांवों, सड़कों और सार्वजनिक जगहों पर सफाई की जा रही है। इसके साथ ही श्रमदान, स्वच्छता सभाएं और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। लोगों को कचरे का सही तरीके से निपटान करने, साफ-सफाई बनाए रखने और पर्यावरण की सुरक्षा के प्रति जागरूक किया जा रहा है।
सफाई के बाद खाली कराई गई जगहों को बेहतर बनाने के लिए पौधरोपण और हरियाली बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है। कुछ संस्थानों में कचरे से उपयोगी वस्तुएं बनाने और प्लास्टिक का इस्तेमाल कम करने जैसी गतिविधियां भी की जा रही हैं।
कचरे से खाद बनाने पर भी जोर
ICAR के संस्थानों में जैविक कचरे के बेहतर इस्तेमाल के लिए भी कदम उठाए जा रहे हैं। गोवा स्थित ICAR-केंद्रीय तटीय कृषि अनुसंधान संस्थान में पुराने और बेकार सामान की पहचान कर उसे नियमानुसार निपटाने की प्रक्रिया शुरू की गई है।
वहीं, बिहार के मोतिहारी स्थित ICAR-महात्मा गांधी एकीकृत कृषि अनुसंधान संस्थान में केले के बागान और आसपास के हरित क्षेत्रों की सफाई की गई। खरपतवार और अनावश्यक वनस्पति हटाने के साथ कचरे का उचित निपटान किया गया।
पशुओं के गोबर और मूत्र का भी हो रहा इस्तेमाल
अंडमान-निकोबार क्षेत्र के श्री विजय पुरम स्थित ICAR-केंद्रीय द्वीप कृषि अनुसंधान संस्थान में पशुओं के अपशिष्ट का उपयोग करने की पहल की गई। संस्थान के 213 पशुओं- 22 गाय-बैल, 14 भैंस, 105 बकरी और 72 सूअर के बाड़ों की सफाई की गई।
इस दौरान निकलने वाले गंदे पानी को इकट्ठा कर चारे की फसलों की सिंचाई में इस्तेमाल किया गया। पशुओं के मूत्र का भी सिंचाई में उपयोग किया गया, जबकि गोबर को वर्मी कंपोस्ट इकाई में भेजा गया, जहां उससे जैविक खाद बनाई जा सकती है। इससे पानी और पोषक तत्वों का दोबारा इस्तेमाल करने में मदद मिलती है।
सफाई कर्मचारियों को किया गया सम्मानित
गोवा स्थित ICAR-केंद्रीय तटीय कृषि अनुसंधान संस्थान में सफाई कर्मचारियों के योगदान को सम्मानित किया गया। कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने संस्थान के सफाई मित्रों को शॉल, गुलदस्ते और उपहार देकर सम्मानित किया।
नई दिल्ली स्थित भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI) में भी 2 अक्टूबर को स्वच्छ भारत दिवस मनाया गया। ICAR के महानिदेशक और DARE के सचिव डॉ. मांगी लाल जाट ने सफाई अभियान को पूरे साल जारी रखने और टीम के रूप में काम करने पर जोर दिया।
पुराने रिकॉर्ड और कबाड़ के निपटान पर भी काम
अभियान के तहत पुराने दस्तावेजों की समीक्षा, गैर-जरूरी फाइलों को हटाने और बेकार सामान के उचित निपटान पर भी काम किया जा रहा है। संस्थानों में इलेक्ट्रॉनिक कचरे को इकट्ठा कर अधिकृत रिसाइक्लिंग एजेंसियों तक पहुंचाने की पहल की गई है।
ICAR मुख्यालय और उससे जुड़े संस्थान सोशल मीडिया, बैनर और स्थानीय समाचार माध्यमों के जरिए भी अभियान की जानकारी लोगों तक पहुंचा रहे हैं। इसका उद्देश्य संस्थानों के साथ-साथ आम लोगों में भी स्वच्छता, कचरा प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाना है।
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