डेयरी क्षेत्र के विकास में देसी गायों और भैंसों के योगदान को मजबूती देते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने गुजरात के बनासकांठा जिले के भिलडी में भारत बोवाइन ब्रीडिंग एंड रिसर्च सेंटर (बीबीबीआरसी) का उद्घाटन किया है। 31 अक्तूबर तक गुजरात के दो दिवसीय दौर के पहले दिन प्रधानमंत्री ने भिलडी पहुंचकर इस केंद्र का दौरा किया और यहां का कामकाज समझने के लिए अधिकारियों से बातचीत की। जानकारी के अनुसार, पीएम बनास डेयरी की पांच बड़ी विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास भी करेंगे।
किसानों को मिलेंगी ज्यादा दूध देने वाली गाय-भैंस
325 करोड़ रुपये की लागत से बना यह केंद्र किसानों तक उच्च गुणवत्ता वाले भ्रूण पहुंचाने का काम करेगा। खास बात यह है कि इस केंद्र में कांकरेज, गिर, साहीवाल और थारपारकर जैसी देसी गायों के साथ मेहसाणी, बन्नी, जाफराबादी और मुर्रा जैसी भैंसों की नस्लों को भी बेहतर बनाने पर जोर दिया जाएगा।
पशुधन जितना मजबूत होगा, किसान उतने ही ज्यादा समृद्ध होंगे
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अनुसंधान केंद्र की कुछ फोटो साझा करते हुए लिखा है कि भारत के पशुपालन और डेयरी क्षेत्र में अगली बड़ी छलांग कैसी होगी, इसे देखने के लिए गुजरात के बनासकांठा आना चाहिए। प्रधानमंत्री के अनुसार, यह केंद्र इस बात का बेहतरीन उदाहरण है कि विज्ञान और नई तकनीक किसानों के कल्याण को कैसे आगे बढ़ा रही है। किसानों को होने वाले फायदों का जिक्र करते हुए उन्होंने लिखा कि इससे प्रति पशु ज्यादा दूध मिलेगा, नस्लों की गुणवत्ता सुधरेगी और किसानों की आमदनी बढ़ेगी। प्रधानमंत्री ने यह भी बताया कि यह केंद्र कांकरेज जैसी हमारी देसी नस्लों को बचाने में मदद करेगा और इसका फायदा पूरे देश के डेयरी किसानों तक पहुंचेगा। उन्होंने कहा कि पशुधन जितना मजबूत होगा, किसान उतने ही ज्यादा समृद्ध होंगे।
25 हजार बेहतर गुणवत्ता वाले भ्रूण तैयार करने का लक्ष्य
इस केंद्र में हर साल 25 हजार उच्च गुणवत्ता वाले भ्रूण तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए इन-विट्रो फर्टिलाइजेशन (आईवीएफ) और भ्रूण स्थानांतरण जैसी आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया जाएगा। खास बात यह है कि इस तकनीक की मदद से अच्छी नस्ले के पशुओं की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी हो सकेगी।
कम पशुओं से ज्यादा दूध उत्पादन का मिलेगा सीधा फायदा
डेयरी क्षेत्र को मजबूती देने के लिए भ्रूण स्थानांतरण को काफी अहम माना जाता है, क्योंकि इस तकनीक के साथ एक साल में पशु से कई भ्रूण प्राप्त किए जा सकेंगे। इन भ्रूणों को दूसरी उपयुक्त मादा पशुओं में डालकर अच्छी नस्ल के पशुओं की संख्या बढ़ाई जाएगी। सरकार ने बताया कि इस केंद्र से पशुपालकों को किफायती दरों पर उच्च गुणवत्ता वाला सीमेन, भ्रूण और प्रजनन सेवाएं मिलेंगी।
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