बीते खरीफ सीजन में सरकार ने जैविक खाद और संतुलित खाद उपयोग को बढ़ावा दिया। वहीं, कम बारिश की वजह से खाद की बिक्री में गिरावट देखने को मिली। इन कारकों के बावजूद चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही भारत के यूरिया आयात में पिछले साल के मुकाबले 40.5 प्रतिशत की तेजी देखने को मिली है। दूसरी तरफ उद्योग के आंकडों में सभी प्रमुख उर्वरकों की बिक्री में गिरावट देखी गई है।
यूरिया आयात बढ़ा, बिक्री 4.1 प्रतिशत लुढ़की
उद्योग के आंकड़े बताते हैं कि अप्रैल से सितंबर महीने के दौरान भारत ने विदेश से 55.89 लाख यूरिया खरीदा, जो पिछले साल इसी समय में 39.79 लाख टन था। वहीं, यूरिया की बिक्री 4.1 प्रतिशत गिरकर 1.852 करोड़ टन रह गई।
कम बारिश ने घटाई बिक्री, जुलाई में खाद आयात ने रिकॉर्ड तोड़ा
खाद कंपनी के अधिकारी का कहना है कि खाद बिक्री में आई गिरावट का बड़ा कारण कम बारिश है। अमेरिका-ईरान तनाव के कारण खाद की सप्लाई चेन को चोट पहुंची थी, जिसकी वजह से अप्रैल महीने में यूरिया का आयात मात्र पांच लाख 83 हजार टन रहा, लेकिन जुलाई में यह उछलकर 15.34 लाख टन के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा।
यूरिया का घरेलू उत्पादन बढ़ा, लेकिन दूसरी खादों में गिरावट
उद्योग अधिकारियों के हवाले से फर्टिलाइजर एसोसिएशन ऑफ इंडिया के ताजा आंकड़ों के अनुसार, इस अवधि में देश में यूरिया का घरेलू उत्पादन 4 प्रतिशत बढ़ा है।
दूसरी ओर, भू-राजनीतिक तनावों के कारण सल्फर की कीमतें आसमान पर पहुंची, जिसका असर एनपी/एनपीके (खादों की सप्लाई पर पड़ा है। इसके चलते एनपी/एनपीके के उत्पादन और आयात में क्रमशः 35.5 प्रतिशत और 31.4 प्रतिशत की गिरावट आई है। इनकी बिक्री भी 22.2 प्रतिशथ गिरकर 60 लाख टन से थोड़ी अधिक रह गई है।
डीएपी (DAP) और अन्य खादों का हाल तथा कमजोर मानसून
भारत में दूसरी सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाली खाद, डीएपी के आयात में 11.2 प्रतिशत और घरेलू उत्पादन में 0.3 प्रतिशत की कमी आई है। आंकड़ों के अनुसार, डीएपी की बिक्री में सालाना आधार पर 0.6 प्रतिशत की मामूली गिरावट दर्ज की गई है। इसके अलावा, म्यूरेट ऑफ पोटाश (MOP) की बिक्री 11.7 प्रतिशथ और सिंगल सुपर फास्फेट की बिक्री 1.4 प्रतिशत घटी है।