नवंबर महीने से भारत नए तेल विपणन वर्ष (2026-27) में प्रवेश करने वाला है। नए सीजन में भारत के खाद्य तेल आयात में बढ़ोतरी की संभावना है। व्यापार क्षेत्र के तीन अधिकारियों के हवाले से सामने आया है कि तिलहन फसलों की बुवाई में बढ़त के बाद भी कम बारिश के कारण सोयाबीन और मूंगफली जैसी प्रमुख फसलों के उत्पादन पर खराब असर पड़ने का खतरा है। दूसरी तरफ खाने के तेल की घरेलू खपत में लगातर बढ़त हो रही है।
खाद्य तेल आयात में 3% उछाल के आसार, विदेश पर 60-65% निर्भरता
उद्योग के अनुमानों के अनुसार, नए सीजन में खाद्य तेल का आयात लगभग 3 प्रतिशत बढ़कर 1.7 करोड़ टन होने की संभावना है। अधिकारियों के मुताबिक, चालू तेल वर्ष में यह आयात 1.65 करोड़ टन और 2024-25 में 1.601 करोड़ रहने का अनुमान था। भारत में सालाना लगभग 2.6 करोड़ टन खाद्य तेल की खपत होती है। आज भी भारत अपनी खाद्य तेल की 60-65 प्रतिशत जरूरतों के लिए आयात पर ही निर्भर है।
विदेश निर्भरता कम करने के लिए 30 लाख टन ज्यादा तिलहन उगाना होगा
सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के कार्यकारी निदेशक बी.वी. मेहता के अनुसार, बढ़ती घरेलू मांग को पूरा करने के लिए भारत को हर साल 8 से 10 लाख टन अतिरिक्त खाद्य तेल की आवश्यकता होती है। इतनी मात्रा के लिए 25-30 लाख टन अतिरिक्त तिलहन का उत्पादन करना होगा।
तिलहन का रकबा बढ़ा, लेकिन कम बारिश बिगाड़ सकती है गणित
जानकारों के अनुसार, खरीफ सीजन में बुवाई का रकबा (क्षेत्रफल) तो बढ़ा है, लेकिन कम बारिश के कारण पैदावार घटने की आशंका है। इसके अलावा, 'अल नीनो' के संभावित प्रभाव के कारण रबी सीजन की फसलों को लेकर भी अनिश्चितता बनी हुई है। इन्हीं कारणों से खाद्य तेल के आयात में बढ़ोतरी की उम्मीद है।
कृषि मंत्रालय के बुवाई के आंकड़े
कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, 2 अक्तूबर तक देश में तिलहन का कुल रकबा 19.66 मिलियन हेक्टेयर दर्ज किया गया, जो पिछले साल इसी समय 19.63 मिलियन हेक्टेयर था। भारत की सबसे बड़ी तिलहन फसल सोयाबीन का रकबा 14,000 हेक्टेयर घटकर 12.3 मिलियन हेक्टेयर रह गया। वहीं, मूंगफली का रकबा 1,000 हेक्टेयर बढ़कर 5.1 मिलियन हेक्टेयर हो गया। सूरजमुखी के रकबे में 59,000 हेक्टेयर की वृद्धि हुई है, जिससे यह 1,29,000 हेक्टेयर हो गया है। तिल और अरंडी जैसी अन्य फसलों के रकबे में भी उतार-चढ़ाव देखा गया है।
लगातार बढ़ रही है खाद्य तेल की मांग
विशेषज्ञों के अनुसार, बढ़ती आबादी और लोगों की बढ़ती आय के कारण देश में खाद्य तेल की मांग लगातार बढ़ रही है। क्रिसिल रेटिंग्स के वरिष्ठ निदेशक राहुल गुहा के अनुसार, "भारत में खाद्य तेल की खपत वित्त वर्ष 2022 में 22.8 मिलियन टन से बढ़कर वित्त वर्ष 2026 में अनुमानित 25.7 मिलियन टन हो गई है, जो 3% की स्थिर वार्षिक वृद्धि को दर्शाता है।"
क्रिसिल के अनुसार, वित्त वर्ष 2027 में भारत की खाद्य तेल की कुल खपत 3% बढ़कर लगभग 26.5 मिलियन टन होने का अनुमान है। आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026 में प्रति व्यक्ति खाद्य तेल की खपत 17.6 किलोग्राम आंकी गई है।