ग्रामीण युवाओं को रोजगार के लिए तैयार करने और उन्हें स्थायी आजीविका से जोड़ने के लिए केंद्र सरकार ने दीन दयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्या योजना (डीडीयू-जीकेवाई) 2.0 में कई बदलाव किए हैं। अब योजना में सिर्फ प्रशिक्षण और नौकरी दिलाने पर ही नहीं, बल्कि नौकरी टिके रहने, करियर आगे बढ़ाने और प्लेसमेंट के बाद सहायता पर भी जोर दिया गया है।
ग्रामीण विकास मंत्रालय ने 25 सितंबर 2014 को राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत डीडीयू-जीकेवाई शुरू की थी। योजना के तहत गरीब परिवारों के 15 से 35 वर्ष की उम्र के ग्रामीण युवाओं को रोजगार से जुड़े कौशल का प्रशिक्षण दिया जाता है। इस साल योजना अपनी 12वीं वर्षगांठ मना रही है।
प्रशिक्षण में तकनीकी कौशल के साथ डिजिटल शिक्षा
ग्रामीण विकास मंत्रालय के अनुसार, डीडीयू-जीकेवाई 2.0 के तहत कम से कम 576 घंटे का प्रशिक्षण दिया जाता है। तीन महीने के पाठ्यक्रम में 396 घंटे का तकनीकी या काम से जुड़ा प्रशिक्षण और 180 घंटे का अन्य जरूरी प्रशिक्षण शामिल है। गैर-तकनीकी प्रशिक्षण को चार हिस्सों में बांटा गया है।
- अंग्रेजी और संवाद कौशल- 60 घंटे
- रोजगार और जीवन कौशल- 60 घंटे
- कंप्यूटर और डिजिटल साक्षरता- 30 घंटे
- उद्यमिता प्रशिक्षण- 30 घंटे
इससे युवाओं को अपने काम से जुड़े तकनीकी कौशल के साथ बातचीत करने, कार्यस्थल पर काम करने, कंप्यूटर चलाने और अपना काम शुरू करने जैसी क्षमताएं विकसित करने में मदद मिलेगी।
अब छह महीने की नौकरी को माना जाएगा प्लेसमेंट
डीडीयू-जीकेवाई में पहले कम से कम तीन महीने तक लगातार रोजगार को प्लेसमेंट माना जाता था। अब डीडीयू-जीकेवाई 2.0 में न्यूनतम प्लेसमेंट अवधि बढ़ाकर छह महीने कर दी गई है। इसमें वेतन वाली नौकरी के साथ स्वरोजगार और गिग रोजगार को भी शामिल किया गया है। यानी योजना का जोर सिर्फ नौकरी लगवाने पर नहीं, बल्कि युवाओं को लंबे समय तक रोजगार से जोड़ने पर है।
छह महीने तक हर महीने 1,270 रुपये की सहायता
नौकरी मिलने के बाद युवाओं को रोजगार में बने रहने में मदद के लिए भी प्रावधान किया गया है। प्लेसमेंट के बाद छह महीने तक पात्र उम्मीदवारों को 1,270 रुपये प्रति माह, यानी कुल 7,620 रुपये की वित्तीय सहायता दी जाती है। इसके अलावा, जो उम्मीदवार 365 दिन तक रोजगार में बने रहते हैं, उन्हें 5,000 रुपये की प्रतिधारण सहायता दी जाती है। इसमें अधिकतम 60 दिन तक का रोजगार अंतर स्वीकार किया गया है।
प्लेसमेंट के 12 महीने बाद उम्मीदवारों को कौशल बढ़ाने और दोबारा प्रशिक्षण के अवसर भी दिए जा सकते हैं। इसका उद्देश्य युवाओं को आगे बेहतर रोजगार और करियर के अवसरों के लिए तैयार करना है।
रोजगार मेलों के जरिए युवाओं को कंपनियों से जोड़ेंगे
ग्रामीण युवाओं को सीधे नियोक्ताओं से जोड़ने के लिए राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन की ओर से ग्राम पंचायत और ब्लॉक स्तर पर रोजगार मेले लगाए जाते हैं। इन मेलों में युवाओं का पंजीकरण, करियर संबंधी सलाह, नियोक्ताओं की जांच और प्लेसमेंट के बाद एक साल तक रोजगार की निगरानी शामिल है।
ग्राम पंचायत स्तर के रोजगार मेले के लिए 50 हजार रुपये तक और ब्लॉक स्तर के मेले के लिए एक लाख रुपये तक का प्रावधान है। यह राशि क्रमशः 100 और 200 उम्मीदवारों की नियुक्ति से जुड़ी है।
बाहर नौकरी करने वाले युवाओं को मिलेगी मदद
ग्रामीण क्षेत्रों से बड़ी संख्या में युवा रोजगार के लिए दूसरे शहरों और राज्यों में जाते हैं। इसे देखते हुए डीडीयू-जीकेवाई 2.0 में प्रवासन सहायता केंद्र (एमएससी) को मजबूत किया गया है। ये केंद्र युवाओं को उनके गृह राज्य और नौकरी वाले राज्य, दोनों जगह सहायता उपलब्ध कराएंगे। इनमें रहने की व्यवस्था, सलाह, नौकरी से जुड़ी जानकारी और प्लेसमेंट सहायता जैसी सेवाएं शामिल हैं।
केंद्र पूर्व प्रशिक्षित युवाओं को आपस में जोड़ने और नियोक्ताओं के साथ संपर्क बढ़ाने में भी मदद करेंगे। एमएससी के लिए सालाना वित्तीय सहायता को बढ़ाकर 30 लाख रुपये तक किया गया है। पहले यह राशि 10 लाख रुपये तक थी।
महिलाओं और वंचित वर्गों पर विशेष ध्यान
डीडीयू-जीकेवाई सामाजिक रूप से पिछड़े और कमजोर वर्गों की भागीदारी बढ़ाने पर भी जोर देती है। योजना में 50 प्रतिशत कवरेज एससी/एसटी समुदायों के लिए, 33 प्रतिशत कवरेज महिलाओं के लिए और 5 प्रतिशत कवरेज दिव्यांगजनों के लिए का प्रावधान है।
रोशनी और हिमायत से विशेष क्षेत्रों के युवाओं को प्रशिक्षण
डीडीयू-जीकेवाई 2.0 के तहत कुछ क्षेत्रों के लिए विशेष कार्यक्रम भी चलाए जा रहे हैं।
- रोशनी योजना : रोशनी योजना गृह मंत्रालय की ओर से चिन्हित वामपंथी उग्रवाद प्रभावित जिलों के युवाओं के लिए है। इसमें महिलाओं के लिए 40 प्रतिशत कवरेज के साथ आवासीय कौशल प्रशिक्षण का प्रावधान है। इस पहल का विस्तार आकांक्षी जिलों तक भी किया गया है। यहां स्थानीय बुनियादी ढांचे, शिक्षा, स्वास्थ्य, प्राकृतिक संसाधनों और पारंपरिक कौशल से जुड़े क्षेत्रों पर ध्यान दिया जाता है।
- हिमायत योजना : हिमायत जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के युवाओं के लिए विशेष डीडीयू-जीकेवाई योजना है। इसमें ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के युवाओं को शामिल किया जाता है। बीपीएल के साथ एपीएल वर्ग के लोग भी इसके दायरे में आते हैं।
योजना में वेतन वाली नौकरी के साथ स्वरोजगार और गिग रोजगार को भी बढ़ावा दिया जाता है। इसका पूरा खर्च केंद्र सरकार उठाती है।
पूर्वोत्तर राज्यों के लिए 10 प्रतिशत राशि
पूर्वोत्तर राज्यों की भौगोलिक और सामाजिक परिस्थितियों को देखते हुए डीडीयू-जीकेवाई के कुल आवंटन में से 10 प्रतिशत राशि पूर्वोत्तर राज्यों के लिए निर्धारित की गई है। दुर्गम क्षेत्रों में काम करने वाली परियोजना एजेंसियों को उम्मीदवार के सामान्य प्रशिक्षण खर्च के अलावा 10 प्रतिशत विशेष क्षेत्र भत्ता भी दिया जा सकता है।
कृषि से लेकर विमानन तक कई क्षेत्रों में प्रशिक्षण
डीडीयू-जीकेवाई 2.0 में उद्योगों की जरूरत के अनुसार कई क्षेत्रों में प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इनमें विमानन, कृषि, सौंदर्य और स्वास्थ्य, हरित रोजगार, स्वास्थ्य सेवा, कपड़ा उद्योग समेत कई क्षेत्र शामिल हैं। केंद्रीय बजट 2026-27 में डीडीयू-जीकेवाई के लिए 750 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
तकनीक से होगी प्रशिक्षण और नौकरी की निगरानी
योजना के तहत प्रशिक्षण केंद्रों और उम्मीदवारों की निगरानी में तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। इसमें जियो-टैगिंग, समय दर्ज करने वाली बायोमेट्रिक उपस्थिति, कंप्यूटर लैब और ई-लर्निंग जैसी सुविधाएं शामिल हैं। डीडीयू-जीकेवाई 2.0 में एक डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए प्रशिक्षण केंद्र, उम्मीदवार, परियोजनाएं, परीक्षा, प्रमाणपत्र, भुगतान और प्लेसमेंट की निगरानी की जाएगी।
इसमें वास्तविक समय की जानकारी के लिए डैशबोर्ड, उम्मीदवारों के लिए सार्वजनिक पोर्टल, शिकायतों के समाधान की ऑनलाइन व्यवस्था, प्रमाणपत्र की जांच, चेहरे से पहचान के जरिए डिजिटल उपस्थिति, ऑनलाइन परीक्षा और मूल्यांकन और स्किल इंडिया डिजिटल हब से जुड़ाव जैसी सुविधाएं शामिल की गई हैं।
31 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में चल रही योजना
डीडीयू-जीकेवाई फिलहाल 31 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लागू है। योजना के तहत 749 परियोजनाएं, 455 से अधिक परियोजना कार्यान्वयन एजेंसियां और 760 सक्रिय प्रशिक्षण केंद्र हैं। 2014-15 में शुरुआत से अब तक 18.47 लाख से अधिक युवाओं को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। इनमें अर्थव्यवस्था के 36 क्षेत्र और 800 से अधिक रोजगार भूमिकाएं शामिल हैं। अब तक 12.43 लाख से अधिक युवाओं को प्लेसमेंट मिला है। इनमें 9.71 लाख से अधिक महिलाएं प्रशिक्षित हुई हैं और 6.34 लाख से अधिक महिलाओं को प्लेसमेंट मिला है।
गोवा, आंध्र प्रदेश और जम्मू-कश्मीर में 2.0 का क्रियान्वयन
डीडीयू-जीकेवाई 2.0 के तहत राज्यों में भी प्रशिक्षण शुरू किया गया है। गोवा ने 2.0 के बैच शुरू करने में शुरुआती बढ़त दर्ज की है। आंध्र प्रदेश ने तीन महीने की अवधि में 12 हजार से अधिक उम्मीदवारों का प्रशिक्षण शुरू किया है। वहीं जम्मू-कश्मीर ने अपने आवंटित लक्ष्य का 100 प्रतिशत हासिल किया और 91 प्रतिशत आवंटन के लिए प्रशिक्षण शुरू किया।
स्वरोजगार के लिए आरएसईटीआई भी
सरकार ग्रामीण युवाओं को नौकरी के साथ अपना कारोबार शुरू करने के लिए भी प्रशिक्षण दे रही है। इसके लिए ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान (आरएसईटीआई) के माध्यम से 18 से 50 वर्ष की उम्र के ग्रामीण बेरोजगार युवाओं को मुफ्त आवासीय प्रशिक्षण दिया जाता है।
देश के 33 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 634 जिलों में 647 आरएसईटीआई संचालित हैं। 2009 में शुरुआत से अब तक यहां 63.47 लाख उम्मीदवारों को प्रशिक्षण दिया गया है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार करीब 94 प्रतिशत प्रशिक्षित उम्मीदवारों ने स्वरोजगार उद्यम स्थापित किए, जबकि लगभग 6 प्रतिशत ने मजदूरी रोजगार हासिल किया।
क्या बदला डीडीयू-जीकेवाई 2.0 में?
डीडीयू-जीकेवाई 2.0 में ग्रामीण युवाओं के प्रशिक्षण और रोजगार व्यवस्था में कई बदलाव किए गए हैं। पहले कम से कम तीन महीने का प्लेसमेंट जरूरी था, जिसे अब बढ़ाकर छह महीने कर दिया गया है। प्रशिक्षण के बाद सिर्फ नौकरी दिलाने के बजाय रोजगार टिकाने पर जोर दिया गया है। प्लेसमेंट के बाद 12 महीने तक ट्रैकिंग और सहायता मिलेगी। प्रवासन सहायता केंद्रों को मजबूत किया गया है और इनके लिए वित्तीय सहायता 10 लाख से बढ़ाकर 30 लाख रुपये तक की गई है। प्रशिक्षण में तकनीकी कौशल के साथ डिजिटल साक्षरता, जीवन कौशल और उद्यमिता भी शामिल की गई है।
किसान और ग्रामीण परिवारों के लिए उपयोगी बात
ग्रामीण परिवारों के 15 से 35 वर्ष के युवाओं के लिए डीडीयू-जीकेवाई रोजगार से जुड़े कौशल प्रशिक्षण का एक विकल्प है। इसमें कृषि समेत कई क्षेत्रों में प्रशिक्षण दिया जा रहा है। नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं के लिए योजना में प्रशिक्षण, प्लेसमेंट, नौकरी में बने रहने और आगे कौशल बढ़ाने पर एक साथ ध्यान दिया गया है।