जंगली जानवरों के हमले से फसलों को होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए केरल सरकार ने मुआवजे के नियमों में बदलाव किया है। वन विभाग के नए आदेश के तहत अब मुआवजे की अधिकतम सीमा और मुआवजे के लिए दावा करने की संख्या पर लगी पाबंदियां भी हटा दी गई हैं। इससे प्रभावित किसानों को राहत मिलने की उम्मीद है।
आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, यह फैसला वर्ष 2015 और 2018 में तय किए गए मुआवजे के नियमों की समीक्षा के बाद लिया गया है। पिछले दस वर्षों के आंकड़ों की समीक्षा में पाया गया कि किसानों को पहले दी जाने वाली मुआवजा राशि काफी कम थी। इसके बाद मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक ने मुआवजा बढ़ाने की सिफारिश की।
नारियल और कोको की फसल को नुकसान पर भी मिलेगा मुआवजा
सरकार ने खेत में खड़ी फसल के साथ-साथ जमा करके रखी गई कृषि उपज को हुए नुकसान को भी मुआवजे के दायरे में शामिल किया है। नए नियमों के मुताबिक, जंगली जानवरों के हमले में नुकसान होने पर किसानों को प्रति नारियल 15 रुपये और कोको के लिए 30 रुपये प्रति किलो मुआवजा दिया जाएगा। हालांकि, मुआवजा पाने के लिए नुकसान का मौके पर निरीक्षण और सत्यापन किया जाएगा।
नुकसान की सूचना देने के लिए 72 घंटे से दो सप्ताह का समय
वन विभाग के आदेश के मुताबिक, जंगली जानवरों से फसल या कृषि उपज को नुकसान होने पर किसान को इसकी सूचना विभाग को देनी होगी। घटना की सूचना कम से कम 72 घंटे बाद और अधिकतम दो सप्ताह के भीतर दी जा सकती है।
छह महीने के भीतर करना होगा आवेदन
मुआवजा पाने के लिए किसानों को तय प्रक्रिया के अनुसार औपचारिक आवेदन भी जमा करना होगा। नुकसान होने की तारीख से छह महीने के भीतर आवेदन करना जरूरी है। समय पर सूचना देने और निर्धारित प्रक्रिया पूरी करने के बाद ही मुआवजे के दावे पर कार्रवाई की जाएगी।
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