महाराष्ट्र के सीएम देवेंद्र फडणवीस ने बुधवार को मराठवाड़ा के लातूर, सोलापुर और धाराशिव की सूखा प्रभावित तहसीलों का दौरा किया। उन्होंने वहां बारिश की कमी के कारण फसल बर्बादी, पानी और चारे के संकट का सामना कर रहे किसानों से मुलाकात की और उन्हें सरकारी मदद का भरोसा दिया।
मुख्यमंत्री फडणवीस ने इस हालात को सुपर अल नीनो का प्रभाव बताते हुए बेहद गंभीर बताया। सरकार ने नुकसान का वैज्ञानिक तरीके से आकलन करने के लिए जल्द ही पंचनामा शुरू करने की बात कही है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि राहत से जुड़ा सरकार का पहला आदेश शनिवार तक जारी कर दिया जाए।
बारिश में भारी कमी, फसलों को 80 से 90% तक नुकसान
सरकारी रिपोर्ट के अनुसार, 1 जून से 21 सितंबर के बीच महाराष्ट्र में औसत की मात्र 80.82 प्रतिशत बारिश दर्ज की गई है। सोलापुर जिला सबसे ज्यादा प्रभावित है, जहां बारिश में 56 प्रतिशत की कमी आई है और 21 से 43 दिनों तक बिल्कुल सूखा रहा। इसके अलावा, लातूर और धाराशिव में 50 प्रतिशत, जबकि मराठवाड़ा के बीड और परभणी में 35 से 40 प्रतिशत कम बारिश हुई है।
इस सूखे का सबसे बुरा असर फसलों पर पड़ा है। सरकारी अनुमान के मुताबिक, फसलों को 60 प्रतिशत से ज्यादा का नुकसान हुआ है। मूंग और उड़द के उत्पादन में 80 से 90 प्रतिशत, जबकि बाजरा, मक्का और अरहर (तुअर) में 60 से 70 प्रतिशत तक की भारी गिरावट आने की आशंका है। बारिश न होने के कारण सोयाबीन की फसल भी अंकुरित होने के बाद सूख गई है।
'किसानों के आंसू पोंछना सरकार का पहला काम'
सूखे खेतों और सूखे कुओं का जायजा लेने के बाद मुख्यमंत्री ने कहा, किसानों में निराशा और पीड़ा है, लेकिन मैंने उन्हें बताया है कि सरकार उनके साथ मजबूती से खड़ी है। सरकार के अनुसार, सूखा राहत के लिए धन की कोई कमी नहीं होने दी जाएगी और बिना किसी भेदभाव के सभी किसानों की मदद की जाएगी।
मुख्यमंत्री ने साफ किया, "किसानों के आंसू पोंछना सरकार का पहला कर्तव्य है। हम राष्ट्रीय आपदा नियमों के तहत केंद्र सरकार से फंड जरूर मांगेंगे, लेकिन किसानों को केंद्र के फंड का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। राज्य सरकार तुरंत अपने खजाने से मदद देना शुरू करेगी। इसके साथ ही उन्होंने बताया कि कर्ज माफी की योजना भी चालू है और इसे बंद नहीं किया जाएगा।
पीने के पानी और चारे पर विशेष ध्यान
बारिश कम होने से कुओं और जलाशयों का जलस्तर काफी गिर गया है। मुख्यमंत्री ने बताया कि सरकार की पहली प्राथमिकता पीने का पानी उपलब्ध कराना है। सरकार के अनुसार, दिसंबर तक के लिए पीने के पर्याप्त पानी का इंतजाम कर लिया गया है और इसे जून तक बचाने की कोशिश की जा रही है। मुख्यमंत्री ने माना कि पीने के पानी का संकट है, लेकिन उन्होंने आश्वस्त किया कि इसके साथ-साथ मवेशियों के लिए चारे की भी पूरी व्यवस्था की जा रही है।