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कावेरी जल विवाद : पानी की कमी से तमिलनाडु की फसल खराब, कर्नाटक ने भी बताया सूखे जैसे हालात

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Mohammad Aamil Updated Thu, 24 Sep 2026 05:34 PM IST
सार

कावेरी जल विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में दोनों राज्यों ने पानी की कमी और फसल नुकसान का मुद्दा उठाया। तमिलनाडु ने 20 TMC पानी की कमी बताते हुए अपना हिस्सा दिलाने की मांग की, जबकि कर्नाटक ने सूखे जैसे हालात का हवाला दिया।

कावेरी जल विवाद
कावेरी जल विवाद - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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तमिलनाडु और कर्नाटक के बीच कावेरी नदी के पानी के बंटवारे को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। तमिलनाडु ने कहा कि पानी की कमी के कारण उसकी ‘पुरवई’ फसल खराब हो गई है, जबकि कर्नाटक ने राज्य में सूखे जैसे हालात होने की बात कही। दोनों राज्यों ने अपने-अपने हिस्से के पानी और उपलब्ध जल संसाधनों को लेकर कोर्ट के सामने दलीलें रखीं।

जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने दोनों राज्यों की दलीलें सुनने के बाद कर्नाटक से तमिलनाडु की पानी छोड़ने की मांग वाली याचिका पर जवाब मांगा। मामले की अगली सुनवाई 12 अक्टूबर को होगी।

तमिलनाडु ने 20 टीएमसी पानी की कमी बताई
तमिलनाडु की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सीएस वैद्यनाथन ने कहा कि राज्य को उसके हिस्से का पूरा पानी नहीं मिल रहा है। उन्होंने कहा कि पानी की कमी के कारण तमिलनाडु की पुरवई फसल को नुकसान हुआ है। वैद्यनाथन ने कहा कि तमिलनाडु के हिसाब से उसके हिस्से में करीब 20 टीएमसी (हजार मिलियन क्यूबिक फीट) पानी की कमी है। 

वहीं, कर्नाटक के हिसाब से यह कमी करीब 16 टीएमसी है। उन्होंने कहा कि कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (CWMA) और कावेरी जल विनियमन समिति (CWRC) ने पानी की कमी को पूरा करने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाए हैं। उनके मुताबिक, अगर अभी पानी की कमी पूरी नहीं की गई तो आगे इसका फायदा नहीं मिलेगा, क्योंकि मानसून लौट चुका है।

कर्नाटक बोला- राज्य में सूखे जैसे हालात
कर्नाटक की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम दीवान ने कहा कि राज्य खुद पानी की कमी और सूखे जैसी स्थिति का सामना कर रहा है। उन्होंने कहा कि कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण एक विशेषज्ञ संस्था है और वह बारिश व पानी की उपलब्धता समेत सभी परिस्थितियों पर नजर रख रही है। दीवान ने कहा कि कर्नाटक ने मुश्किल हालात के बावजूद CWMA के निर्देशों का पालन करते हुए तमिलनाडु के लिए पानी छोड़ा है। उनके अनुसार, राज्य ने निर्धारित मात्रा से अधिक पानी भी छोड़ा है।

मानसून लौटने के बाद बारिश की उम्मीद कम
कर्नाटक ने कोर्ट में कहा कि दक्षिण-पश्चिम मानसून अब लौट रहा है, इसलिए राज्य में आगे ज्यादा बारिश की उम्मीद नहीं है। दूसरी ओर, तमिलनाडु को उत्तर-पूर्वी मानसून से बारिश मिलने की संभावना है।दीवान ने कहा कि कर्नाटक को उत्तर-पूर्वी मानसून से तमिलनाडु की तरह बारिश का फायदा नहीं मिलेगा। उन्होंने कहा कि CWMA ने दोनों राज्यों की स्थिति को ध्यान में रखकर ही पानी छोड़ने से जुड़े निर्देश जारी किए हैं।

कोर्ट ने कहा- पानी की कमी पर CWMA फैसला ले
सुनवाई के दौरान पीठ ने तमिलनाडु की ओर से बताई गई पानी की कमी के बारे में पूछा। वैद्यनाथन ने कहा कि तमिलनाडु के अनुसार करीब 20 टीएमसी पानी की कमी है। कर्नाटक की ओर से बताया गया कि उसने करीब 6,000 क्यूसेक पानी छोड़ा है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि तमिलनाडु ने पानी की कमी को लेकर शिकायत की है और CWMA को इस पर फैसला लेना होगा।

कर्नाटक ने कहा कि पानी छोड़ने से जुड़े सभी पहलुओं पर विचार किया जा चुका है और राज्य ने निर्देशों का पालन किया है। दोनों राज्यों की दलीलें सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक से तमिलनाडु की याचिका पर जवाब मांगा। अब इस मामले में अगली सुनवाई 12 अक्टूबर को होगी।
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