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दालों की कमी दूर करेगा ब्राजील : भारत का बनेगा नया साथी, 22 हजार टन तक पहुंचा उड़द का आयात

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Mohammad Aamil Updated Sat, 07 Nov 2026 12:00 PM IST
सार

भारत में उड़द और अरहर की बढ़ती मांग के बीच ब्राजील बड़ा सप्लायर बन सकता है। ब्राजील से उड़द का आयात 22 हजार टन के पार पहुंचा। जानिए भारत को इससे क्या फायदा होगा।

दाल
दाल - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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भारत में दालों की बढ़ती मांग और घरेलू जरूरतों को पूरा करने के लिए ब्राजील एक बड़ा आपूर्तिकर्ता बन सकता है। खासकर उड़द और अरहर (तूर) दाल के आयात में ब्राजील की भूमिका बढ़ने की उम्मीद है। केंद्र सरकार के मुताबिक, पिछले कुछ वर्षों में ब्राजील से उड़द का आयात तेजी से बढ़ा है। दोनों देशों के बीच दालों के कारोबार को और बढ़ाने की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई है।

केंद्रीय उपभोक्ता मामले विभाग की सचिव निधि खरे से ब्राजील के कृषि मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी जूलियो सीजर रामोस के नेतृत्व में आए प्रतिनिधिमंडल ने मुलाकात की। इस दौरान भारत की दालों की जरूरत और ब्राजील से उड़द-अरहर के आयात पर बातचीत हुई। उपभोक्ता मामले मंत्रालय के मुताबिक, ब्राजील हाल के वर्षों में भारत को उड़द की सप्लाई करने वाले देशों में उभरा है। आने वाले समय में वह भारत के लिए उड़द और अरहर आयात का बड़ा स्रोत बन सकता है।

दो साल में पांच गुना से ज्यादा बढ़ा उड़द का आयात
मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, ब्राजील से भारत में उड़द का आयात तेजी से बढ़ा है। साल 2023 में भारत ने ब्राजील से 4,102 टन उड़द मंगाई थी। वहीं, अक्टूबर 2024 के अंत तक यह मात्रा बढ़कर 22 हजार टन से ज्यादा हो गई। इससे पता चलता है कि भारतीय बाजार में ब्राजील की दालों की पहुंच बढ़ रही है। सरकार अब इस कारोबार को और मजबूत करने की संभावनाएं तलाश रही है।

भारत के लिए क्यों फायदेमंद हैं ब्राजील और ऑस्ट्रेलिया?
सरकार के मुताबिक, ब्राजील और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों से दालों का कारोबार भारत के लिए फायदेमंद है। इसकी एक बड़ी वजह दोनों देशों के खेती के मौसम में अंतर होना है। भारत में जब किसी दाल की फसल कम होती है या उत्पादन में गिरावट आती है, तब दूसरे देशों में उसकी बुवाई या कटाई का समय अलग होने के कारण वहां से आयात किया जा सकता है। इससे घरेलू बाजार में दालों की उपलब्धता बनाए रखने में मदद मिलती है।

चने की कमी हुई तो ऑस्ट्रेलिया ने बढ़ाई खेती
इसका उदाहरण चने की फसल में देखने को मिला। भारत में रबी 2024 के दौरान चने का उत्पादन कम रहने की आशंका थी। इसे देखते हुए मई 2024 में सरकार ने चने के शुल्क मुक्त आयात की अनुमति दी थी। उस समय ऑस्ट्रेलिया में चने की बुवाई का सीजन चल रहा था। भारतीय बाजार की मांग को देखते हुए वहां किसानों ने चने की खेती का रकबा बढ़ा दिया। मंत्रालय के अनुसार, ऑस्ट्रेलिया में चने का उत्पादन 2023 के 4.9 लाख टन से बढ़कर चालू वर्ष में 13.3 लाख टन होने का अनुमान था। इसका बड़ा हिस्सा भारत को निर्यात करने के लिए तैयार किया गया था।

ऑस्ट्रेलिया से चना आने पर कीमतों को मिली राहत
सरकार के मुताबिक, अक्टूबर के आखिरी सप्ताह से ऑस्ट्रेलिया के नए चने की खेप भारत पहुंचने लगी। इससे घरेलू बाजार में चने की उपलब्धता बढ़ी और थोक मंडियों में कीमतों पर दबाव कम करने में मदद मिली। गौरतलब है कि भारत अपनी घरेलू जरूरतों को पूरा करने के लिए हर साल करीब 30 से 40 लाख टन अलग-अलग किस्मों की दालों का आयात करता है। ऐसे में ब्राजील और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों के साथ व्यापार बढ़ने से दालों की उपलब्धता बनाए रखने में मदद मिल सकती है।
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