केंद्र सरकार किसानों के बीच सोलर पंप की बढ़ती मांग को देखते हुए पीएम कुसुम योजना के दूसरे चरण को धरातल पर उतारने की तैयारी कर रही है। एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, इस महत्वाकांक्षी योजना को आगामी वित्त वर्ष में लागू किया जा सकता है। योजना का पहला चरण चालू वित्त वर्ष तक चलेगा, जिसका अनुमानित खर्च करीब 35 हज़ार करोड़ रुपये है। माना जा रहा है कि दूसरे चरण का बजट भी पहले चरण के बराबर या उससे भी अधिक हो सकता है।
दूसरे चरण की योजना बनाने का एक बड़ा कारण पीएम कुसुम के तहत बीते एक साल में सोलर पंपों की मांग में आया भारी उछाल है। कुल मांग बढ़कर 49 लाख पंपों तक पहुंच गई है, जो 20 लाख स्टैंडअलोन सोलर पंप और 15 लाख मौजूदा ग्रिड-कनेक्टेड पंपों को सोलराइज करने के शुरुआती लक्ष्य से कहीं अधिक है।
दूसरे चरण में क्या होगा नया और खास?
नए चरण में पहले चरण को लागू करने के दौरान मिली सीख को शामिल किए जाने की संभावना है। सबसे खास बात यह है कि इसमें कुछ नए घटक भी जोड़े जा सकते हैं।
एग्रीवोल्टाइक्स पर होगा फोकस: दूसरे चरण में केंद्र एग्रीवोल्टाइक्स का एक घटक भी शामिल कर सकती है। यह खेती का एक आधुनिक मॉडल है, जिसके तहत किसान एक ही खेत में फसल उगाने के साथ-साथ सौर ऊर्जा का उत्पादन भी कर सकते हैं। सिकुड़ती कृषि भूमि और ऊर्जा की बढ़ती मांग के दौर में यह पहल किसानों की आय और ऊर्जा जरूरतों, दोनों मोर्चों पर एक बड़ा कदम साबित हो सकती है।
आसान होगी फंडिंग: योजना के कंपोनेंट B और C को अगस्त 2024 में कृषि अवसंरचना कोष के साथ मिला दिया गया है। इससे किसानों को अन्य सौर-ऊर्जा से चलने वाली सिंचाई प्रणालियों और कृषि बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए भी फंडिंग आसानी से मिल सकेगी।
एक अधिकारी ने कहा कि पीएम कुसुम की मांग के लिए आवंटन किया जा चुका है, जिसमें हमने पिछले एक साल में उछाल देखा है। अब हमारे पास जो मांग है, वह शायद आवंटित लक्ष्य का 2-3 गुना है, जिसे हम कार्यक्रम के दूसरे चरण में ही पूरा कर पाएंगे।एक दूसरे अधिकारी के अनुसार, योजना का दूसरा चरण 2026-27 में लागू किया जाएगा। एक अधिकारी ने बताया कि हमें व्यय वित्त समिति को एक नोट जमा करना है। देखते हैं कि हम समिति से कितना कुछ प्राप्त कर पाते हैं।
क्या है पीएम-कुसुम योजना?
मार्च 2019 में 34,422 करोड़ के कुल परिव्यय के साथ शुरू की गई पीएम-कुसुम योजना का मुख्य उद्देश्य किसानों के लिए ऊर्जा और जल सुरक्षा बढ़ाना, डीजल पर उनकी निर्भरता कम करना और उनकी आय में वृद्धि करना है। वहीं, AIF योजना का फोकस फसल कटाई के बाद के प्रबंधन के बुनियादी ढांचे और सामुदायिक कृषि संपत्तियों के निर्माण के लिए ऋण प्रदान करना है।