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Bengal Potatoes Snatched Market Of Farrukhabad Increased Demand For Agra In South India
Potato Market: बंगाल के आलू ने छीना फर्रुखाबाद का बाजार, दक्षिण भारत में आगरा की बढ़ी मांग
गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली
Published by: Mohammad Aamil
Updated Wed, 23 Sep 2026 12:39 PM IST
सार
फर्रुखाबाद के आलू के प्रमुख बाजार ओडिशा और झारखंड में बंगाल के आलू की पहुंच बढ़ने से मांग घट गई है। जिले के शीतगृहों में 9.72 लाख टन में से अभी 6.79 लाख टन आलू बचा है, जबकि आठ-दस दिन में नई फसल की बोआई शुरू होने वाली है।
फर्रुखाबाद के आलू के प्रमुख बाजार रहे ओडिशा और झारखंड में अब बंगाल के आलू की पकड़ मजबूत हो गई है। इससे फर्रुखाबाद से इन राज्यों के लिए आलू की लोडिंग लगभग बंद है। वहीं, दक्षिण भारत के कर्नाटक, तमिलनाडु, महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश में आगरा बेल्ट के आलू की मांग बनी हुई है। ऐसे में फर्रुखाबाद के आलू के लिए बाहर की मंडियों में बाजार सीमित रह गया है।
मांग घटने के साथ आलू के भाव में भी लगातार गिरावट आई है। जिले के शीतगृहों में अभी करीब 70 फीसदी आलू भरा हुआ है। दूसरी ओर, इसी महीने नई फसल के आलू की बोआई शुरू होने वाली है। ऐसे में किसान, व्यापारी और शीतगृह संचालक पुराने आलू की निकासी और बिक्री को लेकर चिंतित हैं।
ओडिशा और झारखंड में बंगाल के आलू की बढ़ी पहुंच
फर्रुखाबाद से बड़े पैमाने पर आलू असम के अलावा ओडिशा, झारखंड और बिहार भेजा जाता था। लेकिन इस साल बंगाल में आलू की अच्छी पैदावार होने के बाद बाजार का समीकरण बदल गया है। बंगाल से बड़ी मात्रा में आलू ओडिशा पहुंच रहा है। इसी तरह झारखंड में भी बंगाल का आलू आसानी से पहुंच रहा है। कम परिवहन खर्च के कारण वहां बंगाल के आलू की कीमत फर्रुखाबाद के आलू के मुकाबले कम पड़ रही है।
बंगाल से ओडिशा का भाड़ा 130, फर्रुखाबाद से 400 रुपये
कमालगंज के आलू व्यापारी मोहम्मद अफसीर के मुताबिक, पिछले वर्षों में फर्रुखाबाद का सफेद आलू ख्याति और पुखराज ओडिशा के भुवनेश्वर, कटक, ब्रह्मपुर समेत कई जिलों में जाता था। इस बार वहां बंगाल का आलू सस्ता पड़ने के कारण फर्रुखाबाद के आलू की मांग घट गई है।
महमदपुर अचला निवासी इशरार के अनुसार, बंगाल से ओडिशा तक आलू भेजने में करीब 120 से 130 रुपये प्रति क्विंटल भाड़ा लगता है। वहीं, फर्रुखाबाद से ओडिशा तक माल भेजने में करीब 400 रुपये प्रति क्विंटल खर्च आता है। ओडिशा में बंगाल का आलू करीब 700 रुपये प्रति क्विंटल बिक रहा है। ऐसे में अधिक भाड़े के कारण फर्रुखाबाद के आलू का हिसाब नहीं बैठ रहा है। यही स्थिति झारखंड में भी बनी हुई है।
बिहार में भी सीमित हुआ बाजार
फर्रुखाबाद का आलू अभी बिहार के भोजपुर, गया और पटना तक भेजा जा रहा है। हालांकि पटना से आगे के बाजारों में भी बंगाल का आलू पहुंच रहा है। इससे फर्रुखाबाद के आलू के लिए बाजार सीमित हो गया है।
वहीं, दक्षिण भारत के कर्नाटक, तमिलनाडु, महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश में अच्छी गुणवत्ता के कारण आगरा बेल्ट के आलू की मांग बनी हुई है। फर्रुखाबाद से फिलहाल उत्तर प्रदेश के अलावा असम के सिलचर और गुवाहाटी जैसे बाजारों के लिए भी आलू की लोडिंग हो रही है।
अच्छे आलू की अलग लाट बनाकर रखें किसान
उन्नतिशील किसान शरद कुमार का कहना है कि फर्रुखाबाद के किसानों को आगरा बेल्ट की तरह अच्छी गुणवत्ता वाला आलू पैदा करने पर ध्यान देना चाहिए। इसके साथ ही आलू की छंटाई कर अच्छे और बाहर भेजने योग्य आलू की अलग लाट बनाकर शीतगृह में रखनी चाहिए। इससे बाजार मिलने पर बेहतर कीमत हासिल करने में मदद मिल सकती है।
चिप्सोना के भाव में 100 रुपये तक गिरावट
आलू के बाजार में मंदी का असर चिप्सोना किस्म पर भी पड़ा है। अभी तक चिप्सोना का 50 किलो का पैकेट करीब 500 रुपये में बिक रहा था। पिछले चार-पांच दिनों में भाव घटकर 350 से 410 रुपये प्रति पैकेट रह गया है।
सोमवार को नेपाल भेजने के लिए अच्छी गुणवत्ता वाला चिप्सोना 411 रुपये प्रति पैकेट बिका। वहीं, सफेद आलू का भाव गिरकर 120 से 170 रुपये प्रति पैकेट रह गया है। किसानों और व्यापारियों के मुताबिक, सफेद आलू के मौजूदा भाव से कई मामलों में शीतगृह का भाड़ा निकालना भी मुश्किल हो रहा है।
9.72 लाख टन में से 6.79 लाख टन आलू अभी शीतगृहों में
जिले के 121 शीतगृहों में कुल 9.72 लाख मीट्रिक टन आलू भंडारित किया गया था। करीब साढ़े छह महीने में अब तक सिर्फ 2.93 लाख मीट्रिक टन आलू की निकासी हुई है। अभी भी 6.79 लाख मीट्रिक टन आलू शीतगृहों में रखा है। आठ-दस दिन में नई अगेती आलू की बोआई शुरू होने का समय आ जाएगा। ऐसे में पुराने स्टॉक की निकासी किसानों के लिए बड़ी चिंता बनी हुई है।
जिला उद्यान अधिकारी राघवेंद्र सिंह ने बताया कि ओडिशा में बंगाल का आलू सस्ता पड़ रहा है। पिछले दो दिनों में आलू की निकासी बढ़कर 32 से 35 फीसदी तक पहुंची है। आलू की बोआई शुरू होने के साथ पुरानी फसल की निकासी बढ़ने की उम्मीद है। उन्होंने किसानों से भाड़ा अनुदान का लाभ लेने के लिए किसान पोर्टल पर पंजीकरण कराने की अपील की है।
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