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झींगा पालन में डिजिटल क्रांति : फार्म में लगे यंत्र, मोबाइल पर नजर, 85% तक फसल बचाने में कामयाबी

गांव जंक्शन डेस्क, विजयवाड़ा Published by: Umashankar Mishra Updated Tue, 10 Mar 2026 02:14 PM IST
सार

आंध्र प्रदेश के किसी झींगा किसान की सबसे बड़ी चिंता यही होती है कि पता नहीं इस बार फसल बचेगी या नहीं। तालाब में बीमारी कब आ जाए, कोई नहीं जानता। लेकिन, अब यह चिंता धीरे-धीरे दूर हो रही है। विजयवाड़ा की एग्रीटेक कंपनी एक्वा एक्सचेंज ने ऐसी तकनीक तैयार की है, जो किसान को पहले ही बता देती है कि उसके फार्म में कुछ गड़बड़ होने वाली है। जानिए, विस्तार से...

किरण कुमार, करीमुल्ला मोहम्मद, पवन कोसाराजू तथा हेमासुंदर डी. (बाएं से दाएं)
किरण कुमार, करीमुल्ला मोहम्मद, पवन कोसाराजू तथा हेमासुंदर डी. (बाएं से दाएं) - फोटो : गांव जंक्शन
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विस्तार
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आंध्र प्रदेश की एग्रीटेक कंपनी एक्वा एक्सचेंज नाम की इस कंपनी ने देश के 25 फीसदी से ज्यादा झींगा तालाबों को अपनी तकनीक से जोड़ लिया है। यानी देश के चार झींगा किसानों में से कम से कम एक किसान इस कंपनी की मदद ले रहा है। कंपनी के संस्थापक पवन कोसाराजू, हेमासुंदर धाविली, करीम मोहम्मद और किरण बांदी ने मिलकर एक ऐसा तंत्र तैयार किया है, जिसमें तालाब में लगे यंत्र लगातार पानी की जांच करते रहते हैं और किसान के मोबाइल पर सारी जानकारी पहुंचती रहती है।

85% तक फसल बचाने में मिली बड़ी कामयाबी
पहले झींगा पालन में औसतन 40 से 45 फीसदी फसल बर्बाद हो जाती थी। लेकिन इस तकनीक का इस्तेमाल करने वाले किसानों की फसल की सफलता दर 85 फीसदी तक पहुंच गई है। यानी अब केवल 15 फीसदी फसल ही खराब होती है। यह बदलाव इसलिए संभव हुआ क्योंकि कंपनी की तकनीक बीमारी आने से पहले ही किसान को सचेत कर देती है और विशेषज्ञ तुरंत जमीन पर जाकर सलाह देते हैं।

पवन कोसाराजू ने कहा कि उनकी कंपनी किसान को सबसे पहले रखकर काम करती है। उन्होंने कहा कि नई पूंजी से वे और ज्यादा छोटे तथा मंझोले किसानों तक अपनी तकनीक पहुंचाएंगे ताकि देश और विदेश दोनों जगह झींगा पालन और बेहतर हो सके।
झींगा
झींगा - फोटो : सोशल मीडिया
67 करोड़ की नई पूंजी मिली
हाल ही में कंपनी को करीब 67 करोड़ रुपये की नई पूंजी मिली है। यह पैसा एन्डिया पार्टनर्स और फैक्टर एनालिटिक्स ने मिलकर लगाया है। पहले से जुड़े निवेशक एक्सियन वेंचर्स और ओशन 14 कैपिटल ने भी अपना भरोसा बनाए रखा है। इस पैसे से कंपनी अपना काम और बढ़ाएगी तथा नए देशों में भी पहुंचेगी।

5 राज्यों में काम, 3 देशों तक पहुंच
फिलहाल यह कंपनी देश के पांच राज्यों में काम कर रही है और अपने तकनीकी प्लेटफॉर्म के जरिये 80,000 एकड़ से ज्यादा झींगा तालाबों की निगरानी कर रही है। विदेश में भी कंपनी इक्वाडोर, सऊदी अरब और मेडागास्कर में अपनी सेवाएं दे रही है। दुनिया के तीन सबसे बड़े झींगा उत्पादकों ने इस कंपनी को अपना तकनीकी साझेदार बनाया है। कंपनी का इस साल का कारोबार 275 करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है और तकनीक वाले हिस्से का कारोबार पिछले एक साल में छह गुना बढ़ा है।

कर्ज और बीमा की राह भी हुई आसान
झींगा किसानों की एक और बड़ी परेशानी यह होती थी कि बैंक उन्हें आसानी से कर्ज नहीं देते थे। लेकिन एक्वा एक्सचेंज ने नाबार्ड के साथ मिलकर देश का पहला झींगा फार्म जोखिम आंकलन ढांचा तैयार किया है। इससे बैंकों को यह समझने में मदद मिलती है कि कौन से किसान को कर्ज देना सुरक्षित है। इसके अलावा फसल बीमा की सुविधा भी शुरू हो गई है जिससे किसान को नुकसान होने पर थोड़ी राहत मिल सके।

व्यापार समझौतों से खुलेंगे निर्यात के दरवाजे 
दुनियाभर में मांस और मछली की मांग बढ़ रही है, लेकिन समुद्र से मछली पकड़ने की मात्रा घट रही है। ऐसे में झींगा पालन जैसे तालाब आधारित मछली पालन का महत्व बहुत बढ़ गया है। यूरोप, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया के साथ भारत के नए व्यापार समझौते भी झींगा निर्यात के लिए नए दरवाजे खोल रहे हैं। इन सब मौकों का फायदा उठाने के लिए कंपनी नई पूंजी से अपना काम और तेजी से बढ़ाने की तैयारी में है। कंपनी का लक्ष्य इसी साल मुनाफे में आना है।
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