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Vp Radhakrishnan Calls For Judicious Water Use Integrated Management Lauds Interstate Mous On Water Sharing
उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने की जल प्रबंधन की अपील: मितव्ययी जल उपयोग की नसीहत, अंतरराज्यीय समझौतों को सराहा
गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली
Published by: Umashankar Mishra
Updated Tue, 22 Sep 2026 02:28 PM IST
सार
उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने 9वें इंडिया इंटरनेशनल वॉटर वीक-2026 के उद्घाटन समारोह में जल के मितव्ययी इस्तेमाल और एकीकृत जल प्रबंधन की अपील की। उन्होंने कहा कि दुनिया में बढ़ती चिंता है कि भविष्य के संघर्ष पानी को लेकर हो सकते हैं। उन्होंने नदी जोड़ो परियोजना पर अपने पुराने अनुभव साझा किए और बताया कि दो दिनों में हिमाचल, उत्तराखंड, राजस्थान, हरियाणा, यूपी और दिल्ली सहित सात राज्यों ने जल बंटवारे को लेकर समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं।
उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने मंगलवार को जल के मितव्ययी इस्तेमाल और एकीकृत जल प्रबंधन दृष्टिकोण अपनाने की अपील करते हुए कहा कि जरूरतों को "कम से कम संभव मात्रा में पानी" से पूरा किया जाना चाहिए। 9वें इंडिया इंटरनेशनल वॉटर वीक-2026 के उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए राधाकृष्णन ने कहा कि पानी की कमी अब भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है, और इस अनमोल संसाधन के संरक्षण को लेकर ज्यादा जागरूकता की जरूरत है। उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा, "मैं एक ऐसी जगह से आता हूं जहां पानी की इतनी कमी है कि 1000 फीट पर भी पानी नहीं मिलता। मेरे इलाके में खेती सबसे मुश्किल कामों में से एक है।"
"तीसरा विश्व युद्ध पानी के लिए होगा"
उन्होंने कहा कि दुनियाभर में यह चिंता बढ़ रही है कि भविष्य के संघर्ष पानी के संसाधनों से जुड़े हो सकते हैं। उन्होंने कहा, "दुनिया का हर बुद्धिजीवी अब यह कह रहा है कि तीसरा विश्व युद्ध सिर्फ पानी के लिए होगा।" उन्होंने जागरूकता फैलाने की अपील करते हुए कहा कि पानी का इस्तेमाल "बेहद कीमती चीज" समझकर किया जाना चाहिए और जरूरतों को कम से कम पानी में पूरा करने की कोशिश होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि इस तरह के आयोजन इसलिए अहम हैं क्योंकि ये नीति-निर्माताओं, विशेषज्ञों और हितधारकों को जल प्रबंधन से जुड़ी चुनौतियों पर चर्चा के लिए एक साथ लाते हैं।
नदी जोड़ो परियोजना पर पुराना अनुभव साझा किया
राधाकृष्णन ने दो दशक से भी पहले तमिलनाडु में अपनी 19,000 किलोमीटर की रथ यात्रा का जिक्र किया, जो पांच-सूत्री कार्यक्रम पर आधारित थी और जिसमें नदियों को जोड़ने की परियोजना सबसे अहम बिंदु थी। उन्होंने कहा, "यह मेरे दिल के बेहद करीब है। दो दशक से भी पहले मैंने अपने गृह राज्य तमिलनाडु में 19,000 किलोमीटर की रथ यात्रा निकाली थी, जिसमें पांच-सूत्री कार्यक्रम शामिल था; सबसे अहम बिंदु था नदियों को जोड़ना। मैंने तब कहा था कि गंगा को कावेरी से जोड़ा जाना चाहिए, ताकि देश की पूरी जल जरूरत पूरी हो सके।"
उपराष्ट्रपति ने बताया कि सांसद रहते हुए उन्होंने इस मुद्दे पर पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के साथ विस्तार से चर्चा की थी, और अब नदी जोड़ो परियोजना पर हो रहे काम को देखकर उन्हें खुशी हो रही है। उपराष्ट्रपति ने नदी बेसिन प्रबंधन, भूजल रिचार्ज, वर्षा जल संचयन और कुशल सिंचाई को कवर करने वाले एकीकृत दृष्टिकोण की जरूरत पर भी जोर दिया।
राज्यों के बीच जल विवाद अब भी बड़ी चिंता
उपराष्ट्रपति ने कहा कि राज्यों के बीच जल बंटवारे को लेकर विवाद अब भी एक बड़ी चिंता बने हुए हैं, और यह भी बताया कि जहां एक ओर ऐसे विवादों को सुलझाया जा रहा है, वहीं देश के कुछ हिस्सों में अब भी सूखे जैसे हालात बने हुए हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की सराहना करते हुए बताया कि जल बंटवारे को लेकर 10 अंतरराज्यीय समझौता ज्ञापनों (MoU) पर हस्ताक्षर हो चुके हैं। उन्होंने कहा, "दो दिनों में हिमाचल, उत्तराखंड, राजस्थान, हरियाणा, यूपी और दिल्ली सहित सात राज्यों ने जल बंटवारे को लेकर समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए हैं। मुझे लगता है कि यह इस मंत्रालय की सबसे बड़ी उपलब्धि है।"
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