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AI Content: फर्जी और धोखाधड़ी वाले AI कंटेंट पर सरकार की सख्ती, सोशल मीडिया को लगाना होगा वाटरमार्क

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Umashankar Mishra Updated Tue, 10 Feb 2026 06:25 PM IST
सार

केंद्र सरकार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को एआई-जनरेटेड कंटेंट पर वाटरमार्क लगाने का आदेश दिया है। इसका मकसद फर्जी, गैरकानूनी और भ्रामक सामग्री पर रोक लगाकर डिजिटल दुनिया को सुरक्षित बनाना है।

सरकार का कहना है कि यह कदम गैरकानूनी, धोखाधड़ी, अश्लील और बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी सामग्री पर लगाम लगाने के लिए उठाया गया है।
सरकार का कहना है कि यह कदम गैरकानूनी, धोखाधड़ी, अश्लील और बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी सामग्री पर लगाम लगाने के लिए उठाया गया है। - फोटो : सांकेतिक तस्वीर
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विस्तार
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केंद्र सरकार ने एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) से बनने वाली सामग्री को लेकर सख्त रुख अपनाया है। मंगलवार को सरकार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के लिए आदेश जारी करते हुए कहा कि अब एआई-जनित कंटेंट पर साफ तौर पर लेबल या वाटरमार्क लगाना अनिवार्य होगा, ताकि यूजर्स यह पहचान सकें कि कंटेंट इंसानों ने बनाया है या मशीन ने।

सरकार का कहना है कि यह कदम गैरकानूनी, धोखाधड़ी, अश्लील और बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी सामग्री पर लगाम लगाने के लिए उठाया गया है।

एआई कंटेंट पर हटाया न जा सकेगा लेबल
आदेश के मुताबिक, ऑडियो, वीडियो, फोटो, ग्राफिक या किसी भी तरह की डिजिटल सामग्री जो कंप्यूटर या किसी तकनीकी साधन से बनाई, बदली या संशोधित की गई हो, उस पर स्पष्ट पहचान वाला एआई लेबल या मेटाडाटा लगाना जरूरी होगा।

सरकार ने साफ किया है कि एक बार यह लेबल या वाटरमार्क लग जाने के बाद उसे हटाया, दबाया या छिपाया नहीं जा सकेगा।

गैरकानूनी इस्तेमाल रोकना होगा प्लेटफॉर्म्स
सोशल मीडिया कंपनियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि यूजर्स एआई सामग्री का गलत इस्तेमाल न करें। अगर कोई यूजर गैरकानूनी, अश्लील, धोखाधड़ी या बाल यौन शोषण से जुड़ा कंटेंट बनाता या साझा करता है, तो प्लेटफॉर्म्स को उसे रोकने के लिए ऑटोमेटेड तकनीक का इस्तेमाल करना होगा।

यूजर्स को हर तीन महीने में चेतावनी जरूरी
सरकार ने यह भी निर्देश दिया है कि प्लेटफॉर्म्स को हर तीन महीने में अपने यूजर्स को चेतावनी देनी होगी। इसमें बताया जाएगा कि नियमों का उल्लंघन करने पर अकाउंट सस्पेंड किया जा सकता है या कंटेंट हटाया जा सकता है।

नियम टूटने पर 3 घंटे में देनी होगी सूचना
कार्रवाई की समयसीमा भी अब सख्त कर दी गई है। पहले जहां 36 घंटे का वक्त मिलता था, अब नियमों के उल्लंघन की जानकारी तीन घंटे के भीतर देना और तत्काल कार्रवाई करना अनिवार्य होगा। सरकार का मानना है कि इस फैसले से डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर पारदर्शिता बढ़ेगी और यूजर्स को यह समझने में मदद मिलेगी कि कौन-सी जानकारी असली है और कौन-सी एआई से बनाई गई है।
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