सोयाबीन की मध्यम और देर से पकने वाली किस्मों में दाना भरने की अवस्था चल रही है। ऐसे में फसल की फलियों पर फली छेदक इल्ली के हमले की आशंका है। किसानों को फसल की नियमित निगरानी करने की सलाह दी गई है।
कृषि जानकारों के अनुसार, सोयाबीन में दाना भरने के समय फलियों पर फली छेदक इल्लियों का प्रकोप हो सकता है। इनमें मुख्य रूप से हेलिकोवर्पा आर्मिजेरा नाम की इल्ली शामिल है। यह इल्ली सोयाबीन की फलियों में छेद करके उसके अंदर घुस जाती है और विकसित हो रहे दानों को खाकर नष्ट कर देती है। इससे फलियों के अंदर बचे हुए दानों के सड़ने का भी खतरा रहता है, जिससे किसान की पैदावार पर सीधा असर पड़ता है।
नियमित रूप से करें खेतों का निरीक्षण
इस खतरे को देखते हुए जानकारों ने किसानों को सलाह दी है कि वे दाना भरने की इस अवस्था में अपनी फसल और फलियों का लगातार निरीक्षण करते रहें। किसानों को नियमित रूप से खेतों में जाकर यह देखना चाहिए कि फलियों में फली छेदक इल्ली मौजूद तो नहीं है और फसल को कितना नुकसान हो रहा है। इस समय फसल पर नजर रखना बेहद जरूरी है।
जरूरत पड़ने पर करें कीटनाशक का सही छिड़काव
जानकारों के अनुसार, यदि खेत में फली छेदक इल्ली का प्रकोप बहुत ज्यादा हो जाता है और रासायनिक नियंत्रण की जरूरत पड़ती है, तो किसान कीटनाशक का इस्तेमाल कर सकते हैं। जानकारों के अनसुार, बचाव के लिए मुख्य रूप से इंडोक्साकार्ब 15.80% ईसी नाम के कीटनाशक का 333 मिलीलीटर प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करने की सलाह दी है।