राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण ने 27 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों के बीच 2.02 करोड़ रुपये बांटे हैं। यह राशि बीज क्षेत्र की कंपनियों से जैविक संसाधनों के उपयोग के एवज में एक्सेस एंड बेनिफिट-शेयरिंग के तहत प्राप्त हुई है।
जानकारी के अनुसार, यह अंशदान चावल, बैंगन, फूलगोभी, खीरा, तीखी मिर्च, लौकी, करेला, टमाटर और भिंडी जैसी फसलों की विभिन्न किस्मों और हाइब्रिड बीजों के उपयोग से प्राप्त हुआ है। यह राशि ईस्ट वेस्ट सीड्स, सिंजेंटा इंडिया, देवजेन सीड्स, लिमाग्रेन इंडिया, बायर साइंस एंड इनोवेशन, ननहेम्स इंडिया और एंजा जादेन इंडिया जैसी बीज कंपनियों की ओर से दी गई है। जहां व्यक्तिगत स्तर पर लाभ पाने वालों की पहचान संभव नहीं थी, वहां कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के आधार पर फसलों के बुवाई क्षेत्र को देखते हुए राज्य जैव विविधता बोर्डों और केंद्र शासित प्रदेश जैव विविधता परिषदों (UTBCs) के बीच इस राशि का आबंटन किया गया।
मध्य प्रदेश-बिहार जैसे राज्यों को मिला फंड
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, कुल 2.02 करोड़ रुपये में से 1.43 करोड़ रुपये टॉप 10 राज्यों को दिए गए हैं। इनमें मध्य प्रदेश को 23,81,072 रुपये, पश्चिम बंगाल को 23,32,913 रुपये, ओडिशा को 19,75,559 रुपये, बिहार को 17,28,852 रुपये और गुजरात को 13,29,870 रुपये मिले हैं। इसके अलावा छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और महाराष्ट्र भी शीर्ष 10 राज्यों में शामिल हैं, जबकि शेष राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों को कुल 58,94,948 रुपये वितरित किए गए। इस नई किस्त के साथ प्राधिकरण द्वारा अब तक वितरित की गई कुल संचयी राशि 202.00 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है।
जमीनी स्तर पर संरक्षण और सरकारी योजनाओं के साथ समन्वय
प्राधिकरण के अनुसार, यह राशि राज्य और केंद्र शासित प्रदेश स्तर पर जैव विविधता प्रबंधन समितियों को मजबूत करने, पीपुल्स बायोडायवर्सिटी रजिस्टर्स को अद्यतन करने, पारंपरिक फसलों व औषधीय पौधों के संरक्षण तथा प्राकृतिक आवासों के पुनरुद्धार में खर्च की जाएगी। इसके साथ ही, यह फंड पीएम-जनमन, प्रधानमंत्री जनजातीय विकास मिशन और प्रधानमंत्री वन धन योजना जैसी योजनाओं के साथ मिलकर आदिवासी कल्याण और प्राकृतिक संसाधनों पर आधारित आजीविका के अवसरों को बढ़ावा देने में मदद करेगा।
अंतरराष्ट्रीय समझौतों में योगदान और आगामी कॉप 17 सम्मेलन
आधिकारिक बयान के अनुसार, भारत का यह कदम जैविक विविधता अधिनियम 2002 और राष्ट्रीय जैव विविधता रणनीति व कार्य योजना (NBSAP 2024–2030) के क्रियान्वयन में सहायक है। यह तंत्र कुनमिंग-मॉन्ट्रियल वैश्विक जैव विविधता रूपरेखा के लक्ष्यों और संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) का भी समर्थन करता है। भारत 19 अक्टूबर 2026 से आर्मेनिया के येरेवन में शुरू होने वाले 'कन्वेंशन ऑन बायोलॉजिकल डायवर्सिटी' के 17वें सम्मेलन (COP 17) में भाग लेने की तैयारी कर रहा है, जहां यह कदम जैव विविधता के उचित लाभ साझाकरण के प्रति देश की प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है।