सरकारी आंकड़े बताते हैं कि चावल, चीनी, सरसों का तेल और प्याज जैसी प्रमुख कृषि उपजों का खुदरा भाव पिछले साल की तुलना में काफी ऊंचे स्तर पर पहुंच गया हैं। इन उत्पादों की कीमतों में तेजी का बड़ा कारण उत्पादन में कमी और वैश्विक बाजार में इनकी बढ़ती कीमतें हैं।
इन उत्पादों के महंगे होने से आगामी महीनों में खाद्य महंगाई दर में बढ़ोतरी होने की संभावना ने जन्म लिया है। अगस्त महीने में खुदरा स्तर पर खाद्य महंगाई दर 5.95 प्रतिशत रही थी। इसका मुख्य कारण अदरक, लहसुन, प्याज, चीनी, चिकन और खाने के तेलों का महंगा होना था। वहीं, सितंबर महीने के उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (खुदरा महंगाई) के आंकड़े सोमवार को आने वाले हैं।
प्याज की कीमतों में 100 प्रतिशत तक का उछाल और राहत के लिए उठाए गए सरकारी कदम
शुक्रवार को प्याज की औसत खुदरा कीमत 53.52 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई, जो एक साल पहले की तुलना में 100 प्रतिशत अधिक है। पिछले एक महीने में ही प्याज की खुदरा कीमतों में 50 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है, जबकि दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में इसकी कीमतें 60 रुपये प्रति किलो के पार जा चुकी हैं। हालांकि,
आगामी कुछ हफ्ते में प्याज की खुदरा कीमतों में नरमी के आसार
सरकार का कहना है कि, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और राजस्थान में नई खरीफ फसल की शुरुआत, बुवाई का रकबा बढ़ने और फसल की अच्छी स्थिति के कारण महाराष्ट्र की मंडियों में औसत कीमतों में लगभग 13 प्रतिशत की गिरावट आई है। यह कीमत पिछले महीने के 3475 रुपये प्रति क्विंटल से घटकर वर्तमान में 400 रुपये प्रति क्विंटल हो गई है। उपभोक्ता मामलों के विभाग को उम्मीद है कि अगले कुछ हफ्तों में खुदरा कीमतों में नरमी आएगी। बढ़ती कीमतों पर लगाम लगाने के लिए, सरकार के अनुसार उसने अपने बफर स्टॉक से 35 रुपये प्रति किलो की रियायती दर पर प्याज बेचना शुरू कर दिया है। हालांकि, सूत्रों का कहना है कि अक्टूबर के अंत तक नई खरीफ फसल के बाजार में आने तक कीमतें ऊंची बनी रह सकती हैं।
चीनी और सरसों तेल की बढ़ती महंगाई
शुक्रवार को चीनी और सरसों तेल की खुदरा कीमतें क्रमशः 55.34 रुपये प्रति किलो और 203.39 रुपये प्रति किलो हो गईं। यह पिछले साल की तुलना में क्रमशः 19 प्रतिशत और 8 प्रतिशत की वृद्धि है। 2025-26 सीजन के दौरान उत्पादन में कमी के कारण अगस्त के महीने में चीनी की कीमतों में तेज उछाल देखा गया था, जिसके बाद सरकार ने 10 लाख टन कच्ची चीनी के आयात का एलान किया था। उद्योग से जुड़े जानकारों के अनुसार, अक्टूबर के आखिर तक नए सीजन (2026-27) के लिए गन्ने की पेराई शुरू होने की उम्मीद है। इससे चीनी की आपूर्ति में सुधार होगा और कीमतों में कमी आ सकेगी।
चावल की बढ़ती कीमत और सरकारी स्टॉक से खुले बाजार में बिक्री की तैयारी
शुक्रवार को चावल की खुदरा कीमत पिछले साल के मुकाबले 9 प्रतिशत बढ़कर 46.92 रुपये प्रति किलो दर्ज की गई। एक सरकारी अधिकारी के अनुसार, 1 अक्टूबर के लिए तय 10.25 मिलियन टन बफर स्टॉक की जरूरत के मुकाबले सरकार के पास वर्तमान में 38 मिलियन टन से अधिक चावल का भंडार मौजूद है। अधिकारी ने बताया कि कीमतों को नियंत्रित करने के लिए इस अतिरिक्त स्टॉक को 'ओपन मार्केट सेल स्कीम' (खुले बाजार में बिक्री योजना) के तहत बाजार में उतारा जाएगा।
इन उत्पादों से रसोई बजट को सहारा
प्रमुख उत्पादों की तेजी के बीच कई चीजे ऐसी भी हैं, जिन्होंने रसोई बजट में अधिक बढ़ोतरी को रोकने का काम किया है। शुक्रवार तक गेहूं और चना दाल की खुदरा कीमतों में पिछले साल की तुलना में मामूली बढ़ोतरी ही देखने को मिली। गेहूं की कीमतें साल-दर-साल केवल 1 प्रतिशत बढ़कर 32.05 रुपये प्रति किलो हुई हैं। भारतीय खाद्य निगम के पास 1 अक्टूबर के 20.5 मिलियन टन के आवश्यक बफर की तुलना में 38.56 मिलियन टन गेहूं का स्टॉक है।
व्यापारियों के अनुसार, राशन और बफर स्टॉक की जरूरतों को पूरा करने के बाद भी सरकार के पास 20 मिलियन टन से अधिक गेहूं अतिरिक्त बचा हुआ है। दूसरी ओर, आलू की कीमतें पिछले साल की तुलना में 10 प्रतिशत से अधिक गिरकर 22.72 रुपये प्रति किलो हो गई हैं। सरकारी अधिकारियों के अनुसार, बंपर उत्पादन और स्टोरेज में पर्याप्त स्टॉक होने के कारण आलू की कीमतों में यह कमी आई है। वहीं, टमाटर की कीमतें बढ़कर 42.7 रुपये प्रति किलो हो गई हैं, जो साल-दर-साल के आधार पर 10 प्रतिशत की गिरावट को दर्शाता है।