उत्तर प्रदेश के बरकछा स्थित राजीव गांधी दक्षिणी परिसर के पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान संकाय ने उन्नत प्रजनन तकनीक के क्षेत्र में उपलब्धि हासिल की है। राष्ट्रीय कृषि विकास योजना की एम्ब्रियो ट्रांसफर परियोजना के तहत एक साहीवाल गाय से एक वर्ष के भीतर पांच स्वस्थ बछियों का जन्म कराया गया। इसके लिए मल्टीपल ओव्यूलेशन एंड एम्ब्रियो ट्रांसफर तकनीक का इस्तेमाल किया गया।
परियोजना के प्रधान अन्वेषक डॉ. मनीष कुमार के निर्देशन में सह-प्रधान अन्वेषक डॉ. कौस्तुभ किशोर सारफ और डॉ. अजीत सिंह ने भी योगदान दिया।
15 भ्रूण से पांच बछियों का जन्म
डॉ. मनीष कुमार के अनुसार, इस परियोजना के लिए शुद्ध नस्ल की साहीवाल गाय संख्या 53 को भ्रूण दाता चुना गया था। इस गाय का अधिकतम दैनिक दुग्ध उत्पादन 11.5 किलोग्राम बताया गया है। गाय का कृत्रिम गर्भाधान सेक्स-सॉर्टेड सीमेन से किया गया। इसके बाद दाता गाय से प्रत्यारोपण के योग्य 15 भ्रूण प्राप्त हुए। इन भ्रूणों को दूसरी गायों में प्रत्यारोपित किया गया, जिन्हें सरोगेट गाय कहा जाता है। भ्रूण प्रत्यारोपण के बाद पांच सरोगेट गायें गर्भवती हुईं और उन्होंने पांच स्वस्थ बछियों को जन्म दिया। परियोजना से जुड़ी जानकारी के अनुसार, सभी बछियां फिलहाल स्वस्थ हैं।
कम समय में अधिक संतति प्राप्त करने में मददगार तकनीक
मल्टीपल ओव्यूलेशन एंड एम्ब्रियो ट्रांसफर तकनीक के जरिए एक गाय से कई भ्रूण प्राप्त करके उन्हें अलग-अलग गायों में प्रत्यारोपित किया जा सकता है। इससे श्रेष्ठ मादा पशु की आनुवंशिक क्षमता को कम समय में आगे बढ़ाने में मदद मिलती है।
परियोजना से जुड़ी जानकारी के मुताबिक, पारंपरिक कृत्रिम गर्भाधान के जरिए एक गाय से पांच बछियां प्राप्त करने के लिए कई बार गर्भधारण की प्रक्रिया से गुजरना पड़ सकता है। इसमें लगभग 6 से 6.5 वर्ष तक लग सकते हैं, जबकि भ्रूण प्रत्यारोपण तकनीक से कम समय में अधिक संतति प्राप्त करना संभव है।
सेक्स-सॉर्टेड सीमेन के इस्तेमाल के कारण इस परियोजना में जन्मी सभी पांच संततियां मादा हैं। ये बछियां भविष्य में डेयरी क्षेत्र के लिए मूल्यवान आनुवंशिक संसाधन बन सकती हैं।
परियोजना दल के प्रयासों की सराहना
कृषि विज्ञान संस्थान के निदेशक प्रो. वीके मिश्र, अधिष्ठाता डॉ. अमित राज गुप्ता और आचार्य प्रभारी प्रो. बीएमएन कुमार ने परियोजना दल के प्रयासों की प्रशंसा की। इस परियोजना में एक साहीवाल गाय से प्राप्त भ्रूणों को दूसरी गायों में प्रत्यारोपित करके पांच स्वस्थ बछियों का जन्म कराया गया। यह उपलब्धि उन्नत पशु प्रजनन तकनीक के इस्तेमाल का उदाहरण है।