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कृषि मंत्री के 10 बड़े फैसले : हफ्ते में 3 दिन खेतों में जाएंगे KVK वैज्ञानिक, हर जिले में नोडल एजेंसी बनेगी

गांव जंक्शन डेस्क, नोएडा Published by: Himanshu Mishra Updated Wed, 18 Jun 2025 02:15 PM IST
सार

कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि विकसित कृषि संकल्प अभियान से हमें भी काफी कुछ सीखने को मिला है। अब इस सबक के आधार पर आगे काम होगा। किसानों से लगातार संपर्क बनाए रखने के लिए चौहान ने कृषि विज्ञान केंद्रों को पहले के मुकाबले ज्यादा एक्टिव रहने के लिए कहा है।

प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान, साथ में आईसीएआर डीजी डॉ. एमएल जाट।
प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान, साथ में आईसीएआर डीजी डॉ. एमएल जाट। - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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विकसित कृषि संकल्प अभियान को सफल बताते हुए कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने एक साथ 10 बड़े फैसले ले लिए। बुधवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस करके उन्होंने इसकी जानकारी दी। चौहान ने कहा कि इस अभियान से हमें भी काफी कुछ सीखने को मिला। अब इन सबक के आधार पर आगे काम होगा। किसानों से लगातार संपर्क बनाए रखने के लिए चौहान ने कृषि विज्ञान केंद्रों को पहले के मुकाबले ज्यादा एक्टिव रहने को कहा है। उन्होंने कहा कि अब अनिवार्य रूप से कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक सप्ताह में तीन दिन खेतों में जाएंगे और किसानों से संवाद करेंगे। 

 
कृषि मंत्री ने लिए ये बड़े फैसले
  • ज्ञान, अनुसंधान और क्षमताओं के गैप को पाटने की कोशिश करेंगे। 
  • हर जिले में कृषि विज्ञान केंद्रों को एक टीम के रूप में नोडल एजेंसी बनाएंगे। 
  • केवीके का एक जैसा स्वरूप होगा। अभियान के बाद भी ये टीम साथ काम करेगी। 
  • केवीके के वैज्ञानिक अनिवार्य रूप से सप्ताह में तीन दिन खेतों और किसानों के बीच में जाएंगे। 
  • कृषि मंत्री के तौर पर मैं खुद सप्ताह में दो दिन खेतों में जाऊंगा और किसानों से संवाद करूंगा।  
  • अफसरों को भी कहा है कि वह खुद फील्ड पर जाएं और किसानों से संवाद करें। 
  • राष्ट्रीय स्तर पर समन्वय करने के लिए किसानों के लिए काम करने वाले जितने विभाग हैं, उनका एकसाथ काम करना जरूरी है। 
  • राज्यवार कृषि के लिए आईसीएआर की तरफ से नोडल अफसर तय होगा। जो वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ संबंधित राज्यों की समस्याओं को दूर करने की कोशिश करेगा। 
  • राज्यों के साथ मिलकर रोडमैप बनाया जाएगा। 

 
तीन बड़े सबक मिले
1. सिर्फ दिल्ली में बैठक किसानों के लिए शोध व प्लानिंग नहीं की जा सकती है। इसके लिए जमीन पर उतरना होगा और किसानों से संवाद स्थापित करना होगा।
2. कई किसान खुद भी परिस्थिति के अनुसार बेहतरीन शोध और इनोवेशन करते हैं। ऐसे इनोवेशन को बढ़ावा दिया जाएगा। 
3. ग्राउंड पर किसानों के सामने कई चुनौतियां और समस्याएं हैं। उन्हें समझकर उसे दूर करने की कोशिश करनी होगी।
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