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Fake Seeds Will Be Curbed New Seed Law Will Be A Support For Farmers Govt Should Implement It Strictly
HARYANA: नकली बीजों पर लगेगी लगाम, किसानों का सहारा बनेगा नया बीज का कानून, इसे दृढ़ता से लागू करे सरकार
डॉ. वीरेन्द्र सिंह लाठर
Published by: Umashankar Mishra
Updated Mon, 07 Apr 2025 08:02 PM IST
सार
हरियाणा में नए बीज कानून को लेकर व्यापारियों का विरोध अनैतिक और गैर-कानूनी है। यह विरोध किसी तरह से किसानों के हित में नहीं है, क्योंकि नकली बीजों के उपयोग से किसानों की औसत उपज कम होती है और पैदावार घट जाती है। इससे किसानों काफी नुकसान उठाना पड़ता है। सरकार को दृढ़ता से नया बीज कानून लागू करना चाहिए, ताकि किसानों को इस तरह की मुश्किलों से बचाया जा सके।
बीज व्यापारी भी बीज कंपनियों की तरह नकली बीजों के कारोबार में भागीदार रहे हैं।
- फोटो : गांव जंक्शन
किसानों की ओर से सरकार को यह शिकायत काफी समय से मिल रही थी कि बड़े पैमाने पर नकली बीज एवं कीटनाशक उन तक पहुंच रहे हैं। बीज नकली होते हैं तो पौधों का जमाव कम होता है। वहीं, कीटनाशक सही नहीं होगा तो कीटों पर उसका कोई असर नहीं पड़ेगा और कीटों के प्रकोप से फसल नष्ट हो जाएगी। इसी तरह की स्थिति फसलों के रोगों की रोकथाम में उपयोग होने वाली दवाओं के मामले में भी देखने को मिलती है। बीज से लेकर कीटनाशक और दवाइयों जैसे - कृषि इन्पुट्स पर किसान अपनी गाढ़ी कमाई खर्च करते हैं। लेकिन, नकली बीज, कीटनाशक और दवाओं के चलते किसान को दोहरा नुकसान उठाना पड़ता है।
नया बीज एवं कीटनाशक कानून
हरियाणा सरकार सीएम नायब सिंह सैनी के नेतृत्व में हाल में राज्य विधान सभा में किसानों की इस मुश्किल को आसान करने के इरादे से एक बिल लाया गया, जिस पर सदन की मुहर लग चुकी है। बीज एवं कीटनाशक अधिनियम-2025 नामक यह बिल अब एक नया कानून बनकर किसानों के हितों के संरक्षण में भूमिका निभाएगा। लेकिन, बीज निर्माताओं और कारोबारियों का एक वर्ग इस कानून का विरोध करते हुए, इसे वापस लेने की मांग कर रहा है।
क्या होता है नकली बीज
नकली बीजों की बात करें, तो जिस बीज की जमाव क्षमता, भारतीय बीज अधिनियम-1966 के अनुरूप नही है या उन किस्मों का बीज, जो प्रदेश के लिए अनुशंसित नहीं है, नकली बीज माना जाएगा। नकली बीजों का जर्मिनेशन नहीं होता या फिर उस पर फल नहीं आता। इसके चलते किसानों को बड़े पैमाने पर आर्थिक नुकसान होता है। यही कारण है कि किसानों ने भी सरकार के इस फैसले को सराहा है। इसीलिए, सरकार को इस नियम को सख्ती के साथ लागू करना चाहिए, क्योंकि यह किसानों के हित में है।
बीजों का काला कारोबार
हरियाणा में अवैध तौर पर बिक रहे बिना सरकारी सिफारिश वाले संकर धान के बीज की उच्च स्तरीय जांच के लिए गत वर्ष इस लेखक ने राज्यपाल को भी पत्र लिखकर अनुरोध किया था। लगभग 50 प्रतिशत बीज प्राइवेट कंपनियां नकली बेच रही हैं। कुछ समय पूर्व एक बीज कंपनी ने धान का एक ऐसा हाईब्रिड बीज हरियाणा के किसानों को बेचा, जो इस प्रदेश के लिए अनुशंसित ही नहीं है। इस तरह के बीजों से पैदा होने वाले फसल की रिकवरी दर कम होती है, जिसके चलते किसानों को राइस मिलों से इसके कम दाम मिलते हैं। धान के इन नकली बीजों में प्राइवेट कंपनियों के 7501, 7301 जैसे संकर धान के बीज बहुत महंगे दामों पर किसानो को बेचे जा रहे थे, जो हरियाणा के लिए सरकारी तौर पर अनुमोदित नहीं हैं।
हरियाणा के किसान, पहले ही कपास की फसल में इस तरह के बिना अनुमोदित संकर बीजो से उत्पन्न गुलाबी सुंडी के कहर से वर्षों से भारी नुकसान उठाते रहे हैं। बिना अनुमोदित संकर धान के बीजों के कारण हरियाणा प्रदेश का धान का कटोरे कहे जाने वाले करनाल, कुरूक्षेत्र, यमुनानगर आदि जिलों मे बौनेपन वायरस बीमारी की आहट सुनाई देने लगी है। इसीलिए, बिना अनुमोदित संकर धान के अवैध बीज पर लगाम लगाए जाने की जरूरत लंबे समय से महसूस की जा रही थी, ताकि नकली बीजों के अवैध व्यापार के दोषियो के खिलाफ उचित कार्रवाई की जा सके।
व्यापारियों का कुतर्क
'उल्टा चोर - कोतवाल को डांटे' कहावत को चरितार्थ करते हुए, प्रदेश के व्यापारियों ने हरियाणा सीड्स व पेस्टीसाइड्स एक्ट-2025 के विरुद्ध आज से 7 दिन की हड़ताल का एलान किया है। इस एक्ट का विरोध सरासर अनैतिक और गैर-कानूनी है, जो इस बात का प्रमाण भी है कि इन व्यापारियों का एक बड़ा वर्ग, वर्षों से नकली बीज और कृषि रसायन (खाद, कीटनाशक आदि) के व्यापार से किसानों को सरेआम लूट रहा है। जिससे खेती की लागत मे बेवजह बढ़ोतरी और फसलो की औसत पैदावार मे गिरावट दर्ज हो रही है। जिसका सीधा नुकसान किसानो को हो रहा है। अगर ये व्यापारी नकली बीज और कृषि रसायन (खाद, कीटनाशक आदि) का व्यापार नहीं करते, तो फिर सीड्स व पेस्टीसाइड्स एक्ट-2025 का विरोध क्यों कर रहे हैं?
हरियाणा में नए बीज कानून का का विरोध और हड़ताल व्यापारियों के कुतर्क पर आधारित है। नकली बीजों के कारोबार में उत्पादक से लेकर वितरक और विक्रेता की जिम्मेदारी होती है। व्यापारी यह कहकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला नहीं झाड़ सकते कि कंपनियां सीलबंद पैकेट में बीज व कृषि रसायन बेचती हैं, इसीलिए सारी जवाबदेही उन्हीं की बनती है। भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 34 के मुताबिक, अपराध में शामिल सभी लोग समान रूप से जिम्मेदार होते हैं।
हरियाणा में बड़े पैमाने पर खेती की जाती है। ऐसे में, बेहतर कृषि इन्पुट्स किसानों को मुहैया कराकर किसानों की हालत सुधारने में यह कानून दूरगामी असर डाल सकता है। हरियाणा सरकार को नकली बीजों और कृषि रसायनों पर व्यापारीयो के कुतर्क को नजरअंदाज करके, हरियाणा सीड्स व पेस्टीसाइड्स एक्ट-2025 को दृढ़ता से अतिशीघ्र लागू करना चाहिए।
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