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Chirag Paswan Article: फूड प्रोसेसिंग के जरिए बदल रहा भारत, पढ़िए केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान का पूरा लेख

गांव जंक्शन डेस्क, नोएडा Published by: Himanshu Mishra Updated Tue, 24 Jun 2025 04:02 PM IST
सार

कश्मीर से अंडमान और निकोबार द्वीप समूह तक, सूक्ष्म उद्यमी औपचारिकता अपना रहे हैं और नए बाजारों में प्रवेश कर रहे हैं। एक संरचनात्मक परिवर्तन हो रहा है, जो ग्रामीण भारत की ताकत को राष्ट्रीय विकास की गति से जोड़ रहा है।

खाद्य प्रसंस्करण से तरक्की की राह
खाद्य प्रसंस्करण से तरक्की की राह - फोटो : गांव जंक्शन
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विस्तार
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बिहार का मखाना बेल्ट मधुबनी है। यहां एक नई क्रांति चल रही है। ये क्रांति है फूड प्रोसेसिंग की। यहां रहने वाले युवा उद्यमी ग्यानिश कुमार मिश्रा ने पारंपरिक फसल मखाना को लजीज स्नैक्स के रूप में एक राष्ट्रीय ब्रांड में बदल दिया है। अब पूरी दुनिया में इनके प्रोडक्ट की डिमांड है। ये सबकुछ प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यमों के औपचारिकरण योजना (PMFME) के तहत संभव हो पाया है। इनके प्रोडक्ट अमेरिका और कनाडा तक निर्यात होता है। उनका यह सफर भारत के खाद्य प्रसंस्करण मिशन की उस व्यापक दृष्टि को दर्शाता है। जहां स्थानीय ताकतों को वैश्विक अवसरों में बदला जा रहा है।

कश्मीर से अंडमान और निकोबार द्वीप समूह तक, छोटे उद्यमी इनोवोशन और सरकारी योजनाओं की मदद से नए बाजारों में दस्तक दे रहे हैं। एक संरचनात्मक परिवर्तन हो रहा है, जो ग्रामीण भारत की ताकत को राष्ट्रीय विकास की गति से जोड़ रहा है।

उद्योग आज ज्यादा मजबूत
पिछले 11 वर्षों में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने परिवर्तन का एक अद्भुत सफर तय किया है। ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ में सुधारों के साथ, आज उद्योगों को अधिक स्वायत्तता और नीति समर्थन प्राप्त है। इस व्यापक परिवर्तन के बीच, खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र समावेशी विकास, कृषि-औद्योगिक एकीकरण और वैश्विक सहभागिता का एक शक्तिशाली माध्यम बनकर उभरा है।

कुछ वर्षों पहले तक, यह क्षेत्र बिखरा हुआ था। जहां फसल की कटाई-तुड़ाई के बाद किसानों को भारी नुकसान होता था। कृषि उत्पादों से संभावित मूल्य की प्राप्ति भी नहीं हो पाती थी। लेकिन फिर इसमें बदलाव ने दस्तक दी। 2014 में इस क्षेत्र की सकल मूल्य वृद्धि 1.34 लाख करोड़ रुपये थी, जो आज बढ़कर 2.24 लाख करोड़ रुपये हो गई है। इस परिवर्तन की अगुवाई खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय ने की है, जिसकी प्रमुख योजनाओं ने इस क्षेत्र में अनुकूल वातावरण तैयार किया है। 

कई योजनाओं से बदली लोगों की किस्मत
प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना (PMKSY) के अंतर्गत 1,604 परियोजनाएं स्वीकृत की गईं, जिनसे 250 लाख मीट्रिक टन वार्षिक प्रसंस्करण एवं संरक्षण क्षमता बनी है और 22,000 करोड़ रुपये से अधिक का निजी निवेश आकर्षित हुआ है। इससे 53 लाख से अधिक किसानों को प्रत्यक्ष लाभ और 7.6 लाख से अधिक रोजगार सृजित हुए हैं।

इसके साथ ही, PMFME योजना को आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत 10,000 करोड़ रुपये की लागत से शुरू किया गया था। इसने असंगठित सूक्ष्म खाद्य इकाइयों को औपचारिकता, क्षमता निर्माण और ऋण की सुविधा प्रदान की है। अब तक 1.41 लाख से अधिक ऋण, 11,205 करोड़ रुपये की राशि में स्वीकृत किए गए हैं और 3.3 लाख से अधिक स्वयं सहायता समूह (SHG) के सदस्यों को बीज पूंजी प्रदान की गई है।

इस योजना के तहत कौशल विकास और उद्यमिता के लिए मजबूत आधार तैयार किया गया है। देशभर में एक लाख से अधिक व्यक्तियों को प्रशिक्षित किया गया है। नवाचार को प्रोत्साहित करने के लिए 75 इनक्यूबेशन केंद्र स्वीकृत किए गए हैं और 17 क्षेत्रीय ब्रांड लॉन्च किए गए हैं, जो स्थानीय विरासत से जुड़े हैं।

रोजगार सृजन को मिली नई गति 
फूड प्रोसेसिंग उद्योगों के लिए उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन योजना (PLI) ने औद्योगिक क्षमता और औपचारिक रोजगार सृजन को गति दी है। 8,900 करोड़ रुपये के निवेश के साथ 3.3 लाख से अधिक नौकरियां और 67 लाख मीट्रिक टन से अधिक प्रसंस्करण क्षमता जोड़ी गई है।

बुनियादी ढांचे को सशक्त करने के लिए, 2024–25 के केंद्रीय बजट में 50 बहु-उत्पाद विकिरण इकाइयों और 100 NABL-प्रमाणित खाद्य परीक्षण प्रयोगशालाओं की घोषणा की गई है। इसके अलावा, मखाने को वैश्विक स्तर पर बढ़ावा देने हेतु एक राष्ट्रीय मखाना बोर्ड की स्थापना की गई है। इस क्षेत्र की औद्योगिक वृद्धि संस्थागत और नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र की तेज प्रगति को दर्शाती है।

राष्ट्रीय संस्थानों की भूमिका भी अहम
NIFTEM-कुंडली और NIFTEM-थंजावुर जैसे राष्ट्रीय महत्व के संस्थान, खाद्य तकनीक विशेषज्ञों और उद्यमियों की एक नई पीढ़ी तैयार कर रहे हैं। तीसरा NIFTEM संस्थान बिहार में स्थापित हो रहा है। भारत का फूड-टेक स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र भी फल-फूल रहा है, जहां 5,000 से अधिक नवप्रवर्तक पौधों पर आधारित उत्पाद, AI आधारित ट्रेसबिलिटी, फंक्शनल फूड्स और टिकाऊ पैकेजिंग पर कार्य कर रहे हैं।

भारत की वैश्विक खाद्य अर्थव्यवस्था में बढ़ती नेतृत्व क्षमता का प्रदर्शन वर्ल्ड फूड इंडिया के माध्यम से होता है। यह मंत्रालय का प्रमुख अंतरराष्ट्रीय मंच है जो निवेश, नवाचार और सहयोग को बढ़ावा देता है।

लेकिन इस दशक का सबसे गहरा प्रभाव ग्रामीण भारत में देखने को मिलता है। खाद्य प्रसंस्करण जमीनी स्तर पर परिवर्तन की ताकत बन गया है। छत्तीसगढ़ के बस्तर में एक आदिवासी रसोई ने, PMFME योजना के तहत, महुआ फूलों से बने उत्पाद जैसे चॉकलेट, एनर्जी बार और चाय के माध्यम से खुद को एक संपन्न उद्यम में बदल दिया है। इसने न केवल स्थानीय विरासत को संरक्षित किया, बल्कि उसे राष्ट्रीय बाजारों और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाया।

जैसे ही हम एनडीए सरकार के 11 वर्षों की सुशासन और समावेशी विकास की यात्रा को देखते हैं, हम भविष्य की ओर नए संकल्प के साथ बढ़ते हैं। हमारा लक्ष्य स्पष्ट है, 'दुनिया की हर शेल्फ पर “भारत” का नाम गर्व से चमके और हर उस उत्पाद के पीछे हो समृद्धि और राष्ट्रीय गौरव की एक साझा कहानी।'

नोट: यह लेख केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण मंत्री चिराग पासवान ने इंडियन एक्सप्रेस के लिए लिखा है। इस लेख को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी शेयर किया। 
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