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Fisheries Hub: लक्षद्वीप में एकीकृत मत्स्य हब की उठी मांग, ट्यूना आधारित मत्स्य क्षेत्र को मिलेगी नई दिशा

गांव जंक्शन डेस्क, नोएडा Published by: Himanshu Mishra Updated Wed, 14 Jan 2026 08:08 AM IST
सार

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि प्रस्तावित एकीकृत मत्स्य हब को धरातल पर उतारा गया, तो यह लक्षद्वीप को देश के प्रमुख टिकाऊ समुद्री मत्स्य मॉडल के रूप में स्थापित कर सकता है।

मछली बाजार
मछली बाजार - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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लक्षद्वीप की अर्थव्यवस्था और आजीविका की रीढ़ माने जाने वाले मत्स्य क्षेत्र को नई मजबूती देने की दिशा में एक अहम पहल सामने आई है। कवरत्ती में संपन्न हुए मत्स्य मेला के दौरान विशेषज्ञों, वैज्ञानिकों और मत्स्य क्षेत्र से जुड़े हितधारकों ने लक्षद्वीप में एकीकृत मत्स्य हब (इंटीग्रेटेड फिशरीज हब) स्थापित करने की जोरदार मांग की। इस हब को एक सिंगल-विंडो प्लेटफॉर्म के रूप में विकसित करने का प्रस्ताव रखा गया, जिससे मछुआरों की आय बढ़ेगी और द्वीपों में मत्स्य आधारित आजीविका को स्थायित्व मिलेगा।

प्रस्तावित मत्स्य हब का उद्देश्य मत्स्य उत्पादों के संगठित विपणन, सामूहिक लैंडिंग और हैंडलिंग सुविधाओं, कोल्ड स्टोरेज और कोल्ड-चेन ढांचे, मूल्य संवर्धन इकाइयों और निर्यात सुविधा को एक ही मंच पर लाना है। इससे लक्षद्वीप की प्रसिद्ध ट्यूना आधारित मत्स्य संपदा और उभरते मैरीकल्चर सेक्टर की पूरी क्षमता का उपयोग संभव हो सकेगा।

वैज्ञानिक आंकड़ों पर आधारित प्रबंधन पर जोर
मत्स्य विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि लक्षद्वीप जैसे संवेदनशील समुद्री क्षेत्र में नियमित और वैज्ञानिक ढंग से मछली पकड़ने के आंकड़ों का आकलन बेहद जरूरी है। टिकाऊ मत्स्य प्रबंधन के लिए यह आधारशिला साबित होगा और इससे मछली भंडार के संरक्षण के साथ-साथ भविष्य की नीतियां भी तय की जा सकेंगी।

केज फिश फार्मिंग और समुद्री खेती की संभावनाएं
मत्स्य मेले में एक अहम सिफारिश यह भी रही कि लक्षद्वीप के समुद्री क्षेत्र में केज फिश फार्मिंग के लिए उपयुक्त स्थानों की पहचान की जाए। वैज्ञानिकों ने कहा कि इसके लिए पर्यावरणीय वहन क्षमता, पारिस्थितिकी तंत्र की सेहत और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को ध्यान में रखना जरूरी होगा।

इसके साथ ही सीवीड (समुद्री शैवाल) की खेती, सजावटी मत्स्य पालन (ऑर्नामेंटल फिशरीज) और अन्य वैकल्पिक आजीविका गतिविधियों को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया गया। ये गतिविधियां पारंपरिक मत्स्य शिकार पर दबाव कम कर सकती हैं और मछुआरा समुदाय को अतिरिक्त आय के अवसर दे सकती हैं।

सिटिजन साइंस और सामुदायिक भागीदारी
मत्स्य मेले में सिटिजन साइंस को बढ़ावा देने की भी सिफारिश की गई। इसके तहत मछुआरों और वैज्ञानिक संस्थानों के बीच सीधा सहयोग स्थापित कर डेटा संग्रह, स्टॉक असेसमेंट और इकोसिस्टम मॉनिटरिंग को मजबूत किया जा सकता है। वक्ताओं ने कहा कि जब तक मछुआरे, शोधकर्ता, सहकारी संस्थाएं, उद्यमी और प्रशासन मिलकर काम नहीं करेंगे, तब तक वैज्ञानिक ज्ञान को जमीनी स्तर पर प्रभावी रूप से लागू करना मुश्किल होगा।

आयोजन में वैज्ञानिक संस्थानों की अहम भूमिका
इस मत्स्य मेले का आयोजन आईसीएआर–केंद्रीय समुद्री मत्स्य अनुसंधान संस्थान (CMFRI) के अंतर्गत कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) लक्षद्वीप ने लक्षद्वीप मत्स्य विभाग के सहयोग से किया। आयोजन में नीति, विज्ञान और समुदाय को एक मंच पर लाने की पहल को सराहा गया।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि प्रस्तावित एकीकृत मत्स्य हब को धरातल पर उतारा गया, तो यह लक्षद्वीप को देश के प्रमुख टिकाऊ समुद्री मत्स्य मॉडल के रूप में स्थापित कर सकता है।
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