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दलहन किसानों के लिए बड़ी खबर : आने वाली हैं मोठ की दो नई किस्में, कम बारिश को भी झेलेगी फसल, जानें...

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Devesh Saraswat Updated Sun, 13 Sep 2026 04:23 PM IST
सार

कम बारिश वाले इलाकों में रहने वाले मोठ किसानों के लिए बड़ी खबर।
ICAR ने लंबे समय तक बारिश न होने की चुनौती को झेलने वाली दो नई किस्मों का विकास किया है।
किस्मों का नाम मोठ-10 और मोठ-11 रखा गया है।
60-65 दिनों में पककर तैयार होगी फसल।

जलवायु परिवर्तन को झेलने वाली दो नई मोठ की किस्में 2026 में जारी होंगी।
जलवायु परिवर्तन को झेलने वाली दो नई मोठ की किस्में 2026 में जारी होंगी। - फोटो : गांव जंक्शन
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विस्तार
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कम बारिश वाले इलाकों में दलहन फसलों की खेती को मजबूती देने की कड़ी में बड़ी सफलता मिली है। आईसीएआर के तहत काम करने वाले केंद्रीय शुष्क क्षेत्र अनुसंधान संस्थान ने मोठ की दो नई किस्मों का विकार किया है। ये किस्में लंबे समय तक बारिश न होने और भारी बारिश को सहन कर सकती है।

किसानों तक कब पहुंचेगी मोठ-10 और मोठ-11?
इन दो नई किस्मों का नाम काजरी मोठ 10 और काजरी मोठ 11 रखा गया है। जानकारी के अनसार, साल 2026 में ये किस्में रिलीज होंगी। जानकारों के अनुसार, सूखे क्षेत्रों  के लिए मोठ एक अहम फसल है। कठोर वातावरण झेलने की क्षमता इन किस्मों को खास बनाती है। इससे पहले केंद्रीय शुष्क क्षेत्र अनुसंधान संस्थान ने 2023 में मोठ-4 और मोठ-5, 2024 में मोठ-6 और मोठ-7 समेत 2025 में मोठ-8 और मोठ-9 को जारी की हैं।

राजस्थान और सूखे इलाकों के किसानों के लिए वरदान
अधिकारियों के अनुसार, मोठ का सबसे ज्यादा उत्पादन राजस्थान में होता है, इसलिए कम बारिश और सूखे जैसी चुनौती झेलने वाले किसानों के लिए ये किस्में काफी फायदेमंद हैं। बदलती जलवायु के बीच कम पानी मांगने वाली फसलें किसानों के लिए सुरक्षित विकल्प हैं। 

60-65 दिनों के कम समय में पकने वाली फसल
अधिकारियों ने कम बारिश वाले हालात के लिए काजरी की इन उन्नत किस्मों को बेहद उपयुक्त बताया है। उदाहरण के लिए, पहले जारी की गई काजरी मोठ-2 और मोठ-3 जैसी किस्में मात्र 60 से 65 दिनों में पककर तैयार हो जाती हैं। इससे किसानों को कम और अनिश्चित समय वाली बुवाई अवधि में भी फसल लेने का मौका मिल जाता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, देश में दालों का घरेलू उत्पादन बढ़ाने के सरकार के प्रयासों के बीच इन नई किस्मों का आना बहुत अहम है। 


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