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Beekeeping: प्लास्टिक, लड़की या लोहे के नहीं, मिट्टी के बॉक्स में करिए मधुमक्खी पालन, होगा बंपर शहद उत्पादन

गांव जंक्शन डेस्क, नोएडा Published by: Himanshu Mishra Updated Tue, 17 Jun 2025 02:27 PM IST
सार

देसी मधुमक्खी स्वतंत्र छत्तों या जंगली कॉलोनियों की तुलना में दीवार के छत्तों में सर्दियों में बेहतर तरीके से जीवित रहने के लिए जानी जाती हैं। लेकिन जैसे-जैसे इन पारंपरिक मोटी दीवारों वाले घरों की संख्या कम होती जा रही है, मधुमक्खी पालन का यह तरीका विलुप्त होता जा रहा है।

मधुमक्खी पालन (सांकेतिक तस्वीर)
मधुमक्खी पालन (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : गांव जंक्शन
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विस्तार
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देसी मधुमक्खियां प्लास्टिक, लकड़ी या लोहे के बॉक्स (बीआईएस हाइब) से ज्यादा शहद मिट्टी के बॉक्स में तैयार करती हैं। एक नए शोध से ये बातें सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार, प्लास्टिक, लकड़ी या लोहे के बॉक्स में एक साल में मधुमक्खियों का परिवार अधिकतम 5 किलोग्राम तक शहद तैयार करता है, वहीं मिट्टी के बॉक्स (मड हाइब) में साल में अधिकतम 9 किलोग्राम तक शहद तैयार करता है। डॉ. यशवंत सिंह परमार बागवानी एवं वानिकी विवि नौणी के के वैज्ञानिकों ने इस शोध को अंजाम दिया। अब इसके आधार पर उद्यान विभाग ने ट्रायल पर मिट्टी घास से बने बॉक्स (मड हाइब) में मधुमक्खी पालन शुरू कर दिया है। वैज्ञानिकों की टीम ने कुल्लू के कुछ क्षेत्रों में बने मिट्टी के घरों में शोध किया था। 

 
रिपोर्ट में क्या है खास?
  • मिट्टी के बॉक्स में गर्मियों के मौसम में तापमान ठंडा रहता है। इनमें बीआईएस हाइब बॉक्स के मुकाबले 6 से 8 सेल्सियस डिग्री तक तापमान कम रहता है। 
  • सर्दियों में बीआईएस हाइब बॉक्स का 4 से 5 सेल्सियस डिग्री तापमान ज्यादा रहता है। वैज्ञानिकों के अनुसार मधुमक्खियां ज्यादातर मड हाइब में रहना पसंद करती हैं। 
  • यह बिना किसी खर्चे के मिट्टी और घास से बनाए जाते हैं। (बीआईएस हाइब बॉक्स को महंगा खरीदना पड़ता है। 

 
विलुप्त हो रहा मधुमक्खी पालन का तरीका
देसी मधुमक्खी स्वतंत्र छत्तों या जंगली कॉलोनियों की तुलना में दीवार के छत्तों में सर्दियों में बेहतर तरीके से जीवित रहने के लिए जानी जाती हैं। लेकिन जैसे-जैसे इन पारंपरिक मोटी दीवारों वाले घरों की संख्या कम होती जा रही है, मधुमक्खी पालन का यह तरीका विलुप्त होता जा रहा है। मिट्टी के छत्ते में आधुनिक और पारंपरिक दोनों तरह के छत्ते के गुण होते हैं। यह किसान को आसानी से उपलब्ध सामग्री से बना सकते हैं।
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