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Uttar Pradesh Farmers Help If Potatoes Sold For Less Than Rs 700 Per Quintal Two Schemes Launched
उत्तर प्रदेश : आलू 700 रुपये क्विंटल से कम बिका तो किसानों को मिलेगी मदद... दो योजनाएं शुरू, जानें
गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली
Published by: Mohammad Aamil
Updated Sun, 25 Oct 2026 05:48 PM IST
सार
यूपी में आलू किसानों के लिए वर्ष 2026-27 में दो अनुदान योजनाएं शुरू की गई हैं। 700 रुपये प्रति क्विंटल से कम भाव पर बिक्री और शीतगृह भंडारण शुल्क के लिए पात्र किसानों को 20 हजार रुपये तक सहायता मिल सकती है।
आलू की बंपर पैदावार के बाद बाजार में भाव गिरने से किसानों को नुकसान की चिंता रहती है। इसे देखते हुए उद्यान विभाग ने वर्ष 2026-27 के लिए दो योजनाएं शुरू की हैं। इनके तहत आलू की कीमत कम मिलने पर किसानों को भाव स्थिरता योजना का लाभ मिल सकता है। वहीं, निजी शीतगृह में आलू रखने वाले किसानों को भंडारण शुल्क पर भी अनुदान दिया जाएगा। दोनों योजनाओं में पात्र किसानों को अधिकतम 20-20 हजार रुपये तक की सहायता मिल सकती है।
700 रुपये क्विंटल से कम भाव मिलने पर मिलेगी राहत
उप निदेशक उद्यान डॉ. विनीत कुमार के अनुसार, भाव स्थिरता योजना का लाभ लेने के लिए आलू की बिक्री 700 रुपये प्रति क्विंटल से कम कीमत पर होनी चाहिए। इसके लिए आलू का आकार 30 से 80 मिलीमीटर के बीच और गुणवत्ता निर्धारित मानकों के अनुरूप होनी जरूरी है। किसान को व्यापारी से भुगतान बैंकिंग माध्यम से प्राप्त करना होगा।
इस योजना के तहत अनुदान उत्पादन लागत के 25 प्रतिशत या उत्पादन लागत और बिक्री मूल्य के अंतर के आधार पर तय किया जाएगा। इन दोनों में से जो राशि कम होगी, उसी के अनुसार अनुदान मिलेगा।
दो हेक्टेयर और 200 क्विंटल तक की सीमा
भाव स्थिरता योजना में एक किसान के लिए अधिकतम दो हेक्टेयर आलू रोपित क्षेत्र और 200 क्विंटल उत्पादन की सीमा तय की गई है। इसके तहत अधिकतम 20 हजार रुपये का अनुदान मिल सकता है। पट्टे पर जमीन लेकर आलू की खेती करने वाले किसान भी योजना के पात्र होंगे।
किसान आलू मंडी, उपमंडी, निजी शीतगृह परिसर या सीधे खेत से आलू बेचकर योजना का लाभ ले सकते हैं। हालांकि, अनुदान के लिए निर्धारित गुणवत्ता, बिक्री मूल्य और भुगतान संबंधी शर्तों को पूरा करना जरूरी होगा।
शीतगृह में आलू रखने पर 100 रुपये प्रति क्विंटल अनुदान
निजी शीतगृहों में आलू का भंडारण करने वाले किसानों के लिए भी सहायता का प्रावधान है। इस योजना के तहत भंडारण शुल्क पर 100 रुपये प्रति क्विंटल अनुदान मिलेगा। अधिकतम 200 क्विंटल आलू के भंडारण पर 20 हजार रुपये तक सहायता दी जा सकती है। इस योजना का लाभ लेने के लिए शीतगृह से आलू की निकासी करना जरूरी है।
ऐसे करें आवेदन
दोनों योजनाओं का लाभ लेने के लिए किसानों को आधार कार्ड या कृषक आईडी के माध्यम से ई-केवाईसी करानी होगी। इसके बाद आवेदन के साथ बैंक पासबुक, खसरा-खतौनी और आलू की बिक्री या भंडारण से जुड़े जरूरी दस्तावेज अपलोड करने होंगे।
किसान उद्यान विभाग के आलू अनुदान पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। इसके अलावा जनसेवा केंद्र के माध्यम से भी आवेदन किया जा सकता है। आवेदन करने से पहले किसान संबंधित दस्तावेज और योजना की शर्तें जरूर जांच लें।
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