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हिमाचल प्रदेश : सूरज की रोशनी से साफ होगा झरनों का पानी... आईआईटी मंडी बना रहा सस्ती तकनीक

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Mohammad Aamil Updated Wed, 28 Oct 2026 04:34 PM IST
सार

आईआईटी मंडी हिमालय के दूरदराज गांवों के लिए सौर ऊर्जा आधारित जल शुद्धिकरण तकनीक विकसित कर रहा है। जानें कैसे सूर्य की रोशनी से पानी में मौजूद प्रदूषकों को हटाने पर शोध हो रहा है।

सांकेतिक तस्वीर
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया
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हिमाचल प्रदेश के दूरदराज के गांवों में स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के लिए आईआईटी मंडी के शोधकर्ता सौर ऊर्जा आधारित तकनीक विकसित कर रहे हैं। इस तकनीक में सूर्य की रोशनी और फोटो-इलेक्ट्रोकेमिकल प्रक्रिया की मदद से प्राकृतिक जलस्रोतों के पानी में मौजूद हानिकारक प्रदूषकों को हटाने की कोशिश की जाएगी। इसका उद्देश्य पहाड़ी क्षेत्रों के लोगों को कम लागत में साफ पानी उपलब्ध कराने का विकल्प तैयार करना है।

सूर्य की रोशनी से पानी साफ करने पर जोर
इस शोध में ऐसी प्रणाली विकसित की जा रही है, जो पानी में मौजूद सूक्ष्मजीवों और हानिकारक कार्बनिक पदार्थों को हटाने में मदद कर सके। इसमें प्रकाश के प्रति संवेदनशील सामग्री और विद्युत-रासायनिक प्रक्रिया का इस्तेमाल किया जाएगा।

हिमालय के कई दूरदराज के गांवों में बिजली और आधुनिक जल शुद्धिकरण सुविधाएं आसानी से उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे में सौर ऊर्जा से चलने वाली यह तकनीक उपयोगी साबित हो सकती है। हालांकि, इसकी प्रभावशीलता और लागत का पता शोध पूरा होने और परीक्षण के बाद ही चल सकेगा।

मंडी के तीन प्राकृतिक जलस्रोतों से लिए नमूने
शोध के शुरुआती चरण में हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले में कटौला, घोड़ा फार्म और स्कूल बाजार के तीन प्राकृतिक जलस्रोतों से पानी के नमूने लिए गए हैं। इन नमूनों की गुणवत्ता और उनमें मौजूद सूक्ष्मजीवों की जांच की गई है। इसी आधार पर सौर ऊर्जा से पानी साफ करने वाली प्रणाली विकसित करने की दिशा में काम किया जा रहा है।

प्रस्तावित तकनीक का पहले प्रयोगशाला में परीक्षण किया जाएगा। इसके बाद आईआईटी मंडी परिसर के आसपास के झरनों के पानी पर इसकी प्रभावशीलता जांची जाएगी। इससे पता चलेगा कि यह तकनीक प्राकृतिक जलस्रोतों के पानी से प्रदूषकों को हटाने में कितनी कारगर है।

दूरदराज के गांवों में मिल सकता है फायदा
हिमालयी क्षेत्रों में झरने लंबे समय से पेयजल के प्रमुख स्रोत रहे हैं। लेकिन प्राकृतिक जलस्रोतों का पानी हमेशा पीने के लिए सुरक्षित नहीं होता। इसलिए इसे पीने योग्य बनाने के लिए प्रभावी शुद्धिकरण व्यवस्था जरूरी है।

इस परियोजना के तहत छोटे स्तर पर काम करने वाली और लगातार पानी साफ करने में सक्षम प्रणाली विकसित करने की योजना है। यदि शोध के नतीजे सफल रहते हैं, तो इस तकनीक का इस्तेमाल उन पहाड़ी गांवों में किया जा सकता है, जहां पारंपरिक जल शुद्धिकरण सुविधाएं लगाना मुश्किल या महंगा है।

राष्ट्रीय मिशन के तहत मिल रही आर्थिक मदद
इस शोध परियोजना का नेतृत्व आईआईटी मंडी के प्रोफेसर डॉ. प्रेम फेलिक्स सिरिल कर रहे हैं। परियोजना को नेशनल मिशन ऑन हिमालयन स्टडीज (एनएमएचएस) के तहत आर्थिक सहायता दी गई है।डॉ. प्रेम फेलिक्स सिरिल के अनुसार, शोध कार्य अभी जारी है और इसके परिणामों का इंतजार है। तकनीक की वास्तविक क्षमता, लागत और बड़े स्तर पर इस्तेमाल की संभावनाओं का आकलन शोध और परीक्षण पूरा होने के बाद ही किया जा सकेगा।
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