Home›Baat Pate Ki›Apna Paisa›
Health Insurance Buying For The First Time Premium Comparison Claim Settlement Incurred Claim Ratio Icr
Health Insurance Guide: पहली हेल्थ पॉलिसी खरीदते समय प्रीमियम से आगे भी देखना बेहद जरूरी
गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली
Published by: Umashankar Mishra
Updated Tue, 27 Jan 2026 09:52 PM IST
सार
हेल्थ इंश्योरेंस सिर्फ एक खर्च नहीं, बल्कि आपकी और आपके परिवार की आर्थिक सुरक्षा है। पहली बार पॉलिसी लेते समय थोड़ी समझदारी और जानकारी आपको भविष्य में बड़े खर्च और मानसिक तनाव से बचा सकती है।
यह भी जरूर देखें कि क्लेम कितने समय में सेटल होता है।
- फोटो : गांव जंक्शन
पहली बार हेल्थ इंश्योरेंस खरीदते समय ज्यादातर लोग सिर्फ प्रीमियम की तुलना करते हैं, जबकि असली फर्क तब सामने आता है, जब अस्पताल में भर्ती होने की नौबत आती है। एक अच्छी पॉलिसी वही होती है जो क्लेम के वक्त काम आए। इसलिए, पॉलिसी खरीदने से पहले उसके कुछ अहम मापदंडों को समझना बेहद जरूरी है।
कंपनी कैसे निपटाती है क्लेम
किसी भी बीमा कंपनी की विश्वसनीयता समझने का पहला संकेत उसका दावा अनुपात (Incurred Claim Ratio) होता है। यह बताता है कि कंपनी ने अपने पास आए कुल प्रीमियम में से कितना हिस्सा क्लेम के रूप में लौटाया। आमतौर पर 70 से 90 प्रतिशत के बीच का दावा अनुपात (आईसीआर) संतुलित माना जाता है। बहुत कम आईसीआर इस बात का संकेत हो सकता है कि कंपनी क्लेम देने में कंजूसी करती है, जबकि बहुत ज्यादा आईसीआर भविष्य में प्रीमियम बढ़ने के जोखिम को दर्शाता है।
क्लेम सेटलमेंट का आंकड़ा
क्लेम सेटलमेंट अनुपात (Claim Settlement Ratio) यह दिखाता है कि कंपनी को मिले कुल क्लेम में से कितने क्लेम वास्तव में सेटल किए गए। ऊंचा सीएसआर ग्राहकों के बीच भरोसा बढ़ाता है। लेकिन, इसके साथ यह भी देखना जरूरी है कि कंपनी क्लेम कितनी जल्दी निपटाती है। आदर्श स्थिति यह होती है कि अधिकांश क्लेम 90 दिनों के भीतर सेटल हो जाएं, ताकि मरीज और परिवार को आर्थिक तनाव का सामना न करना पड़े।
भरोसे का संकेत सीएसआर
सीएसआर बताता है कि कंपनी को मिले कुल क्लेम में से कितने क्लेम सेटल हुए।
95% या उससे ऊपर का सीएसआर बेहतर माना जाता है।
यह भी जरूर देखें कि क्लेम कितने समय में सेटल होता है।
सिर्फ ऊंचा सीएसआर नहीं, क्लेम सेटलमेंट की स्पीड भी अहम है।
कमरे का किराया और वेटिंग पीरियड
कई हेल्थ पॉलिसियों में कमरे के किराये की एक सीमा तय होती है। अस्पताल के कमरे का किराया निर्धारित सीमा से अधिक है, तो इलाज से जुड़े अन्य खर्च आंशिक रूप से ही कवर होते हैं, जिससे आपको बड़ा बिल खुद चुकाना पड़ सकता है। इसी तरह, पहले से मौजूद बीमारियों पर लागू वेटिंग पीरियड को भी समझना जरूरी है, क्योंकि इसके चलते शुरुआती वर्षों में पूरा कवरेज नहीं मिल पाता।
महंगा पड़ सकता है सस्ता प्रीमियम
कुछ पॉलिसियों में को-पेमेंट या कटौती योग्य राशि (Deductible) जैसी शर्तें होती हैं। इसका मतलब यह है कि हर क्लेम में आपको तय प्रतिशत या तय रकम खुद देनी होगी। ये शर्तें प्रीमियम को कम दिखाती हैं, लेकिन क्लेम के वक्त आपकी जेब पर भारी पड़ सकती हैं। खासकर बुजुर्गों के लिए ऐसी शर्तों से बचना समझदारी होती है।
कैशलेस सुविधा का पैमाना
कैशलेस इलाज की सुविधा सिर्फ उन्हीं अस्पतालों में मिलती है, जो बीमा कंपनी के नेटवर्क में शामिल होते हैं। इसलिए, पॉलिसी लेते समय यह देखना जरूरी है कि आपके शहर और आसपास के प्रमुख अस्पताल उस नेटवर्क का हिस्सा हैं या नहीं। साथ ही, पॉलिसी में दिए गए निषिद्धता संबंधी शर्तों (Exclusions) को ध्यान से पढ़ना चाहिए, ताकि क्लेम के वक्त कोई अप्रत्याशित झटका न लगे।
हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।