चीनी अंतरिक्ष यात्रियों ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए अपने स्पेस स्टेशन में पहली बार धान की सफल कटाई की है। रिपोर्ट के अनुसार, शेनझोउ-23 मिशन का दल अपने साथ मई महीने में धान के बीज अंतरिक्ष में ले गया था, जिन बीजों से पहली फसल की कटाई हुई है।
वैज्ञानिकों के अनुसार, यह प्रयोग भविष्य में अंतरिक्ष में इंसानों के लिए भोजन उत्पादन की क्षमता विकसित करने में मील का पत्थर साबित हो सकता है। इससे भविष्य के लंबे अंतरिक्ष मिशनों में भोजन के लिए धरती पर निर्भरता कम होगी।
प्रयोग का मकसद- जीरो ग्रेविटी वातावरण में धान को समझना
चाइना साइंस डेली के अनुसार, इस प्रयोग का उद्देश्य शून्य गुरुत्वाकर्षण में धान की आनुवंशिक स्थिरता और दोबारा उगने की क्षमता की जांच करना है। इसके लिए जापोनिका प्रजाति के धान के बीजों का चयन किया गया था, जो अपनी बेहतर अनुकूलन क्षमता और 3 से 4 महीने में पककर तैयार होने के लिए जाने जाते हैं।
धरती से दो तरीके के बीज ले गए थे यात्री
अंतरिक्ष यात्री अपने साथ बीजों के दो समूह ले गए थे: पहला समूह उन बीजों का था जो कभी धरती की सतह से बाहर नहीं गए। दूसरा समूह उन बीजों का था जो 2022 में अंतरिक्ष में ही पैदा हुए थे और बाद में धरती पर तीन सीजन तक उगाए गए थे।
अंतरिक्ष यात्रियों ने धान उगाने के लिए दो तरीकों का उपयोग किया। पहला बीज से बीज का उत्पादन, इसमें देखा जा रहा है कि क्या अंतरिक्ष में पहले से पहुंच बना चुके बीज नए बीजों की तुलना में वहां के माहौल में अधिक तेजी से ढल पाते हैं। दूसरा रेटूनिंग मॉडल है, इसमें फसल पकने के बाद केवल ऊपरी हिस्सा काटा जाता है और जड़ों को छोड़ दिया जाता है, ताकि उन्हीं जड़ों से दोबारा नई फसल उग सके।
इस प्रयोग के काफी अहम मायने
विशेषज्ञों के अनुसार, यह तय करने के लिए यह प्रयोग बहुत महत्वपूर्ण है कि क्या मनुष्य अंतरिक्ष में अपनी भोजन आपूर्ति को स्थिर बना सकता है। चीन ने 2022 में दुनिया का पहला बीज से बीज प्रयोग किया था, जिसमें 120 दिनों में 59 बीज पैदा हुए थे।
चीनी वैज्ञानिक पिछले दो दशकों से इस दिशा में काम कर रहे हैं। इसकी शुरुआत 2006 में शिजियान-8 उपग्रह मिशन के साथ हुई थी। अब, अंतरिक्ष यात्री धान की कटी हुई बालियों, बीजों और जमे हुए पौधों के नमूनों को शोध के लिए वापस धरती पर लाएंगे, जिससे भविष्य की अंतरिक्ष कृषि के मॉडल को और बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।