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युवाओं के लिए बिजनेस का मौका : मछली भंडारण के लिए कोल्ड स्टोरेज और रेफ्रिजरेटेड वाहनों पर लाखों की सब्सिडी

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Devesh Saraswat Updated Mon, 10 Aug 2026 12:54 PM IST
सार

  • हिमाचल सरकर ने मछली भंडारण सुविधा को मजबूती देने के लिए सब्सिडी योजना लॉन्च की
  • तीन तरह के शीत भंडारण ढांचों पर 70 फीसदी सब्सिडी मिलेगी
  • जानें योजना की पात्रता और नियम...

हिमाचल सरकार ने मछली भंडारण सुविधा को मजबूती देने के लिए सब्सिडी योजना लॉन्च की है।
हिमाचल सरकार ने मछली भंडारण सुविधा को मजबूती देने के लिए सब्सिडी योजना लॉन्च की है। - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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हिमाचल प्रदेश सरकार ने मछली भंडारण सुविधा को मजबूती देने के लिए सब्सिडी योजना लॉन्च की है। इस योजना के तहत तीन तरह के शीत भंडारण ढांचों पर 70 फीसदी सब्सिडी की सुविधा है।  सरकार का कहना है कि भंडाराण सुविधा को मजबूत करने से मछली की गुणवत्ता लंबे समय तक बनी रहेगी और मछली पालकों को बेहतर दाम मिल सकेगा।

इन योजना के तहत आप 5 मीट्रिक टन वाला कोल्ड स्टोरेज, फ्रिज वाली वैन और फ्रीज-ड्राई यूनिट लगा सकते हैं। 5-मीट्रिक टन कोल्ड स्टोरेज की कुल लागत 15 लाख रुपये तय की गई हैष। वहीं, फ्रीज-ड्राई यूनिट की लागत 10 लाख और रेफ्रिजेरेटेड वैन की 20 लाख रुपये तय की गई है। योजना के लाभार्थियों को कुल लागत का 70 फीसदी हिस्सा सब्सिडी के तौर पर सरकार देगी।

ये लोग उठा सकेंगे योजना का लाभ 
इस योजना का लाभ मछली पालक उत्पादक संगठन, सहकारी समितियां, उद्यमी, बेरोजगार युवा, एसएचजी और मछुआरे और मछली विक्रेता उठा सकते हैं।

आवेदन के लिए जरूरी शर्तें
इस योजना का लाभार्थी बनने के लिए आपको कुछ शर्ते पूरी करनी होंगीस जैसे कोल्ड स्टोरेज लगाने के लिए आपके पास अपनी या 10 साल की लीज पर जमीन होनी चाहिए। वहीं, फ्रीज-ड्राई यूनिट लागने में मछली विक्रेताओं को तरजीह दी जाएगी।रेफ्रिजेरेटेड वैन के तहत आवेदक के पास एक ड्राइवर होना जरूरी है।

सीधे खाते में आएगा सब्सिडी का पैस
जानकारी के अनुसार, निरीक्षण के बाद सब्सिडी का पैसा सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में डीबीटी के माध्यम से बृभेजा जाएगा।

CM सुखविंदर सिंह सुक्खू के अनुसार, यह पहल मत्स्य क्षेत्र को आधुनिक बनाने की सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि कोल्ड-चेन और बेहतर बुनियादी ढांचे से मछलियों की बर्बादी कम होगी और मछुआरों को अपनी उपज का सही मूल्य मिल सकेगा।



 
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