राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात और उत्तर प्रदेश के प्रमुख क्षेत्रों में होने वाली लहसुन की खेती में सही बुवाई तकनीक, उन्नत किस्मों और संतुलित पोषण से बेहतर उत्पादन हासिल किया जा सकता है। राजस्थान कृषि अनुसंधान संस्थान (RARI), जयपुर के वैज्ञानिक डॉ. शशि कुमार बैरवा बता रहे हैं लहसुन की बुवाई का सही समय, खेत की तैयारी, रेज्ड बेड और ड्रिप सिंचाई का तरीका। साथ ही जानिए भीमा पर्पल और जी-282 जैसी उन्नत किस्मों से 180 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक उत्पादन लेने, बीज उपचार से फसल को बीमारियों से बचाने और सल्फर के इस्तेमाल से गुणवत्ता सुधारने के तरीके। कच्चा लहसुन बेचने के बजाय पेस्ट, पाउडर और प्यूरी बनाकर प्रसंस्करण से आमदनी बढ़ाने के विकल्प भी जानिए।
HIGHLIGHTS
लहसुन की बुवाई के लिए मध्य अक्टूबर से मध्य नवंबर का समय सबसे उपयुक्त है
रेज्ड बेड और ड्रिप सिंचाई से कम पानी में बेहतर उत्पादन और स्वस्थ फसल पाएं
भीमा पर्पल और जी-282 जैसी उन्नत किस्मों से 180 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक उत्पादन संभव है
बुवाई से पहले बीज उपचार जरूरी, वरना फफूंद और जड़ गलन से हो सकता है नुकसान
लहसुन की गुणवत्ता और तीखापन बढ़ाने के लिए प्रति हेक्टेयर 20 किलो सल्फर का प्रयोग करें
कच्चा लहसुन बेचने के बजाय पेस्ट, पाउडर और प्यूरी बनाकर बढ़ाएं आमदनी