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चारे की किल्लत होगी दूर: VB-G RAM G के तहत बनेंगे चारा बैंक, पशु शेड और दूध संग्रह केंद्र... 22 कामों पर जोर

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Mohammad Aamil Updated Thu, 05 Nov 2026 01:26 PM IST
सार

  • 22 तरह के काम होंगे: चारा उत्पादन, चरागाह विकास, पशु शेड और डेयरी सुविधाओं से जुड़े 22 कामों की पहचान की गई है।

  • चारे की कमी होगी दूर: गांवों में चारा बैंक, साइलेज यूनिट और चारा भंडारण केंद्र बनाए जा सकेंगे।

  • पशुपालकों को फायदा: गाय, भैंस, बकरी, सूअर और मुर्गी पालन के लिए पशु शेड बनाने और मरम्मत का प्रावधान।

  • दूध कारोबार को मिलेगा बढ़ावा: गांवों में दूध संग्रह केंद्र और पशु चिकित्सा केंद्र बनाए जाएंगे।

VB-G RAM G के तहत बनेंगे चारा बैंक, पशु शेड और दूध संग्रह केंद्र
VB-G RAM G के तहत बनेंगे चारा बैंक, पशु शेड और दूध संग्रह केंद्र - फोटो : AI Image
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विस्तार
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गांवों में पशुओं के लिए चारे की कमी दूर करने और पशुपालन से जुड़े कामकाज को मजबूत बनाने के लिए केंद्र सरकार ने नई पहल की है। इसके तहत ग्रामीण विकास विभाग और पशुपालन एवं डेयरी विभाग ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को संयुक्त सलाह जारी की है। इसमें विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) यानी VB-G RAM G के तहत चारा उत्पादन, चरागाह विकास, पशु शेड, दूध संग्रह केंद्र और पशु चिकित्सा सुविधाएं विकसित करने पर जोर दिया गया है।

इस पहल का मुख्य उद्देश्य छोटे और सीमांत किसानों के साथ भूमिहीन परिवारों की आजीविका को मजबूत करना है। सरकार का मानना है कि पशुपालन और डेयरी ग्रामीण परिवारों की कमाई का अहम जरिया हैं। ऐसे में चारे की उपलब्धता बढ़ाने और पशुओं के लिए जरूरी सुविधाएं विकसित करने से ग्रामीण परिवारों को फायदा मिल सकता है।

चारा उत्पादन से लेकर पशु शेड बनाने तक 22 कामों को मंजूरी
सरकार की ओर से जारी सलाह में VB-G RAM G के तहत पहले से मंजूर 375 कार्यों में से पशुपालन और चारा विकास से जुड़े 22 कामों की पहचान की गई है। इनके तहत व्यक्तिगत और सामुदायिक स्तर पर चारा उगाने, चरागाह विकसित करने और पशुओं के लिए जरूरी ढांचा तैयार करने जैसे काम किए जा सकेंगे।

इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं-
  • किसानों और समुदायों के लिए चारा उत्पादन की व्यवस्था।
  • गांवों में सामुदायिक चरागाह और पशुओं के लिए चरने की जमीन विकसित करना।
  • चारा भंडारण केंद्र, चारा बैंक और साइलेज यूनिट बनाना।
  • गाय, बकरी, सूअर और मुर्गी पालन के लिए पशु शेड बनाना और उनकी मरम्मत करना।
  • गांवों में दूध संग्रह केंद्र बनाना और उनकी मरम्मत करना।
  • सामुदायिक पशु चिकित्सा केंद्रों का निर्माण और मरम्मत।
  • पशुओं के लिए पानी की नांद और चारा-पानी की दूसरी सुविधाएं बनाना।
  • किसानों के लिए एजोला टैंक का निर्माण करना।

इन कामों से गांवों में चारे की उपलब्धता बढ़ाने के साथ पशुपालन से जुड़े बुनियादी ढांचे को मजबूत किया जा सकेगा।

ग्राम पंचायत तय करेगी कहां कितना काम जरूरी
सरकार ने इन योजनाओं को लागू करने में ग्राम पंचायतों की भूमिका अहम रखी है। चारा उत्पादन और पशुपालन से जुड़े काम ग्राम पंचायत विकास योजनाओं में शामिल किए जाएंगे। इन योजनाओं को ग्रामसभा की मंजूरी और स्थानीय जरूरतों के आधार पर तैयार किया जाएगा। राज्यों को सलाह दी गई है कि वे अपनी कुल योजना राशि का कम से कम 5 फीसदी हिस्सा चारा उत्पादन और पशुपालन से जुड़े कार्यों पर खर्च करने की दिशा में प्रयास करें। हालांकि, यह खर्च स्थानीय जरूरतों, स्वीकृत योजनाओं और लागू दिशा-निर्देशों के आधार पर होगा।

जिन गांवों में बड़ी संख्या में परिवार पशुपालन पर निर्भर हैं, वहां इन कामों को प्राथमिकता देने की बात कही गई है। खासकर उन ग्राम पंचायतों पर ध्यान देने को कहा गया है, जहां 30 फीसदी से अधिक आबादी की आजीविका पशुपालन पर निर्भर है।

मौसम के अनुकूल चारा उत्पादन को मिलेगा बढ़ावा
सरकार ने राज्यों को स्थानीय जलवायु और जमीन के अनुसार चारा उत्पादन की योजना बनाने की सलाह दी है। इसके लिए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के भारतीय घासभूमि एवं चारा अनुसंधान संस्थान (ICAR-IGFRI) की ओर से तैयार राज्यवार चारा विकास योजनाओं का इस्तेमाल किया जा सकता है। इन योजनाओं के तहत ऐसी चारा किस्मों, बारहमासी घास और खेती-पशुपालन को एक साथ जोड़ने वाली तकनीकों को बढ़ावा देने पर जोर है, जो स्थानीय परिस्थितियों के अनुकूल हों।

राज्य स्तर पर बनेगी कार्ययोजना
केंद्र ने राज्यों को ग्रामीण विकास, पशुपालन, कृषि और दूसरे संबंधित विभागों के बीच तालमेल बनाकर चारा सुरक्षा और पशुपालन ढांचे के विकास के लिए कार्ययोजना तैयार करने को कहा है। इससे सरकारी योजनाओं और उपलब्ध बजट का बेहतर इस्तेमाल किया जा सकेगा।

125 दिन के रोजगार की कानूनी गारंटी
VB–G RAM G अधिनियम 1 जुलाई 2026 से लागू हो चुका है। इसके तहत ग्रामीण परिवारों को एक साल में 125 दिन के मजदूरी रोजगार की कानूनी गारंटी दी गई है। इस योजना में टिकाऊ संपत्तियां बनाने पर जोर है। चारा उत्पादन और पशुपालन से जुड़े काम भी इसी व्यवस्था के तहत किए जाएंगे। हालांकि, इन कार्यों को लागू करते समय सामाजिक ऑडिट, मजदूरी और सामग्री खर्च से जुड़े नियमों तथा लाभार्थियों के चयन के तय प्रावधानों का पालन करना होगा।

सरकार का कहना है कि इस पहल से गांवों में रोजगार के अवसर बढ़ने के साथ पशुपालन और डेयरी से जुड़े परिवारों की आजीविका मजबूत होगी। साथ ही चारे की उपलब्धता बढ़ने और पशुओं के लिए जरूरी सुविधाएं विकसित होने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी सहारा मिलेगा।
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