शुरुआत में बाजार की चुनौतियां आईं, तो उन्होंने नो लॉस-नो प्रॉफिट पर काम किया और फिर 2018 में पीएयू लुधियाना से फूड प्रोसेसिंग की बारीकियां सीखीं। आज वे अपनी 10 एकड़ जमीन पर गन्ना, मूंग, मिलेट्स, मक्का, ज्वार, बाजरा और सोनामोती गेहूं उगाकर 70 से ज्यादा वैल्यू-एडेड प्रोडक्ट्स तैयार कर रहे हैं। सुखजीत जी ने भारी मशीनों में अपनी पूंजी फंसाने के बजाय थर्ड पार्टी प्रोसेसिंग का स्मार्ट मॉडल अपनाया,
जिसमें कच्चा माल और रेसिपी उनकी होती है।
आज उनका 100 रुपये किलो वाला सोनामोती गेहूं प्रोसेस होकर 800 रुपये किलो के बिस्किट के रूप में बिकता है। इसके साथ ही मिलेट्स के नूडल्स, पास्ता, पोहा, बच्चों के लिए मक्का-ज्वार के रिंग्स और सोलर ड्रायर से सुखाए स्प्राउट्स पूरे देश के साथ-साथ एनआरआई ग्राहकों के जरिए 8 से 10 देशों तक पहुंच रहे हैं। अगर आप भी सुखजीत सिंह जी के इस मॉडल को समझना चाहते हैं या उनसे जुड़ना चाहते हैं, तो उनसे बुढलाडा ब्लॉक, मानसा में या उनके मोबाइल नंबर 8000003551 पर संपर्क कर सकते हैं।
HIGHLIGHTS
100 रुपये किलो गेहूं से 800 रुपये किलो के बिस्किट तैयार
मंडी में कच्चा माल नहीं, खुद की प्रोसेसिंग से बढ़ाई कमाई
10 एकड़ में खेती, 70 तरह के वैल्यू-एडेड उत्पाद तैयार
आटा, पास्ता, नूडल्स से लेकर कुकीज तक अपना ब्रांड
भारी मशीनों के बजाय थर्ड पार्टी से कम लागत में प्रोसेसिंग
पंजाब से 8–10 देशों तक पहुंच रहे किसान के प्रोडक्ट