30 अक्टूबर तक देश में रबी फसलों की बुवाई का रकबा पिछले साल के मुकाबले करीब 46% घटकर 37.56 लाख हेक्टेयर रह गया है। सरसों की बुवाई में 47%, दलहन में 52% और चने के रकबे में 59% की गिरावट दर्ज की गई है। गेहूं की बुवाई भी फिलहाल पिछले साल से काफी पीछे है।
खेतों में नमी की कमी, सामान्य से अधिक तापमान और मौसम की अनिश्चितता ने रबी सीजन की शुरुआत धीमी कर दी है। अगर बुवाई की यह सुस्ती आगे भी जारी रहती है, तो इसका असर फसल उत्पादन, खाद्य तेल और दालों के आयात, किसानों की ग्रामीण आय और खाद्य महंगाई पर पड़ सकता है। देखिए, रबी बुवाई के ताजा आंकड़े क्या संकेत दे रहे हैं और आगे किसानों के सामने कौन-सी चुनौतियां हैं।
HIGHLIGHTS
रबी बुवाई का रकबा 46% घटा, खेती की शुरुआत सुस्त
सरसों और चने की बुवाई सबसे ज्यादा पिछड़ी
खेतों में नमी की कमी, बढ़ते तापमान से किसान परेशान
रबी बुवाई पर कृषि मंत्री की हाई लेवल बैठक
गेहूं-दालों के उत्पादन पर संकट, आयात बढ़ने का खतरा
रबी बुवाई में देरी से बढ़ सकती है खाद्य महंगाई