हिंगोली के हल्दी अनुसंधान केंद्र और CSIR-IITR के बीच समझौता हुआ है। इसके तहत हल्दी के औषधीय गुणों, गुणवत्ता और सुरक्षा पर शोध के साथ मूल्यवर्धित उत्पाद विकसित किए जाएंगे।
महाराष्ट्र के हिंगोली स्थित बालासाहेब ठाकरे हरिद्रा (हल्दी) अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केंद्र ने लखनऊ के CSIR-भारतीय विषविज्ञान अनुसंधान संस्थान (CSIR-IITR) के साथ समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं। इसका उद्देश्य हल्दी पर वैज्ञानिक शोध को बढ़ावा देना और किसानों को बेहतर आर्थिक लाभ दिलाना है।
सरकारी विज्ञप्ति के मुताबिक, गुरुवार को लखनऊ में हुए समझौते के तहत हिंगोली की हल्दी में करक्यूमिन और अन्य औषधीय गुणों पर शोध किया जाएगा। इसके अलावा हल्दी की गुणवत्ता और सुरक्षा का अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप परीक्षण होगा, जिससे वैश्विक बाजार में इसकी पहुंच आसान हो सकेगी।
समझौते में हल्दी से मूल्यवर्धित उत्पाद तैयार करने पर भी जोर रहेगा। इनमें दवाइयां, स्वास्थ्य पूरक उत्पाद और सौंदर्य प्रसाधन शामिल हैं।
हिंगोली महाराष्ट्र का प्रमुख हल्दी उत्पादक जिला है। कृषि विभाग के हालिया आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2026 में यहां लगभग 44,882 हेक्टेयर क्षेत्र में हल्दी की खेती हो रही है।
यह समझौता CSIR-IITR के 62वें वार्षिक समारोह के दौरान हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता CSIR की महानिदेशक डॉ. एन. कलैसेल्वी ने की। इसमें हल्दी अनुसंधान केंद्र के अध्यक्ष हेमंत पाटिल, पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. अनंतकुमार हेगड़े और CSIR-IITR के निदेशक डॉ. भास्कर नारायण मौजूद रहे।