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सोलर पंप से 30 लाख किसानों को लाभ: अन्नदाताओं तक पहुंची सौर ऊर्जा, PM मोदी ने गिनाई कुसुम योजना की उपलब्धियां

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Umashankar Mishra Updated Sat, 19 Sep 2026 01:25 PM IST
सार

पर्यावरण और विकास को अक्सर एक-दूसरे के विरोधी माना जाता रहा है, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को इस धारणा को चुनौती देते हुए कहा कि भारत इन दोनों को साथ लेकर चलने की राह पर है और इस यात्रा में देश के किसान भी एक अहम हिस्सेदार बनकर उभरे हैं। 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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नई दिल्ली में राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) द्वारा आयोजित 'पर्यावरण और जलवायु गतिशीलता का भविष्य' विषयक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए PM नरेंद्र मोदी ने स्वच्छ ऊर्जा के फायदे सीधे खेत-खलिहान तक पहुंचने की बात रेखांकित की।

30 लाख किसानों तक पहुंचा सोलर पंप का फायदा
प्रधानमंत्री ने बताया कि पीएम-कुसुम योजना के तहत देशभर के करीब 30 लाख किसानों को सोलर पंप का सीधा लाभ मिल चुका है। अब खेतों की सिंचाई के लिए बिजली या डीजल पर निर्भरता घटाकर किसान सूरज की रोशनी से अपने पंप चला पा रहे हैं। 

इसके साथ ही प्रधानमंत्री मोदी ने पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना का भी जिक्र किया, जिसके तहत अब तक 50 लाख से ज्यादा घरों में रूफटॉप सोलर लगाए जा चुके हैं। यह आंकड़ा बताता है कि स्वच्छ ऊर्जा अब सिर्फ बड़ी परियोजनाओं तक सीमित नहीं, बल्कि आम घरों और खेतों तक पहुंच चुकी है।

सौर, पवन, जल और परमाणु ऊर्जा पर भी जोर
पीएम मोदी ने कहा कि भारत की स्वच्छ ऊर्जा यात्रा सिर्फ सौर ऊर्जा तक सीमित नहीं है, बल्कि पवन ऊर्जा, जल विद्युत और परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में भी देश ने बड़ी छलांग लगाई है। उन्होंने बताया कि पिछले 12 वर्षों में देश की पवन ऊर्जा क्षमता तीन गुनी हो चुकी है, और जल विद्युत क्षमता में भी लगातार बढ़ोतरी हुई है।

सौर ऊर्जा में 80 गुना बढ़ोतरी
सौर ऊर्जा के विस्तार पर बात करते हुए पीएम मोदी ने बताया कि 12 साल पहले जहां देश की सौर ऊर्जा क्षमता महज करीब 2 गीगावॉट थी, वह अब बढ़कर 160 गीगावॉट से भी ज्यादा हो चुकी है। यही विस्तार अब खेतों और घरों तक भी पहुंचता दिख रहा है।

परमाणु ऊर्जा पर अड़ंगे लगाने वालों पर तंज
परमाणु ऊर्जा की चर्चा करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत इस क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। साथ ही, उन्होंने पर्यावरण की बहस में एक विरोधाभास की ओर इशारा करते हुए कहा, "जो लोग पर्यावरण पर लंबे-लंबे भाषण देते हैं, वही जब मैं परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं को आगे बढ़ाता हूं, तो उन्हें रोकने के लिए अदालत का रुख कर लेते हैं।" 

बता दें कि भारत ने अपने न्यूक्लियर एनर्जी मिशन के तहत 2047 तक परमाणु ऊर्जा क्षमता को 100 गीगावॉट तक ले जाने का लक्ष्य रखा है।

हाइड्रोजन ट्रेन से लेकर इलेक्ट्रिक वाहनों तक
प्रधानमंत्री ने बताया कि भारत स्वच्छ ऊर्जा और टिकाऊ परिवहन के लिए कोयला गैसीकरण, हाइड्रोजन और इलेक्ट्रिक वाहनों जैसे कई विकल्पों पर एक साथ काम कर रहा है। उन्होंने देश की पहली स्वदेशी हाइड्रोजन ट्रेन का जिक्र करते हुए इसे स्वच्छ परिवहन की दिशा में एक नए चरण की शुरुआत बताया। यह ट्रेन इस साल जुलाई में जींद-सोनीपत खंड पर परिचालन में आई थी।

वैश्विक मंच पर भारत की पहल
प्रधानमंत्री ने भारत की अंतरराष्ट्रीय जलवायु पहलों का भी जिक्र किया, जिनमें इंटरनेशनल सोलर अलायंस, कोएलिशन फॉर डिजास्टर रेजिलिएंट इंफ्रास्ट्रक्चर, ग्लोबल बायोफ्यूल अलायंस, इंटरनेशनल बिग कैट अलायंस और मिशन LiFE शामिल हैं। उन्होंने कहा कि भारत का प्रति व्यक्ति कार्बन उत्सर्जन अब भी वैश्विक औसत से कम है।

पीएम मोदी ने कहा, "भारत का दृष्टिकोण उसकी सभ्यतागत परंपराओं में निहित है।" साथ ही उन्होंने वैश्विक स्तर पर सामूहिक कार्रवाई की अपील भी की।

17 देशों के प्रतिनिधि जुटे सम्मेलन में
19 और 20 सितंबर को आयोजित हो रहे इस दो-दिवसीय NGT सम्मेलन में 17 देशों के न्यायाधीश, पर्यावरण विशेषज्ञ, नीति-निर्माता और न्यायिक प्रतिनिधि जलवायु परिवर्तन, पर्यावरण शासन और पर्यावरणीय न्याय जैसे विषयों पर मंथन कर रहे हैं।
 
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