छत्तीसगढ़ के सारंगढ़-बिलागढ़ जिले में मौजूद गोमर्दा सैंक्चुअरी में लगभग पांच दशक बाद काले हिरण (ब्लैकबक) फिर से लौट रहे हैं। जानकारी के अनुसार, अगले एक सप्ताह के भीतर 50 काले हिरणों को यहां धीरे-धीरे शिफ्ट किया जाएगा। इन वन्यजीवों को राज्य के ही बरनवापारा वन्यजीव अभयारण्य से लाया जा रहा है, जहां पहले किए गए हिरणों को बसाने के प्रयास बहुत सफल रहे हैं।
पांच दशक पहले हो गए थे विलुप्त
वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, शिकार, जंगलों पर अतिक्रमण और तेजी से हुए विकास कार्यों की वजह से इस इलाके में काले हिरणों की संख्या लगातार कम होती गई थी। हालात ऐसे हो गए थे कि 1970 के दशक में काले हिरण यहां से पूरी तरह गायब हो गए। पिछले 50 सालों से इन्हें इस क्षेत्र में विलुप्त माना जा रहा था। इस कमी को दूर करने के लिए अब राज्य वन्यजीव बोर्ड ने इन्हें फिर से बसाने की एक बड़ी योजना पर काम शुरू किया है।
बरनवापारा की सफलता से मिला हौसला
अधिकारियों ने बताया कि इससे पहले साल 2017-2018 में बलौदाबाजार जिले के बरनवापारा अभयारण्य में एक बड़े प्रोजेक्ट के तहत 77 काले हिरणों को बसाया गया था। इनमें से 50 काले हिरण नई दिल्ली के राष्ट्रीय चिड़ियाघर से और 27 हिरण बिलासपुर के कानन पेंडारी चिड़ियाघर से लाए गए थे। सरकार के अनुसार, यह प्रयास बेहद सफल रहा और आज वहां काले हिरणों की संख्या 150 के पार पहुंच गई है। बरनवापारा सैंक्चुअरी के अधीक्षक कृष्णनू चंद्राकर ने बताया कि जानवरों को नए माहौल की आदत डालने में समय लगता है, इसलिए उन्हें धीरे-धीरे खुले जंगल में छोड़ा गया था।
हिरणों के लिए एकदम सही है गोमर्दा का माहौल
वन विभाग के अधिकारियों का मानना है कि गोमर्दा अभयारण्य का जंगल इन हिरणों के लिए बहुत अनुकूल है। वन विभाग के प्रधान मुख्य वन संरक्षक (PCCF) ओ.पी. यादव के मुताबिक, गोमर्दा और बरनवापारा के बीच की दूरी सिर्फ 70 किलोमीटर है और दोनों जगहों का प्राकृतिक माहौल लगभग एक जैसा है। गोमर्दा में हिरणों के लिए पर्याप्त पानी और घास के मैदान मौजूद हैं, जो उनके रहने के लिए एक बेहतरीन जगह बनाते हैं।
अधिकारियों को पूरी उम्मीद है कि इस नई पहल से गोमर्दा अभयारण्य में न सिर्फ पर्यावरण और जीव-जंतुओं की स्थिति बेहतर होगी, बल्कि पर्यटन भी बढ़ेगा। इससे आस-पास के गांवों के लोगों को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे। गौरतलब है कि काले हिरणों को बचाने के इस अभियान की सफलता पर इसी साल 26 अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी अपने 'मन की बात' कार्यक्रम में तारीफ की थी।