केंद्र सरकार ने इथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल (EBP) कार्यक्रम को लेकर उठाए जा रहे सवालों पर विस्तृत स्पष्टीकरण जारी करते हुए कहा है कि यह योजना देश की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने, कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता घटाने, किसानों की आय बढ़ाने और खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से संचालित की जा रही है। सरकार का कहना है कि हाल के कुछ दावों में कार्यक्रम की अधूरी और भ्रामक तस्वीर पेश की गई है।
खाद्य सुरक्षा से कोई समझौता नहीं
सरकार ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS), राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA), कल्याणकारी योजनाओं और अनिवार्य बफर स्टॉक की जरूरतें पूरी होने के बाद ही अधिशेष खाद्यान्न को इथेनॉल उत्पादन के लिए मंजूरी दी जाती है। इसके अलावा मानव उपभोग के अनुपयुक्त क्षतिग्रस्त अनाज और टूटे चावल का भी उपयोग किया जाता है।
FCI चावल को नहीं मिली कोई विशेष रियायत
सरकार ने कहा कि FCI चावल को एथेनॉल उत्पादकों को किसी विशेष रियायती दर पर उपलब्ध नहीं कराया गया। यह केवल स्वीकृत कच्चे माल (फीडस्टॉक) में से एक है और इसकी कीमत भी सरकार द्वारा निर्धारित समान मूल्य प्रणाली के तहत तय होती है।
आपूर्ति वर्ष 2025-26 के लिए इथेनॉल खरीद मूल्य इस प्रकार हैं:
मक्का - ₹71.86 प्रति लीटर
गन्ना रस/सिरप - ₹65.61 प्रति लीटर
क्षतिग्रस्त खाद्यान्न - ₹64.00 प्रति लीटर
बी-हैवी शीरा - ₹60.73 प्रति लीटर
FCI चावल - ₹60.32 प्रति लीटर
सी-हैवी शीरा - ₹57.97 प्रति लीटर
ईथेनॉल उत्पादन में सीमित है FCI चावल की भूमिका
सरकार के अनुसार, इथेनॉल उत्पादन किसी एक फीडस्टॉक पर निर्भर नहीं है। इथेनॉल सप्लाई वर्ष (ESY) 2023-24 में FCI चावल की हिस्सेदारी मात्र 0.02 प्रतिशत थी, जो इथेनॉल आपूर्ति वर्ष (ESY) 2025-26 में अधिशेष स्टॉक उपलब्ध होने के कारण बढ़कर 24.64 प्रतिशत हुई। इसी अवधि में मक्का की हिस्सेदारी 42.6 प्रतिशत से घटकर 35.96 प्रतिशत रह गई।
पेट्रोल कीमतों को झटकों से बचाने में मिली मदद
सरकार का दावा है कि वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमत लगभग 135 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचने के दौरान यदि एथेनॉल मिश्रण नहीं होता तो दिल्ली में पेट्रोल की कीमत करीब 125 रुपये प्रति लीटर हो सकती थी। लेकिन 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण के कारण उपभोक्ताओं को लगभग 94.77 रुपये प्रति लीटर की दर से पेट्रोल मिला, जिससे प्रति लीटर लगभग 30 रुपये तक की राहत मिली।
विदेशी मुद्रा बचत और किसानों को मिल रहा लाभ
सरकार के अनुसार, इथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम के अब तक के प्रमुख परिणाम इस प्रकार हैं:
1.97 लाख करोड़ रुपये से अधिक की विदेशी मुद्रा की बचत हुई।
316 लाख मीट्रिक टन से अधिक कच्चे तेल के आयात का विकल्प मिला है।
950 लाख मीट्रिक टन से अधिक CO₂ उत्सर्जन में कमी दर्ज की गई।
किसानों और डिस्टिलरी क्षेत्र को 1.66 लाख करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान हुआ है।
केंद्र सरकार ने कहा है कि भारत अभी भी अपनी लगभग 88 प्रतिशत कच्चे तेल की आवश्यकता आयात से पूरी करता है। ऐसे में इथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम केवल ईंधन मिश्रण नहीं, बल्कि वैश्विक तेल मूल्य झटकों से देश की अर्थव्यवस्था और उपभोक्ताओं की सुरक्षा का एक महत्वपूर्ण माध्यम है।
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