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पेट्रोल में 20% इथेनॉल मिश्रण पर केंद्र का बड़ा बयान : खाद्य सुरक्षा और जल संसाधनों पर असर से किया इनकार

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Umashankar Mishra Updated Mon, 20 Jul 2026 07:04 PM IST
सार

  • सरकार ने कहा कि 20% इथेनॉल मिश्रण लक्ष्य से खाद्य सुरक्षा और खाद्यान्न उपलब्धता प्रभावित नहीं हुई है। 
  • इथेनॉल उत्पादन केवल अधिशेष अनाज, क्षतिग्रस्त खाद्यान्न, टूटे चावल और कृषि अवशेषों से किया जा रहा है।
  • इथेनॉल उत्पादन में मक्का की हिस्सेदारी 2021-22 के शून्य से बढ़कर 2025-26 में लगभग 37% हो गई है।
  • आधुनिक डिस्टिलरी में जीरो लिक्विड डिस्चार्ज (ZLD) प्रणाली और जल संरक्षण उपाय लागू किए जा रहे हैं।

सरकार के अनुसार, इथेनॉल कार्यक्रम पूरी तरह 'वेस्ट टू वेल्थ' (Waste-to-Wealth) मॉडल पर आधारित है।
सरकार के अनुसार, इथेनॉल कार्यक्रम पूरी तरह 'वेस्ट टू वेल्थ' (Waste-to-Wealth) मॉडल पर आधारित है। - फोटो : सांकेतिक तस्वीर
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विस्तार
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देश में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण (Ethanol Blended Petrol) के लक्ष्य को लेकर उठ रही आशंकाओं पर केंद्र सरकार ने सोमवार को संसद में स्थिति स्पष्ट की। राज्यसभा में लिखित जवाब देते हुए पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने कहा कि इस कार्यक्रम से न तो भारत की खाद्य सुरक्षा प्रभावित हुई है और न ही जल संसाधनों पर अतिरिक्त दबाव पड़ा है।

खाद्य सुरक्षा को पहली प्राथमिकता
सरकार के अनुसार, इथेनॉल कार्यक्रम पूरी तरह 'वेस्ट टू वेल्थ' (Waste-to-Wealth) मॉडल पर आधारित है, जिसमें केवल अधिशेष कृषि उपज, क्षतिग्रस्त खाद्यान्न, टूटे चावल और मानव उपभोग के लिए अनुपयुक्त अनाज का उपयोग किया जाता है।

सरकार ने स्पष्ट किया कि न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खुली खरीद प्रणाली के तहत सबसे पहले सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS), राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA), अन्य कल्याणकारी योजनाओं और बफर स्टॉक की जरूरतें पूरी की जाती हैं। इसके बाद ही अधिशेष खाद्यान्न को इथेनॉल उत्पादन के लिए मंजूरी दी जाती है।

मक्का बना इथेनॉल का नया आधार
जल संरक्षण को ध्यान में रखते हुए सरकार ने इथेनॉल उत्पादन में मक्का (Maize) का उपयोग तेजी से बढ़ाया है। वर्ष 2021-22 में इसकी हिस्सेदारी शून्य थी, जो 2025-26 इथेनॉल सप्लाई ईयर में बढ़कर लगभग 37% हो गई है। सरकार का कहना है कि मक्का, गन्ने की तुलना में कम पानी वाली फसल है, जिससे जल उपयोग का दबाव कम होगा।

टूटे चावल और कृषि अवशेषों से भी बनेगा इथेनॉल
सरकार ने बताया कि इथेनॉल उत्पादन में केवल अधिशेष खाद्यान्न ही नहीं, बल्कि क्षतिग्रस्त अनाज, टूटे चावल और कृषि अवशेषों से बनने वाले दूसरी पीढ़ी (2G) इथेनॉल को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।

खाद्य महंगाई पर नहीं पड़ा असर
केंद्र के अनुसार, इथेनॉल कार्यक्रम से खाद्य महंगाई प्रभावित नहीं हुई है। सरकार ने कहा कि इथेनॉल के लिए केवल अधिशेष चीनी का ही उपयोग किया जाता है, जिसके कारण 2024-25 की तुलना में खुदरा चीनी कीमतों में औसतन केवल 2.5% वृद्धि दर्ज की गई है। इसी तरह, FCI के अधिशेष चावल का उपयोग भी खाद्य सुरक्षा और बफर स्टॉक की आवश्यकताओं को पूरा करने के बाद ही किया जाता है।

जल संरक्षण पर भी जोर
सरकार ने बताया कि आधुनिक इथेनॉल संयंत्र जीरो लिक्विड डिस्चार्ज (ZLD) प्रणाली का पालन करते हैं, जिससे अपशिष्ट जल का पुनर्चक्रण और पुनः उपयोग किया जाता है। इसके अलावा प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत ड्रिप सिंचाई, माइक्रो इरिगेशन और अन्य जल संरक्षण उपायों को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।

हरित ईंधन और किसानों के हित साथ-साथ
सरकार का कहना है कि इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम का उद्देश्य हरित ईंधन को बढ़ावा देना, किसानों को नए बाजार उपलब्ध कराना और ऊर्जा आयात पर निर्भरता कम करना है, जबकि खाद्य सुरक्षा और पर्यावरणीय संतुलन से कोई समझौता नहीं किया जा रहा।
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