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एक टुकड़ा जमीन, दोगुनी कमाई: चित्तूर में खेती के साथ सौर ऊर्जा से बिजली उत्पादन बना किसानों की नई उम्मीद

गांव जंक्शन डेस्क, चित्तूर Published by: Umashankar Mishra Updated Wed, 08 Apr 2026 01:41 PM IST
सार

Solar Farming: चित्तूर का यह एग्रीवोल्टाइक मॉडल (Agrivoltaics Model) एक ही जमीन पर खेती (Farming) और ऊर्जा उत्पादन (Energy Production) को संभव बनाकर किसानों की आय (Farmers' Income) बढ़ाने का टिकाऊ समाधान बनकर उभर रहा है।

खेत के ऊपर सोलर पैनल लगाए जाते हैं और नीचे खेती जारी रहती है।
खेत के ऊपर सोलर पैनल लगाए जाते हैं और नीचे खेती जारी रहती है। - फोटो : गांव जंक्शन
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विस्तार
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आंध्र प्रदेश के चित्तूर जिले में शुरू हुआ एग्रीवोल्टाइक प्रोजेक्ट (Agrivoltaics Project) खेती और ऊर्जा के मेल का एक नया मॉडल पेश कर रहा है। इस पहल के जरिए किसान अपनी जमीन छोड़े बिना अतिरिक्त आय और सस्ती ऊर्जा का लाभ ले सकेंगे। यह मॉडल किसानों को एक ही जमीन से फसल और बिजली दोनों की आय देगा।

खेती की लागत घटाकर और ऊर्जा आत्मनिर्भरता बढ़ाकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था (Rural Economy) को मजबूत कर सकता है। यह मॉडल भविष्य में ग्रामीण विकास (Rural Development), ऊर्जा सुरक्षा (Energy Security) और जलवायु लचीलापन का मजबूत आधार बन सकता है।

ऊपर सोलर पैनल, नीचे खेती
इस परियोजना की सबसे खास बात है कि इसमें खेत के ऊपर सोलर पैनल लगाए जाते हैं और नीचे खेती जारी रहती है। हर 1–1.5 एकड़ के ब्लॉक में लगभग 300 किलोवाट क्षमता की सोलर यूनिट स्थापित की जा रही है। इससे खेती बाधित नहीं होती और जमीन का बेहतर उपयोग संभव होता है।

किसानों की आय में आएगी स्थिरता 
एग्रीवोल्टाइक मॉडल किसानों को एक अतिरिक्त और स्थिर आय का स्रोत देता है। मौसम, बाजार और उत्पादन के उतार-चढ़ाव के बीच यह मॉडल आय की अनिश्चितता को कम करने में मददगार साबित हो सकता है।

खेती की लागत घटाने में सहायक 
इस प्रोजेक्ट से उत्पन्न बिजली का उपयोग खेतों से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर - जैसे पंप, बोरवेल, कोल्ड स्टोरेज, ड्रायर और पैकहाउस - चलाने में किया जाएगा। इससे किसानों की ऊर्जा लागत घटेगी और ग्रिड बिजली पर निर्भरता कम होगी।

गर्मी में की मार से फसलों को राहत
ऊंचाई पर लगे सोलर पैनल आंशिक छाया प्रदान करते हैं, जिससे फसलों पर गर्मी का असर कम होता है और मिट्टी में नमी बनी रहती है। इससे खासकर गर्म महीनों में फसल की उत्पादकता और स्थिरता बढ़ सकती है।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था का बनेगा नया तंत्र 
लगभग 600 एकड़ में फैले इस प्रोजेक्ट का लक्ष्य 6 मेगावाट सोलर क्षमता विकसित करना है। यह केवल बिजली उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि सिंचाई, भंडारण और प्रोसेसिंग जैसी सुविधाओं को जोड़कर एक संपूर्ण ग्रामीण इकोसिस्टम तैयार करता है।

क्यों महत्वपूर्ण है यह मॉडल?
यह पहल दिखाती है कि बिना खेती की जमीन में कटौती किए, ऊर्जा और खाद्य उत्पादन साथ-साथ बढ़ाया जा सकता है। अगर इसे बड़े स्तर पर लागू किया जाए, तो यह किसानों की आय, ऊर्जा सुरक्षा और जलवायु अनुकूल खेती - तीनों में बड़ा बदलाव ला सकता है।
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