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यह संकेत मामूली नहीं : हाथ-पैर पड़ रहे सुन्न, थकान और मुंह में छाले? हो सकती है विटामिन B12 की कमी

गांव जंक्शन डेस्क, दिल्ली Published by: Mohammad Aamil Updated Sun, 21 Jun 2026 06:24 PM IST
सार

हाथ एवं पैरों में सुन्नपन, थकान या मुंह में छाले हों, तो इसे सामान्य कमजोरी न समझें; तुरंत टेस्ट कराएं और न्यूरोलॉजिस्ट या फिजिशियन से परामर्श लें, क्योंकि यह शरीर में विटामिन बी-12 की कमी का संकेत हो सकता है।
 

यह संकेत मामूली नहीं
यह संकेत मामूली नहीं - फोटो : गांव जंक्शन
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विस्तार
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तेज रफ्तार जिंदगी में थकान, कमजोरी और ध्यान केंद्रित न हो पाना मौजूदा दौर की आम समस्याएं बन चुकी हैं। ज्यादातर लोग इसे तनाव या काम के बोझ से जोड़कर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन, कई बार इसके पीछे एक मौन कारण छिपा होता है, विटामिन बी-12 की कमी। यह कमी धीरे-धीरे शरीर को अंदर से कमजोर करती है और समय रहते ध्यान न दिया जाए तो गंभीर समस्याएं पैदा हो सकती हैं। वीएमएमसी एवं सफदरजंग अस्पताल, नई दिल्ली, नेफ्रोलॉजी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. हिमांशु वर्मा ने गांव जंक्शन को इस बारे में विस्तार से बताया। 

पानी में घुलने वाला विटामिन
विटामिन बी-12, जिसे कोबालामिन भी कहा जाता है, एक जरूरी पोषक तत्व है, जिसे शरीर खुद नहीं बना सकता। यह पानी में घुलने वाला विटामिन है और शरीर के कई महत्वपूर्ण कामों में इसकी अहम भूमिका होती है। सबसे पहले, यह लाल रक्त कोशिकाएं (आरबीसी) बनाने में मदद करता है। इसकी कमी होने पर रक्त कोशिकाएं ठीक से नहीं बन पातीं, जिससे मिगालोब्लास्टिक एनीमिया हो सकता है। इसके अलावा, यह नर्व सिस्टम को सुरक्षित रखने के लिए जरूरी मायलिन शीथ का निर्माण भी करता है, जो नसों की सुरक्षा करती है।

धीमी हो जाती है शरीर की ऊर्जा उत्पादन मशीन
विटामिन बी-12 की भूमिका सिर्फ यहीं तक सीमित नहीं है। यह हर कोशिका के डीएनए निर्माण और भोजन को ऊर्जा में बदलने की प्रक्रिया (मेटाबॉलिज्म) में भी बेहद अहम भूमिका निभाता है। अगर विटामिन बी-12 की मात्रा कम है, तो शरीर की ऊर्जा उत्पादन मशीन ही धीमी पड़ जाती है। हालांकि, भारत में बी-12 की कमी बहुत आम समस्या है। इसकी एक बड़ी वजह खानपान की हमारी आदतें हैं। 

इनमें पाया जाता है विटामिन बी-12 
यह विटामिन मुख्य रूप से एनिमल प्रोडक्ट्स जैसे दूध, दही, अंडा, मछली और मांस में पाया जाता है। इसीलिए, शाकाहारी और वीगन लोगों में इसकी कमी का खतरा अधिक होता है। पेट से जुड़ी बीमारियां, बढ़ती उम्र, कुछ दवाओं (जैसे मेटफॉर्मिन या एंटासिड) का लंबे समय तक इस्तेमाल और ज्यादा शराब का सेवन भी विटामिन बी-12 के अवशोषण को प्रभावित करता है।

सामान्य होते हैं लक्षण, लेकिन लेते हैं गंभीर रूप 
बी-12 की कमी के लक्षण शुरुआत में बहुत सामान्य लगते हैं, जैसे थकान, कमजोरी, चक्कर आना, भूख कम लगना या त्वचा का पीला पड़ना। कई लोगों को जीभ में जलन या मुंह में छाले भी हो सकते हैं। अगर इन लक्षणों पर ध्यान न दिया जाए, तो यह समस्या गंभीर रूप ले सकती है। गंभीर स्थिति में न्यूरोलॉजिकल लक्षण सामने आते हैं, हाथ-पैर में झनझनाहट, सुन्नपन, चलने में असंतुलन, याददाश्त कमजोर होना और यहां तक कि डिप्रेशन या कन्फ्यूजन जैसी मानसिक समस्याएं भी हो सकती हैं। 

देते हैं कई बीमारियों को न्यौता
लंबे समय तक बी-12 की कमी रहने पर नसों को स्थायी नुकसान हो सकता है, जिसे ठीक करना मुश्किल हो जाता है। चिंता की बात यह है कि इसके लक्षण कई बार दूसरी बीमारियों जैसे थायरॉइड, डायबिटीज या डिप्रेशन से मिलते-जुलते हैं। इसलिए, सही पहचान के लिए ब्लड टेस्ट जरूरी होता है। सीरम बी-12, एमएमए मिथाइलमेलोोनिक एसिड और होमोसिस्टीन जैसे टेस्ट डॉक्टर की सलाह से कराए जाते हैं। उपचार की बात करें तो हल्की कमी को सही डाइट और सप्लीमेंट्स से ठीक किया जा सकता है।

समय पर पहचान और इलाज 
दूध, दही, पनीर, अंडा, मछली और फोर्टिफाइड फूड बी-12 के अच्छे स्रोत हैं। अगर कमी ज्यादा पाई जाती है या शरीर इसे ठीक से अवशोषित नहीं कर पा रहा, तो डॉक्टर इंजेक्शन थेरेपी की सलाह दे सकते हैं। सबसे जरूरी है समय पर पहचान और सही इलाज। खासकर, बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएं, शाकाहारी लोग और लंबे समय से दवाएं ले रहे लोगों को नियमित जांच करानी चाहिए। 
 
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