विज्ञापन
Home› Sehat Tola› Breast Milk Kgmu Tests Reveal Toxic Chemicals Aflatoxins Heavy Metals In 100 Samples

जहरीला हो रहा मां का दूध! : जांच में मिले विषैले रसायन, 100 नमूनों में एफलाटॉक्सिन और भारी धातुओं की मौजूदगी

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Mohammad Aamil Updated Sat, 26 Sep 2026 12:16 PM IST
सार

केजीएमयू के अध्ययन में स्तनपान कराने वाली 100 महिलाओं के दूध के नमूनों की जांच की गई। 73 फीसदी नमूनों में एफलाटॉक्सिन एम1 और 96 फीसदी में ओक्राटॉक्सिन मिला। कुछ नमूनों में आर्सेनिक, कैडमियम, सीसा समेत अन्य धातुएं भी पाई गईं।

मां का दूध भी जहरीला?
मां का दूध भी जहरीला? - फोटो : गांव जंक्शन
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

मां का दूध नवजात के लिए सबसे सुरक्षित और पौष्टिक आहार माना जाता है, लेकिन इसमें कुछ हानिकारक रसायनों और धातुओं की मौजूदगी सामने आई है। लखनऊ के किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) के एक अध्ययन में स्तनपान कराने वाली महिलाओं के दूध के नमूनों में एफलाटॉक्सिन एम1, ओक्राटॉक्सिन समेत कई विषैले पदार्थ और कुछ भारी धातुएं मिली हैं। यह अध्ययन सितंबर में जर्नल ऑफ फूड साइंस एंड टेक्नोलॉजी में प्रकाशित हुआ है। शोधकर्ताओं ने स्तनपान करा रहीं 100 महिलाओं के दूध के नमूनों की जांच की।

73 फीसदी नमूनों में एफलाटॉक्सिन एम1
केजीएमयू के विष विज्ञान संस्थान में हुई जांच में 73 फीसदी नमूनों में एफलाटॉक्सिन एम1 और 96 फीसदी नमूनों में ओक्राटॉक्सिन पाया गया। इसके अलावा फफूंद से बनने वाले कुछ अन्य रसायन जियरालेनोन, अल्फा-जियरालेनोल और बीटा-जियरालेनोल भी नमूनों में मिले।

शोध के मुताबिक, ये रसायन भोजन और अन्य स्रोतों के जरिए शरीर में पहुंच सकते हैं। ऐसे में इनके दूध के जरिए नवजात तक पहुंचने की आशंका भी रहती है। हालांकि, अध्ययन में इन पदार्थों की मौजूदगी दर्ज की गई है और इनके स्वास्थ्य पर प्रभाव को लेकर आगे और जांच की जरूरत है।

दूषित चारे से बन सकता है एफलाटॉक्सिन एम1
एफलाटॉक्सिन एम1 एक विषैला पदार्थ है, जो दूषित चारा खाने वाले दुधारू पशुओं के दूध में आ सकता है। वहीं, ओक्राटॉक्सिन मुख्य रूप से फफूंद से बनने वाला विषैला रसायन है। ये पदार्थ दूषित भोजन या खाद्य सामग्री के जरिए शरीर में पहुंच सकते हैं।

दूध के नमूनों में मिलीं कई धातुएं
अध्ययन में कुछ हानिकारक धातुओं की मौजूदगी भी सामने आई। जांच किए गए नमूनों में 26 फीसदी में क्रोमियम, 49 फीसदी में मैंगनीज, 42 फीसदी में आर्सेनिक, 34 फीसदी में कैडमियम और 12 फीसदी में सीसा मिला। इन धातुओं की मौजूदगी के स्रोत और इनके संभावित प्रभावों को समझने के लिए आगे अध्ययन की जरूरत है।

कीटनाशकों के इस्तेमाल पर जताई चिंता
केजीएमयू की स्त्री रोग विशेषज्ञ प्रो. सीमा मल्होत्रा के अनुसार, फसलों में कीटनाशकों का इस्तेमाल बढ़ रहा है। इन रसायनों के खाद्य पदार्थों के जरिए शरीर में पहुंचने की आशंका रहती है। उन्होंने कहा कि महिलाओं के दूध में मिले विषैले पदार्थों और धातुओं के पीछे इसके अलावा अन्य संभावित कारणों की भी जांच की जा रही है।

खानपान पर ध्यान देने की जरूरत
केजीएमयू के मेडिसिन विभाग के डॉ. डी. हिमांशू के मुताबिक, खानपान को लेकर सावधानी बरतने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि भोजन और पेय पदार्थों के जरिए कई रसायन शरीर में पहुंच सकते हैं। उन्होंने खाद्य पदार्थों में हानिकारक रसायनों की मात्रा कम करने और कीटनाशकों के अत्यधिक इस्तेमाल पर नियंत्रण के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश बनाने की जरूरत बताई।

अध्ययन के निष्कर्ष खाद्य पदार्थों में विषैले रसायनों और भारी धातुओं की निगरानी बढ़ाने की जरूरत की ओर इशारा करते हैं। हालांकि, मां के दूध की गुणवत्ता और नवजात के स्वास्थ्य पर इनके वास्तविक प्रभाव को समझने के लिए व्यापक और आगे के शोध जरूरी होंगे।
विज्ञापन
विज्ञापन