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Heat Stroke Alarm Don T Make Mistake Of Thinking Just Hot Heatstroke Can Be Fatal Learn How To Avoid It
हीट स्ट्रोक खतरे की घंटी : 'बस गर्मी लगी है...' समझने की न करें भूल, लू बन सकती है जानलेवा, जानिए कैसे बचें
गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली
Published by: Mohammad Aamil
Updated Sun, 19 Apr 2026 04:55 PM IST
सार
जब शरीर का तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से अधिक हो जाए और पसीना आना बंद हो जाए तो यह हीट स्ट्रोक है, जो जानलेवा हो सकता है। किसान, मजदूर, बुजुर्ग और बच्चों पर इसके प्रकोप का खतरा सबसे अधिक होता है। समय पर पहचान और सही उपचार से जान बचाई जा सकती है।
अप्रैल-मई की चिलचिलाती धूप में खेत में काम करते किसान हों, निर्माण स्थल पर मेहनत करते मजदूर हों या दोपहर में घर के बाहर खेलते बच्चे - सभी को एक खतरे का सामना करना पड़ सकता है, जिसे हम आमतौर पर 'बस थोड़ी गर्मी लग गई' कहकर टाल देते हैं। लेकिन, यही लापरवाही कभी-कभी जानलेवा साबित होती है।
भारत समेत पूरी दुनिया में तापमान लगातार बढ़ रहा है और इसके साथ ही लू यानी हीट स्ट्रोक के मामले भी तेजी से बढ़ रहे हैं। जलवायु परिवर्तन और ग्रीनहाउस प्रभाव के कारण ग्रीष्म लहरों का दौर पहले से कहीं अधिक तीव्र और लंबा होता जा रहा है। ऐसे में यह जानना बेहद जरूरी है कि लू आखिर होती क्या है, इसके लक्षण क्या हैं और अगर किसी को लू लग जाए तो क्या करना चाहिए।
लू लगती कैसे है - समझें पूरा मामला
हमारा शरीर एक बेहद समझदार मशीन की तरह है। जब बाहर गर्मी बढ़ती है, तो शरीर पसीने के जरिये खुद को ठंडा रखता है। पसीना निकलता है, हवा लगती है और शरीर का तापमान संतुलित रहता है। लेकिन, जब बाहर का तापमान बहुत अधिक हो जाता है या फिर कोई व्यक्ति तेज धूप में बहुत देर तक काम करता रहता है तो यह संतुलन बिगड़ जाता है।
हीट स्ट्रोक तब होता है जब शरीर का तापमान 40 डिग्री सेल्सियस यानी 104 डिग्री फारेनहाइट से अधिक हो जाता है और शरीर की प्राकृतिक ठंडक देने की व्यवस्था यानी पसीना आना बंद हो जाता है। यह दो तरह से हो सकता है - एक तो अत्यधिक गर्म वातावरण में लंबे समय तक रहने से और दूसरा गर्मी में बहुत अधिक शारीरिक मेहनत करने से। दोनों ही स्थितियां खतरनाक हैं।
ये लक्षण दिखें तो सतर्क हो जाएं
हीट स्ट्रोक के लक्षण कभी-कभी अचानक आते हैं और कभी-कभी धीरे-धीरे विकसित होते हैं। इसीलिए, सतर्क रहना जरूरी है। सबसे पहला और सबसे महत्वपूर्ण संकेत है तेज बुखार - 40 डिग्री सेल्सियस से अधिक। इसके साथ चक्कर आना और अचानक कमजोरी महसूस होना भी हीट स्ट्रोक का संकेत हो सकता है। व्यक्ति बेचैन हो सकता है या उसके व्यवहार में अचानक बदलाव आ सकता है।
धुंधला दिखना और अस्पष्ट बोलना भी इसके लक्षण हैं। इसके अलावा, दिल की धड़कन तेज होना और सांस लेने में तकलीफ, त्वचा का लाल व बहुत सूखा हो जाना या पसीने से पूरी तरह भीग जाना भी हीट स्ट्रोक के संकेत हो सकते हैं। सबसे गंभीर स्थिति में व्यक्ति बेहोश हो सकता है या उसे दौरे पड़ सकते हैं।
एक खास और जरूरी बात - हीट स्ट्रोक दिमाग की कार्यप्रणाली को सीधे प्रभावित करता है। इसीलिए, पीड़ित व्यक्ति सामान्य व्यवहार नहीं कर पाता। उसे पता भी नहीं चलता कि उसे क्या हो रहा है। ऐसे में आसपास के लोगों की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है।
किन लोगों को सबसे अधिक खतरा है
हर कोई हीट स्ट्रोक का शिकार हो सकता है, लेकिन कुछ लोग विशेष रूप से खतरे में होते हैं। खेतों में काम करने वाले किसान और मजदूर, निर्माण स्थल पर धूप में काम करने वाले श्रमिक और खिलाड़ी सबसे पहली श्रेणी में आते हैं। 65 साल से अधिक उम्र के बुजुर्गों और छोटे बच्चों का शरीर तापमान को नियंत्रित करने में कम सक्षम होता है, इसलिए वे भी अधिक खतरे में हैं।
गर्भवती महिलाएं, हृदय रोगी, डिहाइड्रेशन से पीड़ित लोग और अन्य बीमारियों से जूझ रहे लोग भी जोखिम में हैं। इसके अलावा, जो लोग बिना पंखे या एसी के बेहद गर्म कमरों या जगहों पर रहते हैं, उन्हें भी विशेष सतर्कता बरतनी चाहिए।
लू लग जाए तो तुरंत क्या करें
अगर किसी व्यक्ति में हीट स्ट्रोक के लक्षण दिखें तो एक-एक मिनट कीमती है। सबसे पहले उसे तुरंत किसी ठंडी या छायादार जगह पर ले जाएं। अगर घर के अंदर ले जाना संभव हो तो पंखा या एसी चालू करें। शरीर पर ठंडा पानी डालें या गीला कपड़ा रखें। बर्फ या कोल्ड पैक गर्दन, बगल और जांघों के पास रखें जहां खून की नसें बड़ी होती हैं।
गंभीर स्थिति में तुरंत अस्पताल ले जाएं
स्थिति गंभीर हो तो तुरंत अस्पताल जाएं। तीन बातें जो भूलकर भी नहीं करनी हैं - मरीज को जबरदस्ती पानी न पिलाएं क्योंकि बेहोशी में पानी फेफड़ों में जा सकता है। बुखार की दवा जैसे पैरासिटामोल न दें, क्योंकि यह हीट स्ट्रोक में काम नहीं करती। और देरी बिल्कुल न करें। अस्पताल में डॉक्टर सबसे पहले शरीर का तापमान कम करने पर ध्यान देते हैं। इसके लिए ठंडे पानी में डुबोना, पानी का छिड़काव और आईवी फ्लूइड्स दिए जाते हैं। गंभीर मामलों में आईसीयू की जरूरत पड़ सकती है।
देर हुई तो नुकसान हो सकता है
अगर समय पर इलाज नहीं मिला तो हीट स्ट्रोक के नतीजे गंभीर हो सकते हैं। मस्तिष्क को स्थायी नुकसान हो सकता है। किडनी और लिवर फेल हो सकते हैं। हृदय संबंधी गंभीर समस्याएं आ सकती हैं। व्यक्ति कोमा में जा सकता है या उसकी जान भी जा सकती है। यही कारण है कि इसे साधारण गर्मी की तकलीफ समझकर टालना बेहद खतरनाक है।
लू से बचाव - ये उपाय अपनाएं
लू से बचना मुश्किल नहीं है। कुछ सरल आदतें अपनाकर इस खतरे से काफी हद तक बचा जा सकता है। दिन भर खूब पानी पिएं और नींबू पानी, नारियल पानी या इलेक्ट्रोलाइट्स लेते रहें। सुबह 11 बजे से शाम 4 बजे के बीच तेज धूप में बाहर निकलने से बचें। हल्के रंग के ढीले और सूती कपड़े पहनें। शारीरिक मेहनत वाले काम सुबह जल्दी या शाम को करें। घर में पंखे या एसी का उपयोग करें। जरूरत पड़े तो शॉपिंग मॉल, पुस्तकालय या सामुदायिक केंद्र जैसी ठंडी जगहों पर जाकर राहत लें। बच्चों और बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखें और उन्हें अकेला धूप में न छोड़ें।
याद रखें - लू कोई मामूली बात नहीं
बढ़ती गर्मी के इस दौर में हीट स्ट्रोक एक बड़ी सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती बन चुका है। खेत में काम करने वाले किसान से लेकर शहर में रहने वाले बुजुर्ग तक - सभी को इसके प्रति जागरूक रहना होगा। लक्षणों की सही पहचान, तुरंत प्राथमिक उपचार और डॉक्टर की मदद - यही तीन चीजें जान बचा सकती हैं। गर्मी में सावधान रहें, पानी पिएं और जरूरी जानकारी अपने परिवार और पड़ोसियों के साथ जरूर साझा करें।
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